असल जिंदगी के दोस्तों का भी रीयूनियन
फिल्म ‘द यूनियन’ दो पुराने दोस्तों मार्क वालबर्ग और हैली बेरी का एक तरह से ऑन स्क्रीन रीयूनियन है। फिल्म में भी दोनों स्कूल के दिनों के दोस्त दिखाए गए हैं। रॉक्सेन ने एडवेंचर चुना और एक ऐसी संस्था की सदस्य बन गई जिसके बारे में वह खुद कहती है, “आधे से ज्यादा लोगों को पता नहीं कि हम हैं भी, और जिनको पता है वह पछताते हैं कि हमें जाना क्यों!” ये संस्था है ‘द यूनियन’ और ये उन खुफिया एजेंसियों से भी ज्यादा खुफिया काम करती है, जिनके सारे भूत और वर्तमान के एजेंट्स की कोई खुफिया लिस्ट लीक हो चुकी है। इस लिस्ट की नीलामी अपराध बाजार में होने ही वाली है। दूसरा एक कंस्ट्रक्शन वर्कर है, माइक। अपनी ही स्कूल टीचर के साथ हमबिस्तर हो चुका है। उसके सारे रिश्ते उसकी मां को जुबानी याद हैं और पहले से पता रहते हैं। अपनी दोस्त को बरसों बाद देखने के बाद माइक को जेम्स बॉन्ड की फिल्म ‘डाय एनदर डे’ की जिंक्स जैसी बिकनी गर्ल याद आती है।
घिसी पिटी कहानी ने गर्क किया बेड़ा
फिल्म ‘द यूनियन’ की सबसे कमजोर कड़ी है इसकी कहानी जिसमें नया कुछ भी नहीं है। जासूसों की सूची गायब होने के बाद उसे विश्वव्यापी माफिया से बचाने के लिए होन वाली भिड़ंत अब दर्शकों को न उत्साहित करती है और न ही उत्तेजित। नेटफ्लिक्स को ये कहानी कोई चार साल पहले भायी थी और तब से तो टेम्स में भी खूब सारा पानी बह चुका है। डेविड गैगनहाइम की इस कहानी पर हालांकि जिम बॉर्टन ने चुस्त पटकथा लिखने की कोशिश की है, लेकिन ये ऐसी कहानी है जिसमें दर्शक सीन दर सीन पहले से ही अंदाजा लगा सकता है कि आगे क्या होने वाला है, और वैसा होता भी रहता है।
अधूरी रही मार्क और हेली के रोमांस की ख्वाहिश
कलाकारों के रूप में मार्क वालबर्ग के लिए फिल्म ‘द यूनियन’ एक तरह से उनके जेम्स बॉन्ड का किरदार निभाने के सपने (अगर उन्होंने देखा हो तो) को पूरा करती दिखती है। हैली बेरी की टाइमिंग ज्यादा बेहतर है। मार्वल ने एक्समेन सीरीज के किरदारों को एवेंजर्स सीरीज की फिल्मों का हिस्सा बनाने के लिए मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स को हाल ही में बदला है। इधर, उम्र बढ़ने के साथ हैली बेरी का करिश्मा और बढ़ता ही जा रहा है। यहां माइक और रॉक्सेन के किरदारों में मार्क और हैली की केमिस्ट्री बढ़िया बन सकती थी लेकिन राइटिंग टीम ने दोनों के अतीत को कभी जमने ही नहीं दिया और वर्तमान में एक कार्गो प्लेन में मौका मिला भी तो उसे ढंग से पनपने ही नहीं दिया।
स्पाई थ्रिलर सा रहस्य व रोमांच नदारद
फिल्म ‘द यूनियन’ अपनी कहानी, पटकथा और निर्देशन में मात खाती फिल्म है। निर्देशक जूलियन फारिनो पूरी फिल्म में एक भी दृश्य ऐसा नहीं रच पाए हैं, जिसे किसी स्पाई थ्रिलर का हाईप्वाइंट माना जा सके। माइक को यूनियन का हिस्सा बनाने की वजह क्या रही? और क्यों इस पूरे हो हल्ले में ये किरदार ही बेस्ट फिट है, ये बताने से फिल्म चूक जाती है। रॉक्सेन और माइक के बीच धीमी आंच पर पकता रोमांस भी किसी भी दृश्य में उस निकटता को महसूस नहीं होने देता जिसकी परिणिति दोनों के बीच क्लाइमेक्स में दिखने वाली नजदीकी हो। ल्यूक केज के रूप में मशहूर रहे माइक कोल्टर का किरदार भी दमदार नहीं है। और, जब विलेन ही पहले से तय खांचे से निकला हो तो क्या ही कहानी का हीरो करेगा और क्या करेगी उसकी हीरोइन..!
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