द इंडिया स्टोरी मूवी रिव्यू
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कहानी
एक्स आर्मी ऑफिसर मेजर योगेश पाटिल (श्रेयस तलपडे) को पता चलता है कि उनकी बेटी परी (त्रिशा सरदा) को ब्लड कैंसर है। योगेश उसके इलाज में अपना सबकुछ झोंक देते हैं। जब पता चलता है कि परी को खाने में मिलाए जा रहे खतरनाक कीटनाशकों की वजह से कैंसर हुआ था तो योगेश सरकार, कीटनाशक कंपनियों और किसानों तक से इंसाफ के लिए लड़ता है।
इस काम में योगेश की मदद एडवोकेट अर्चना (काजल अग्रवाल) करती हैं। अब इस लड़ाई में क्या क्या सच निकलकर आता है? यह जानने के लिए फिल्म देख सकते हैं।
द इंडिया स्टोरी मूवी रिव्यू
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अभिनय
श्रेयस तलपडे यकीनन बड़े अनुभवी कलाकार हैं। एक बेबस पिता के रूप में उन्होंने संवेदनशील काम किया है पर कुछ सीन में वो एक जैसे ही भाव लिए नजर आते हैं। काजल अग्रवाल का काम ठीक ही है। उनका किरदार बहुत हल्का लिखा गया। कोर्टरूम सीन में वो ओवर ड्रामेटिक दिखती हैं।
दोनों कलाकारों से बेहतर काम तो चाइल्ड आर्टिस्ट त्रिशा सरदा ने किया है। उनकी मासूमियत आपका दिल जीत लेगी। मुरली शर्मा छोटी भूमिका में भी बड़ा असर करते हैं।
द इंडिया स्टोरी मूवी रिव्यू
- फोटो : इंस्टाग्राम
निर्देशन
निर्देशन चेतन डीके के पास एक कमाल का मुद्दा था पर बार बार बिखरता स्क्रीनप्ले और ढीले निर्देशन के चलते यह फिल्म कई जगह निराश करती है।
एक तरफ कोर्ट रूम ड्रामा है तो दूसरी तरफ इमोशनल ट्रैजिडी और इन दोनों के बीच फिल्म का स्क्रीनप्ले बिखर जाता है। कहीं ऐसा लगता है कि कोर्टरूम ड्रामा देख रहे हैं तो कहीं ऐसा लगता है कि यह एक इमोशनल फैमिली या फिर कोई डॉक्यूमेंट्री फिल्म है।
कुछ सीन में बोरिंग लेक्चर देने के बजाय उसे कहानी के तौर पर पेश किया जाता तो फिल्म बेहतर हो सकती थी। सब कुछ दिखाने के चक्कर में निर्देशक किसी भी एक दिशा में फोकस नहीं कर पाए।
देखें या नहीं
2 घंटे 20 मिनट की यह फिल्म ओटीटी पर आगे बढ़ाकर देख सकते हैं। सिर्फ श्रेयस तलपडे का अभिनय देखने और संवेदनशील मुद्दे को करीब से समझने के लिए।