द गारफील्ड मूवी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दुनिया का सबसे लोकप्रिय कार्टून किरदार
गारफील्ड एनीमेशन की दुनिया का सबसे लोकप्रिय किरदार माना जाता है। इसका कॉर्टून कॉमिक स्ट्रिप करीब साढ़े चार दशक पुराना है। दुनिया के सबसे ज्यादा प्रकाशनों में छपने का इसके पास अनोखा विश्वरिकॉर्ड है। इस किरदार पर बड़े परदे के लिए दो फिल्में ‘गारफील्ड द मूवी’ और ‘गारफील्ड ए टेल ऑफ टू किट्टीज’ पहले भी बन चुकी हैं, लेकिन सिने तकनीक के विकास के नए दौर में आई इस किरदार की नई फिल्म ‘द गारफील्ड मूवी’ का लेवल अलग ही है। फिल्म के एनीमेशन बनाने वाली कंपनी डीएनईजी (डबल निगेटिव) पर मालिकाना हक अब उन नमित मल्होत्रा का है जो भारतीय कंपनी प्राइम फोकस के कर्ताधर्ता हैं। नमित मल्होत्रा का नाम हाल के दिनों में रणबीर कपूर व साई पल्लवी अभिनीत फिल्म ‘रामायण’ के निर्माता के रूप में खूब चर्चा में रहा है।
द गारफील्ड मूवी
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पहचाने से किरदारों की रोचक कहानी
फिल्म ‘द गारफील्ड मूवी’ की कहानी थोड़ा सुस्ती के साथ शुरू होती है। ठीक अपने मुख्य किरदार गारफील्ड की शख्सीयत की तरह। खाने का वह दीवाना है। बचपन में पिता विक उसे एक रात यूं ही छोड़ जाता है। जॉन उसे अपने घर ले आता है। एक दोस्त ओडी भी घर आता है। दोनों की जिंदगी मौज में कट रही होती है। फिर एक रात दोनों का अपहरण हो जाता है। मामला विक से जुड़ा है जिससे उस बिल्ली जिंक्स से जुड़ा है जो विक की वजह से हवालात पहुंच गई और अब उसे अपनी कैद का बदला लेना है। गारफील्ड को बचाने उसका पिता आता है। लेकिन बचपन में अनाथ छोड़ दिए जाने की वजह से गारफील्ड उसे नाराज बना रहता है। कहानी पिता-पुत्र के बनते बिगड़ते रिश्तों के बीच एक सस्पेंस थ्रिलर की तरह आगे बढ़ती है और फिर एक एक्शन फिल्म में तब्दील हो जाती है।
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बाप-बेटे के भावुक रिश्ते का डीएनए
जिम डेविस के रचे किरदार गारफील्ड पर इस बार पॉल ए काप्लान, मार्क टोरग्रोव और डेविड रेनॉल्ड्स ने एक बहुत ही रोचक पटकथा रची है। तीनों ने फिल्म के किरदारों को यूं बुना है कि दर्शकों के सामने अलग अलग कथा सूत्र और उनकी क्षेपक कथाएं एक के बाद एक आती रहती हैं। गारफील्ड और विक की कहानी भावुक है। गारफील्ड और ओडी की कहानी मजेदार है। गारफील्ड को लेकर पागल होते जा रहे उसके मालिक जॉन की हालत देखी नहीं जाती। गारफील्ड का अपहरण करने वाली जिंक्स के अपने गैंग की कहानी अलग ही स्तर पर रहती है। और, इन सबके बीच है ओटो का खोया हुआ प्यार। बच्चों के लिए इतना सारा धमाल एक ही फिल्म में मिले तो करीब सौ मिनट की फिल्म शुरू से आखिर तक किसी रोलर कोस्टर राइड जैसी हो ही जाती है।
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ये है मार्क डिनडेल की एनीमेशन दीवानगी
फिल्म ‘द गारफील्ड मूवी’ की कहानी उम्दा है। इसके किरदारों का एनीमेशन भी कमाल है। फिल्म शुरू होती है गारफील्ड के टू डी एनीमेशन वाले किरदार से जो अपनी कहानी बताना शुरू करता है और फिर जैसे ही फिल्म थ्रीडी एनीमेशन अवतार में आती है। फिल्म का एनीमेशन वर्क डीएनईजी (पूर्व नाम डबल निगेटिव) ने किया। और, इस एनीमेशन के चलते ही गारफील्ड का इस बार रंग, रूप और रुआब सब बदल जाता है। फिल्म के निर्देशक मार्क डिनडल का एनीमेशन की दुनिया में बड़ा नाम रहा है। वह एनीमेशन ही जीते रहे हैं। चार दशक से भी ज्यादा समय से कार्टून किरदारों के बीच ही जीते रहे मार्क डिनडल की बतौर निर्देशक ये चौथी फिल्म है। उनकी पिछली फिल्म ‘चिकन लिटल’ रिलीज हुए 19 साल हो चुके हैं, लेकिन हॉलीवुड वाले बढ़ती उम्र के जादू को कैसे सिनेमा में चढ़ाते हैं, ये डिज्नी जैसी कंपनियों से सीखना चाहिए। आने वाला जमाना सीनियर सिटिजन्स का है। भारत में भी बुजुर्गों की संख्या अगले 10 साल में काफी होने वाली है और अपने बुजुर्ग तकनीशियनों का अनुभव अगर हिंदुस्तानी सिनेमा भी उठा सका तो इसकी सूरत बदल सकती है।
द गारफील्ड मूवी
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आवाजों ने बदल दी किरदारों की शख्सीयत
फिल्म ‘द गारफील्ड मूवी’ का मैंने अंग्रेजी संस्करण देखा और कह सकता हूं कि इसकी कहानी, पटकथा, निर्देशन और एनीमेशन के अलावा इस फिल्म को जो बात धमाकेदार बनाती है, वह है इसके किरदारों के लिए इस्तेमाल की गई आवाजें। गारफील्ड को आवाज दी है अभिनेता क्रिस प्रैट ने। और, किसी एनीमेशन फिल्म में सिर्फ आवाज से किरदार की शख्सीयत कैसे बदल जाती है, इसका सबसे सटीक उदाहरण ये फिल्म है। विक के किरदार में सैमुअल एल जैकसन ने उनका बढ़िया साथ दिया है। बाप-बेटे के बीच चलने वाली नोक झोंक में दोनों की आवाजें परदे परदे पर दिखने वाले एनीमेशन को बिल्कुल जीवंत कर देती हैं। जिंक्स के किरदार के लिए हाना, ओटो के किरदार के लिए विंग रेम्स और जॉन के किरदार में निकलस हाउल्ट ने भी अपनी आवाजों के आरोह अवरोह से बढ़िया माहौल बनाया है।
द गारफील्ड मूवी
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बच्चों के साथ समय बिताने का बढ़िया मौका
फिल्म ‘द गारफील्ड मूवी’ की बस दो ही दिक्कतें हैं। पहला है इसके काल्पनिक लोक के वातावरण का ज्यादा प्रभावी न हो पाना। ट्रेन के एक पहाड़ी पर भागने और फिर उसकी छत से कहानी के किरदारों के कूदने वाले दृश्य को इसके आसपास के वातावरण को अच्छे से रचकर और रोमांचक तथा और प्रभावी बनाया जा सकता था। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक बनाने में जॉन डेबने ने मौजूदा दौर के संगीत से प्रेरणा ली होती तो ये बालकों, किशोरों, युवाओं और उनके माता पिता को बेहतर तरीके से प्रभावित कर सकता था। फिर भी, फिल्म की कहानी कमाल है। एनीमेशन धमाल है। और, ये फिल्म अपनी डबिंग से मालामाल है। इस वीकएंड अगर अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहते हैं तो ये फिल्म आपके पूरे परिवार के लिए परफेक्ट है।