लगातार चार सुपरफ्लॉप फिल्में दे चुके अभिनेता अक्षय कुमार के करियर का बहुत बड़ा दारोमदार शुक्रवार को रिलीज हो रही फिल्म ‘सेल्फी’ पर टिका है। फिल्म ‘सूर्यवंशी’ के बाद से अक्षय की चार मेगा बजट फिल्में ‘बच्चन पांडे’, ‘सम्राट पृथ्वीराज’, ‘रक्षा बंधन’ और ‘रामसेतु’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रहीं। इसके अलावा ‘अतरंगी रे’ और ‘कठपुतली’ को फिल्म वितरक ही नहीं मिले जिसके चलते इन दोनों को सीधे ओटीटी पर रिलीज करना पड़ा। फिल्म 'सेल्फी' उनकी इस साल की पहली फिल्म है। अक्षय कुमार अक्सर इस बात को कहते आते हैं कि अपनी फ्लॉप फिल्मों के जिम्मेदार वह खुद हैं और फिल्मों के चुनाव को लेकर उन्हें अपना नजरिया बदलना पड़ेगा। लेकिन, अपनी ही बात पर वह गौर भी करते होंगे, 'सेल्फी' देखकर लगता नहीं है।
निर्माता करण जौहर की इस फिल्म में अक्षय कुमार एक सुपरस्टार की ही भूमिका में नजर आने वाले हैं जिसका परिवहन विभाग के एक अधिकारी से पंगा हो जाता है। कभी इस अधिकारी को एक सेल्फी के लिए न मिल पाने वाले इस सुपरस्टार को हालात से मजबूर होकर इसी अधिकारी के दफ्तर आना पड़ता है। अहं के टकराव पर बनी ये फिल्म दक्षिण भारतीय फिल्म ‘ड्राइविंग लाइसेंस’ की रीमेक है और जिस तरह से बॉक्स ऑफिस पर दक्षिण की फिल्मों की हिंदी रीमेक एक के बाद एक फ्लॉप हो रही हैं, उसे देखते हुए अक्षय कुमार, इमरान हाशमी, नुसरत भरूचा, डायना पेंटी और राहुल देव स्टारर इस फिल्म की एडवांस बुकिंग न के बराबर हुई है और सोशल मीडिया पर फिल्म ‘सेल्फी’ के सितारों की फोटो और वीडियोज की जैसी बाढ़ देखने को मिली है, उसे देखते हुए भी फिल्म को लेकर आम दर्शकों मे ज्यादा चाव देखने को नहीं मिल रहा है।
‘आत्मसम्मान जब दिल पर आ जाए तो दिमाग खराब हो जाता है।’ ‘अच्छे इंसान बनो फिल्म अपने आप चलेगी’, ‘एक बेटे का हीरो उसका बाप होता है और एक बेटा अपने हीरो को हारता हुआ नहीं देख सकता है’, जैसे चलताऊ संवादों के साथ फिल्म ‘सेल्फी’ की कहानी आगे बढ़ती है। पूरी फिल्म में अक्षय कुमार अपनी ही महिमा का गुणगान करते नजर आए हैं। मसलन, वह कितने व्यस्त हैं। साल में चार फिल्में, दो ओटीटी के लिए है। इसमें कई विज्ञापन, लाइव इवेंट और रियलिटी शो भी शामिल हैं। इन सब जुमलों के अलावा अगर अक्षय कुमार अच्छी कहानी का चयन करते और अपनी परफॉर्मेंस पर ध्यान देते तो शायद यह फिल्म दर्शकों को पसंद आती भी।
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फिल्म के निर्देशक राज मेहता 'सेल्फी' से पहले 'गुड न्यूज' और 'जुग जुग जियो' जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। 'सेल्फी' की शूटिंग उन्होंने बहुत भव्य स्तर पर की है। एक फिल्म को बनाने में जितनी तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स की जरूरत होती है, सब कुछ फिल्म में है, सिवाय एक अच्छी कहानी के। फिल्म की सिनेमाटोग्राफी बहुत अच्छी है। लेकिन म्यूजिक कुछ खास नहीं। शायद इसीलिए माया गोविंद के लिखे गाने 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी' के रीमिक्स की भी जरूरत पड़ गई।
अभिनय के मामले में अक्षय कुमार से अब कुछ खास नया होता नहीं है। अब तो परदे पर भी दिखने लगा कि वह संवाद सामने किसी चीज पर अटकाए गए कागज को देखकर पढ रहे हैं। उनकी आंखों की पुतलियां सब बता देती हैं और चूंकि सारा ध्यान संवाद को पढ़ने पर होता है लिहाजा चेहरे पर भाव बदलने का अक्षय को ध्यान ही नहीं रहता। देखा जाए तो फिल्म में अक्षय कुमार से बेहतर अभिनय इमरान हाशमी ने किया है। लेकिन, उनकी कद काठी इस किरदार में उनका साथ नहीं दे पाती है। नुसरत भरुचा, डायना पेंटी, अभिमन्यु सिंह, महेश ठाकुर जैसे कलाकारों का अभिनय सामान्य रहा। नगर सेविका की छोटी सी भूमिका में मेघना मालिक ने जरूर दर्शको का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।
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