-निर्माताः राजकुमार हिरानी/आर. माधवन
-निर्देशकः सुधा कोंगरा
-सितारेः आर.माधवन, ऋतिका सिंह, मुमताज सरकार, जाकिर हुसैन
रेटिंगः **
- रवि बुले
-कुछ मैरी कॉम की प्रियंका चोपड़ा लें और कुछ चक दे इंडिया का शाहरुख खान। फिर खेलों में राजनीति का मुद्दा और कोच/फेडरेशन के अधिकारियों द्वारा लड़कियों के यौन शोषण का मामला। इन सबको मिक्स करके अंतरराष्ट्रीय मंच पर खिलाड़ी के चैंपियन बनने का चमकदार वरक लगा दें। खेल के मैदान की फिल्मी कहानी तैयार। साला खड़ूस यही है। खेल है, बॉक्सिंग का रिंग।
फिल्म की समस्या यह है कि इसमें पहले ही सीन से आप जानते हैं कि आगे क्या होने वाला है। चक दे इंडिया की छाया इस पर साफ नजर आती है। अतः कहानी में बांधने वाले तत्व गायब हैं। एक काबिल बॉक्सिंग कोच से छुटकारा पाने के लिए फेडरेशन के अधिकारी उस पर बॉक्सर लड़कियों से दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हैं।
सजा के तौर पर उसे हरियाणा से तमिलनाडु भेज दिया जाता है कि रैंकिंग में नीचे रहने वाले राज्य में चैंपियन तैयार करे! होता भी यही है। कोच को एक तूफानी लड़की मिलती है और वह देखते-देखते उसे चैंपियन में तब्दील कर देता है। हालांकि कोच और ट्रेनी में बाप-बेटी की उम्र का फासला है, लेकिन प्यार के कोमल अंकुर यहां फूटते आप देख सकते हैं!