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Review: दीया मिर्जा के दमदार अभिनय से इंसानियत की अलख जगाती काफिर

Mon, 17 Jun 2019 08:20 PM IST
Avinash Pal मुंबई डेस्क, अमर उजाला

सार

डिजिटल रिव्यू:  काफिर (वेब सीरीज) 
कलाकार:  दीया मिर्जा, मोहित रैना, दारा संधू, अभिरॉय सिंह आदि
निर्देशक: सोनम नायर
ओटीटी: जी5
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काफिर का पोस्टर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में तल्खी चल रही है और दोनों तरफ राष्ट्रवाद का बोलबाला है तो ऐसे में निर्देशक सोनम नायर ने वेब सीरीज काफ़िर के जरिए दोनो देशों के बीच की दुश्मनी को अलग रख रिश्तों को इंसानियत के नजरिए से दिखाने की कोशिश की है। 

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काफिर की कहानी शुरू होती है एक पत्रकार वेदांत राठौड़ से जो चैनल हेड के कहने पर एक मानवीय संवेदनाओं वाली कहानी ढूढ़ने निकलता है। एक छोटी बच्ची के बारे में उसे पता चलता है जिसकी मां सात साल से आतंकवाद के आरोप में जेल में बंद है। इस महिला यानी कैनाज अख्तर (दीया मिर्ज़ा) का इंटरव्यू लेते वक्त पता चलता है कि उस पर लगाया गया आतंकवाद का आरोप झूठा है और फिर वेदांत उसकी मदद करने निकल पड़ता है। एक पाकिस्तानी महिला की मदद करने के लिए उसे समाज और परिवार के विरोध का सामना करना पड़ता है। 

सीरीज की कहानी में दम दिखता है। इस सीरीज के माध्यम से पहली बार हिंदुस्तानी जेल में बंद पाकिस्तानी कैदी की जिंदगी को दिखाया जा रहा है। अभिनय के मामले में दीया मिर्जा, मोहित और बाकी के साथी कलाकारों ने अपना काम बखूबी किया है। फिल्म संजू के बाद इस सीरीज में दीया का नया अवतार देखने को मिल रहा है। शुरू के चार एपीसोड्स में ही दीया ने अपनी अदाकारी का दम दिखा दिया है। बिना बोले सिर्फ आंखों से ही सब कुछ कह देने की उनकी खासियत सारे कलाकारों पर भारी है। सीरीज का निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी आला दरजे की है। 
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एक वेब सीरीज के तौर पर काफिर की कहानी दर्शकों को खुद से जोड़ने में कामयाब रही है। इसके प्रवाह को इसके संगीत का काफी सहारा मिलता दिख रहा है। नई कहानी, शानदार अभिनय, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और कर्णप्रिय संगीत के चलते जी5 की वेब सारीज काफिर काफी प्रभावशाली बन पड़ी है।

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