Rana Naidu Season 2: वेब सीरीज ‘राणा नायडू सीजन 2’ के तेवर अपने पहले सीजन जैसे ही हैं। कोई आधा दर्जन लेखक एक विदेशी सीरीज का देसी अनुकूलन करने की कोशिश इस बार भी कर रहे हैं, सीरीज का लेखन देखकर ये तो समझ आता है कि मुंबई में रहने वाले लेखकों ने दुनिया भले खूब घूम ली हो, अपना देश घूमना उन्होंने बंद कर दिया है।
अपराध आधारित सीरीज में ‘राणा नायडू’ का अलग ही फैन बेस रहा है। लोगों ने इसके पहले सीजन को लाख कोसा हो, इसमें मौजूद गालियों पर लंबे लंबे आलेख लिखे हों, पर शो खूब देखा गया और ओटीटी पर माल अच्छा है या बुरा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। बस इसे खूब देखा जाना चाहिए। सबका अपना अपना दृष्टिकोण है। इन दिनों ओटीटी, वह सब कुछ दिखाने को बेकरार रहता है जो सिनेमा में सेंसर की कैंचियों के बीच से होकर गुजर नहीं पाता। नेटफ्लिक्स ने पारिवारिक मनोरंजन की तरफ इस शो को ले जाने का वायदा बार बार किया होगा, लेकिन बस दिल को बहलाने को ही ये ख्याल अच्छा है! ‘राणा नायडू सीजन 2’ के ट्रेलर में भी ऐसा ही कुछ वादा किया लेकिन नेटफ्लिक्स देखने वालों को इन वादों पर भी ऐतबार कम ही होता है, कुछ कुछ वैसे ही कि तेरे वादे पर जिये हम, तो ये जान झूठ जाना...!
विज्ञापन
राना नायडू सीजन 2
- फोटो : एक्स- @NetflixIndia
पहले सीजन जैसे राणा नायडू के तेवर
वेब सीरीज ‘राणा नायडू सीजन 2’ के तेवर अपने पहले सीजन जैसे ही हैं। कोई आधा दर्जन लेखक एक विदेशी सीरीज का देसी अनुकूलन करने की कोशिश इस बार भी कर रहे हैं, सीरीज का लेखन देखकर ये तो समझ आता है कि मुंबई में रहने वाले लेखकों ने दुनिया भले खूब घूम ली हो, अपना देश घूमना उन्होंने बंद कर दिया है। मूल रूप से तेलुगु में बनी सीरीज के हिंदी डब संस्करण में मामला और ढीला हो जाता है। बस, किरदारों के अहंकार तने रहते हैं। एक ऐसी काल्पनिक दुनिया में, जिसको हकीकत के करीब रखने की कोशिश मे ये सीरीज बार बार लड़खड़ाती है। सीरीज के रचयिता करण अंशुमान ने अपनी ही वेब सीरीज ‘इनसाइड एज’ से क्रिकेट का काला धंधा उधार लिया है और ‘मिर्जापुर’ से चुराया है रिश्तों में घुलते क्राइम का पल्प फिक्शन जैसा परिवार।
राना नायडू सीजन 2
- फोटो : एक्स- @NetflixIndia
कृति खरबंदा का ओटीटी डेब्यू
हां, दो नई बातें भी इस बार हैं। एक तो मुंबई का गैंगस्टर रऊफ मिर्जा (अर्जुन रामपाल) जिसके लिए क्रिकेट का बैट ‘एनिमल’ के रणविजय की कुल्हाड़ी सरीखा है। और, दूसरी कृति खरबंदा जो इस सीरीज से अपना ओटीटी डेब्यू कर रही हैं। रऊफ उतना ही हिंसक है जितना रणविजय रहा है। कृति के सामने चुनौती रिश्तों की है। समाज में रिश्तों का कत्ल करती नई सोच का भी ये सीरीज कुछ कुछ मुजाहिरा करती चलती है। पता नहीं, एकता कपूर के सीरियल देख बहुओं के सिरों से उतरे पल्लू हालात यहां तक ले आए हैं, या वाकई समाज में अब वे सब भी उतने ही बड़े ‘कलाकार’ हो चुके हैं, जिनका अपना योगदान रिश्तों को बचाने और घरों को सजाने में रत्ती भर का भी नहीं है। कृति खरबंदा का रोल आलिया ओबेरॉय का है। नाम आलिया है तो पिता को फिल्म स्टूडियो का मालिक दिखा देना सबसे आसान है। राइटिंग टीम का आलस उजागर करने में ये ट्रैक भी पीछे नहीं रहता। भाई-बहन की आपस में न पटने जैसा किस्सा भी साथ में बोनस के तौर पर है।
राना नायडू सीजन 2
- फोटो : एक्स- @NetflixIndia
लेखन और निर्देशन दोनों में फेल
‘राणा नायडू सीजन 2’ को करण अंशुमन, सुपर्ण वर्मा और अभय चोपड़ा ने मिलकर निर्देशित किया है। शायद इसीलिए सीरीज में क्रिकेट, सिनेमा के साथ ही सियासत का भी एक ट्रैक समानांतर रूप से चलता रहता है। नेता और माफिया की न संगत अब अपराध कथाओं में नई रही है और न ही दोनों की एक दूसरे से आगे निकलने की होड़। कहने को ‘राणा नायडू सीजन 2’ में मनोरंजन का भरपूर मसाला है, लेकिन सिर्फ मसालों से ही भोजन नहीं बनता न। स्वाद लाने के लिए जिन मूलभूत तत्वों की जरूरत होती है, वह दाल-रोटी यहां मिसिंग है। कहानी बेरतीबी से फैली हुई है। निर्देशन बिल्कुल अपेक्षित ढर्रे पर चलता है। सीरीज और दर्शक के बीच सामंजस्य पहले एपिसोड से ही इतना तगड़ा बनता है कि दर्शक जो जो सोचता जाता है, सीरीज वही सब कुछ दिखाती चलती है। लेखन और निर्देशन में औसत से भी कम रही वेब सीरीज ‘राणा नायडू सीजन 2’ को इसके कलाकारों ने संभालने की ही पूरी कोशिश की है।
राणा दग्गूबाती के सहारे सजी सीरीज
कलाकारों में राणा दग्गूबाती का अपना आभामंडल रहा है हिंदी सिनेमा के दर्शकों के बीच। इसे हिंदी में डब करने की इकलौती वजह भी वही रहे होंगे। राणा अपना काम बखूबी करते हैं। वेंकटेश का आभा मंडल अब उतना बचा नहीं है और उनकी ओवरएक्टिंग बार बार परेशान करती है। कहने को सीरीज में सुशांत सिंह और अभिषेक बनर्जी भी हैं लेकिन दोनों के किरदारों पर राइटिंग टीम ने खास मेहनत की नहीं है। इस पारिवारिक अपराध कहानी में ‘मिर्जापुर’ का फ्लेवर इतना ज्यादा है कि ‘राणा नायडू सीजन 2’ की अपनी पहचान का संकट भी आता रहता है। ‘राणा नायडू सीजन 2’ की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इस कहानी का कोई हीरो ऐसा नहीं है जो हिंदी दर्शकों की अनुभूतियों के साथ जुड़कर आगे बढ़ सकते। इस कहानी में सब विलेन ही विलेन हैं। राणा दग्गूबाजी को एंटी हीरो के रूप में स्थापित करने की कोशिश इसकी राइटिंग और डायरेक्शन टीम ने खूब की है, पर मामला ‘दीवार’जैसा जम नहीं पाता है। सुरवीन चावला अपनी तरफ से कहानी में इमोशन डालने की पूरी कोशिश करती हैं। डीनो मोरिया इस शांत होते पानी में पत्थर फेंककर हलचल पैदा करने वाले नवीन की भूमिका में आते हैं तो उम्मीद बंधती है कि कहानी आगे सुधरती जाएगी, पर ऐसा हो नहीं पाता। इशिता अरुण अपनी संक्षिप्त भूमिका में जरूर असर छोड़ने में कामयाब रहती हैं।