Peddi Movie Review in Hindi: रामचरण और जान्हवी कपूर की फिल्म ‘पेद्दी’ थिएटर्स में रिलीज हो चुकी है। फिल्म हद से ज्यादा इमोशनल और जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक है। फिर भी एक बड़ी वजह है, जिसके लिए आप इसे देख सकते हैं। यहां जानिए कैसी है यह फिल्म?
आईपीएल खत्म होते ही सिनेमाघर और ओटीटी पर फिल्म और वेब सीरीज की बाढ़ सी आ गई है। 4 और 5 जून को रिलीज होने वाली फिल्मों की फेहरिस्त में सबसे बड़ी फिल्म ‘पेद्दी’ ही मानी जा रही थी। वजह- फिल्म में राम चरण और जान्हवी कपूर जैसे बड़े स्टार्स हैं और यह पैन इंडिया रिलीज हुई है।
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लेकिन, जितना इस फिल्म का हाइप बनाया गया और दर्शकों ने इसका इंतजार किया। हो सकता है कि फिल्म देखते वक्त वो इसके खत्म होने का भी इंतजार करें। तीन घंटे लंबी इस फिल्म में सिर्फ एक ही चीज देखने लायक है और वो है रामचरण की मेहनत। फिर चाहे वो उनका डांस हो, एक्शन हो या फिर उनका बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन। इसके अलावा आपको फिल्म में बैकग्राउंड, कुछ एक्शन सीन और एक दो डायलॉग ही अच्छे लग सकते हैं। आइए फिल्म पर विस्तार से बात करते हैं।
पेद्दी
- फोटो : एक्स
कहानी
फिल्म की कहानी एक पहाड़ी गांव के दिहाड़ी मजदूर पेद्दी (राम चरण) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। पेद्दी जो मन में आता है वो हर काम करता है क्योंकि उसका मानना है कि ‘दोबारा थोड़ी न पैदा होंगे..’। वो खुद को और अपने गांव को पहचान दिलाने के लिए ऊंची जाति और शहरी लोगों से लड़ाई लड़ रहा है। दूर-दराज के गांव में रहने वाले पेद्दी के गांव से एक ट्रेन गुजरती तो है पर रुकती नहीं। उसके गांव के एक शख्स की जिद है कि वहां रेलवे स्टेशन बन जाए, जिससे सबकी जिंदगी आसान हो जाए।
पेद्दी कमाल का क्रिकेट खेलता है और अपनी ऊपर लगने वाली बोली से पैसे कमाता है पर एक दिन ऊंची जाति के लोग एक होकर उसे हरा देते हैं। पहचान पाने के लिए पेद्दी क्रिकेट छोड़कर, पहलवान बन जाता है ताकि गोल्ड मेडल जीतकर पहचान हासिल कर सके। यहां भी उसके साथ हादसा होता है तो फिर सम्मान पाने के लिए पेद्दी कुछ ऐसा करता है जो किसी ने सोचा भी नहीं हाेता। इन सबके बीच में उसकी दुश्मनी और लव स्टोरी चलती रहती है।
पेद्दी
- फोटो : एक्स
अभिनय
पूरी फिल्म को अपने कंधों पर रामचरण ने बखूबी उठाया। चाहे इमोशनल सीन हो, डांस सीक्वेंस हो या फिर एक्शन.. हर सीन में वो कमाल लगे हैं। फिल्म के लिए उन्होंने जो जमकर मेहनत की है वो स्क्रीन पर हर शॉट में दिखती है। क्लाइमैक्स में जब वो बोलते हैं- ‘आपको लगता है हमने खेल खेला है, हमने जंग लड़ी है।’ वो आपको टच करता है।
पेद्दी के गुरु के रोल में शिव राजकुमार ने भी दर्शकों को बांधे रखा। दिव्येंदु और रवि किशन दोनों का स्क्रीन स्पेस कम है पर काम बढ़िया है। जगपति बाबू और बोमन ईरानी का काम भी सटीक है। बस कोई कमी है तो वो है जान्हवी कपूर क्योंकि ना तो उन्हें फिल्म में एक्टिंग करने के लिए कास्ट किया गया और ना ही उनसे ठीक से एक्टिंग करवाई गई। बची खुची जितनी उन्होंने की वो या तो ओवरएक्टिंग थी या फिर उनके सीन ही काट दिए गए। बस एक सीन में वो रोते हुए रियलिस्टिक लगती हैं।
पेद्दी
- फोटो : एक्स
निर्देशन
फर्स्ट हाफ में जब कहानी बिल्डअप होती है तो फिल्म थोड़ी स्लो है। तकलीफें, दर्द और वही पुराना इमोशनल मसाला जो आप पहले भी साउथ की हर फिल्म में देख चुके हैं। पूरे गांव का एक ही मसीहा है और सब कुछ वहीं करता है। यहां निर्देशक ने दिखाया कि एक विशेष जाति वर्ग के लोगों के साथ अत्याचार होता है। इसके बाद फिल्म अचानक दो सीन और एक मुलाकात वाली लव स्टाेरी पर शिफ्ट हो जाती है, जो पूरी तरह डेवलप भी नहीं हो पाती। फिर दुश्मनी देखने को मिलती है। फिर वापस इमोशंस पर आ जाते हैं और फिर दिखाते हैं जिद और मेहनत, लेकिन अंत में फिर एक बार इमोशंस पकड़ लेते हैं। तो ठीक जिस तरह आप यहां पढ़कर कन्फ्यूज हो गए कि मैं कहना क्या चाहता हूं? ठीक वैसे मैं फिल्म देखकर कन्फ्यूज हो गया कि निर्देशक कहना क्या चाहते हैं? तीन घंटे में हर फॉर्मूला अपनाने की बुची बाबू की जिद ने ही इस फिल्म का हल्का बना दिया। यह कहना गलत नहीं होगा कि रामचरण की पूरी मेहनत पर निर्देशक ने खुद पानी फेरा है।
पेद्दी
- फोटो : एक्स
क्या अच्छा
एरियल शॉट, सेट और लोकेशंस गर्मी के इस सीजन में आपको ठंडक का एहसास करवाएंगी। कुछ एक्शन सीक्वेंस बियॉन्ड इमेजिनेशन है पर अच्छे लगते हैं। डांस कुछ नया सा है। गाने ठीक ठाक हैं।
क्या बुरा
फिल्म में लेखकों और निर्देशक के पास बहुत स्कोप था पर उन्होंने बड़े कलाकारों को लेकर उनका टैलेंट भी वेस्ट किया। ओवर ड्रामा दिखाने के बजाय किरदार डेवलप करने पर काम करते तो यह बेहतर फिल्म बन सकती थी। हो सकता हो साउथ में यह चल जाए पर नॉर्थ के दर्शकों को शायद ही पसंद आए।
स्क्रीनप्ले टाइट और छोटा हो सकता था। कुछ चीजें जरूरत से ज्यादा दिखाई गईं और रोमांटिक ट्रैक इतना छोटा और कमजोर है कि पूछिए ही मत।
फिल्म में एक आइटम नंबर भी जबरदस्ती ठूंसा गया है जिसे देखकर समझ नहीं आता कि श्रुति हासन की ऐसी क्या मजबूरी रही हाेगी।
देखें या नहीं?
रामचरण के बहुत बड़े फैंन हों तो देख सकते हैं। जान्हवी कपूर पसंद है तो मत जाइएगा, निराशा हाथ लगेगी। साउथ का एक्सपेरिमेंट समझकर एक बार देख सकते हैं। कुछ ऐसे रिव्यू देखकर मत चले जाना जिनमें फिल्म की जमकर तारीफ की जा रही हो। चूना लगा हुआ महसूस करेंगे।
कुल मिलाकर पेद्दी ने बैट से हर मुश्किल का सामना किया, कुश्ती से मुकाबला किया पर दौड़कर आगे नहीं निकल पाया।