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Neeyat Movie Review: महिला प्रधान फिल्मों के भविष्य पर विद्या ने लगाया कट्टा, अनु मेनन की औसत से कमतर फिल्म

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नीयत रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
नीयत
कलाकार
विद्या बालन , राम कपूर , राहुल बोस , नीरज काबी , अमृता पुरी , शशांक अरोड़ा , निकी वालिया और प्राजक्ता कोली
लेखक
गिरवानी ध्यानी , अनु मेनन , अद्वैत काला और प्रिया वेंकटरमन
निर्देशक
अनु मेनन
निर्माता
विक्रम मल्होत्रा
रिलीज
7 जुलाई 2023
रेटिंग
1.5/5

विद्या बालन की गिनती देश की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में होती रही है जिन्होंने सिर्फ अपनी जिद और अपने किरदारों के प्रति अपने समर्पण से हिंदी सिनेमा में महिला प्रधान भूमिकाओँ वाला पूरा एक अलहदा सिनेमा खड़ा कर दिया। उनकी ही फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ ने तापसी पन्नू, नुसरत भरूचा, परिणीति चोपड़ा, हुमा कुरैशी और न जाने कितनी ही अभिनेत्रियों को महिला प्रधान भूमिकाओं वाली फिल्मों में अपनी कूवत और किस्मत आजमाने के लिए प्रेरित किया। और, सच ये भी है कि विद्या बालन की ही फिल्मों ने इस तरह के सिनेमा से दर्शकों को दूर करना भी शुरू किया। अब हालत ये है कि ऐसी फिल्मों को सिनेमाघर मिलना दूभर रहा है। कोरोना काल खत्म होने के बाद भी ऐसी फिल्में सिर्फ ओटीटी पर रिलीज होती रही हैं। शगुन अच्छा था कि विद्या बालन की इसी कड़ी की अगली फिल्म ‘नीयत’ को सिनेमाघर मिले हैं, लेकिन अगर इस फिल्म को बनाया भी ढंग से गया होता तो ये हिंदी सिनेमा की तमाम अभिनेत्रियों के लिए एक नया प्रस्थान साबित हो सकती थी।

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नीयत रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘नीयत’ की कहानी की अरबपति बिजनेसमैन आशीष कपूर से शुरू होती है। वह स्कॉटलैंड में समुद्र के किनारे बनी अपनी विला में अपने कुछ खास दोस्तों को जन्मदिन की पार्टी के लिए आमंत्रित करता है। दोस्त आते हैं और डिटेक्टिव मीरा राव भी खास मेहमान के रूप में आशीष कपूर के जन्मदिन की इस पार्टी में शामिल होती है। कहानी में मोड़ तब आता है जब हल्ला मचता है कि आशीष कपूर की हत्या हो गई है। आशीष कपूर की मौत कैसे हुई, इसकी पड़ताल ही फिल्म की धुरी बन जाती है जिसके चारों तरफ इसके किरदार चक्कर काटने लगते हैं। मीरा राव एक एक कर गुत्थियां सुलझाने की कोशिश करती है। शक के दायरे में पार्टी का हर मेहमान है और हर मेहमान के दिल में छुपी बातें भी इस हत्या का आधार बनाने की तरफ इशारा भी करती हैं। अगर आपको ये पढ़ते हुए डेनियल ग्रेग की ‘नाइव्स आउट’ सीरीज की फिल्में याद आ रही हों, तो आप गलत भी नहीं हैं। फिल्म देखते समय भी यही होता है। ब्रिटेन में फिल्मों की शूटिंग के लिए मिल रही सब्सिडी भी इस दौरान याद आती रहती है और ये भी याद आता रहता है कि भारतीय जांच एजेंसियों में काम करने वाले अफसरों का दायरा क्या होता है!

नीयत मूवी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
खैर, फिल्म ‘नीयत’ की कहानी ऐसी है कि जिन्होंने विदेशी फिल्में नहीं देखी हैं, उन्हें इसे देखने की उत्सुकता फिर भी बनी रहती है। लेकिन, इस हुकर का भी फिल्म के लेखकों ने कोई खास फायदा नहीं उठाया। गिरवानी ध्यानी, अनु मेनन, अद्वैत काला और प्रिया वेंकटरमन ने मिलकर फिल्म की कहानी लिखी है और किसी कहानी में जब इतने सारे लेखक जुड़े हों तो अपनी अपनी तरफ खींचने के बावजूद तंबू ठीक से तन भी पाएगा, इसे लेकर फिल्म की शुरुआत से ही आशंका होने लगती है। कहानी सुनी सुनाई सी है। पटकथा इसकी इतनी सुस्त और लचर है कि फिल्म देखने का आकर्षण इसके शुरू होने के कुछ ही समय बाद अपनी चमक खोने लगता है। क्या रहस्य है और क्या फिल्म ‘नीयत’ की मिस्ट्री है, सब धुंधला होने लगता है। मुख्य कलाकार अपनी पकड़ अपने ही किरदार से खोने लगता है।

नीयत मूवी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘नीयत’ में मीरा राव बनी विद्या बालन की एंट्री सीबीआई अधिकारी के रूप में होती है, जो आशीष कपूर को गिरफ्तार करके भारत वापस लाना चाहती है। इस फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी विद्या बालन ही हैं। न तो उनका किरदार कायदे से लिखा गया है और न ही विद्या बालन ने अपने इस किरदार का अतीत और उसके काम करने के तरीकों पर ही कुछ खास काम अपनी तरफ से किया है। कैमरे के सामने वह कुछ यूं प्रकट होती हैं कि उनके अभिनय का सिनेमा से संपर्क ही टूटता नजर आता है। बाकी किरदारों के मन में इस किरदार के लिए कोई आदर, सम्मान नहीं है। संवाद ऐसे लिखे गए हैं जैसे दो टपोरी आपस में बात कर रहे हों। विद्या की देह भाषा भी इस बार उनके किरदार के विरुद्ध है। निर्माता विक्रम मल्होत्रा के साथ विद्या बालन ने हाल के दिनों की कुछ सशक्त महिला प्रधान फिल्मों की हैं, लेकिन इस बार दोनों की जोड़ी वह कमाल दोहराती नहीं दिखती।

नीयत मूवी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनेत्री विद्या बालन की चार साल बाद फिल्म ‘नीयत’ के जरिए बड़े पर्दे पर वापसी हो रही है। आखिरी बार वह बड़े पर्दे पर फिल्म 'मिशन मंगल' में साल 2019 नजर आई थी। इसके बाद की विद्या बालन की फिल्में ‘शकुंतला देवी', 'शेरनी' और 'जलसा' सीधे ओटीटी पर रिलीज हुईं। बड़ी उम्मीदें थीं कि विद्या बालन एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपना जलवा दिखाएंगी लेकिन उनके अभिनय से इस बार उनके धुर प्रशंसकों को भी निराशा ही होने वाली है। राहुल बोस ने फिल्म में जिम्मी मिस्त्री की भूमिका निभाई है। जिम्मी मिस्त्री अपने भांजे रायन कपूर के मन में उसके सौतेले पिता आशीष कपूर के खिलाफ इतना जहर भर देता है कि वह अपने पिता को भरी पार्टी में घूंसा मार देता है। समझ नहीं आता कि इस दृश्य के पीछे लेखकों की मंशा क्या रही होगी, निर्देशक की सोच पर भी ऐसे दृश्यों को देखकर तरस ही आता है। राहुल बोस के पास एक अच्छा मौका था खुद को चमकाने का लेकिन उनकी ओवर एक्टिंग ने सब मामला गोबर कर दिया है।
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नीयत मूवी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘नीयत’ के बाकी कलाकारों की बात करें तो आशीष कपूर की भूमिका में राम कपूर ने बेहतर काम करने की कोशिश की है। बाकी कलाकारों में दीपानिता शर्मा, शशांक अरोड़ा, शहाना गोस्वामी, नीरज काबी, अमृता पुरी, प्राजक्ता कोली, निकी अनेजा वालिया के परफार्मेंस में कुछ खास बात नहीं है। हां, फिल्म के अंतिम दृश्यों में शेफाली शाह ने महज चंद मिनट में पूरी वाहवाही बटोर ली। जो काम विद्या बालन को पूरी फिल्म में करना चाहिए था वह शेफाली शाह महज चंद मिनटों में कर गई। 'एक था टाइगर', 'धूम 3', 'बजरंगी भाईजान' जैसी कई  फिल्मों में हिट गीत लिख चुकी कौसर मुनीर ने इस फिल्म के संवाद लिखे हैं, लेकिन ये संवाद बहुत ही हल्के हैं। एड्रेस नियो की सिनेमैटोग्राफी और एडम मास का संपादन औसत से कमतर है। बैकग्राउंड म्यूजिक के नाम पर बिजली कड़कने के अलावा कुछ खास सुनाई नहीं देता। विद्या बालन को लेकर इससे पहले 'शकुंतला देवी' जैसी फिल्म बना चुकी निर्देशक अनु मेनन से इस बार भी एक बेहतर फिल्म की उम्मीद थी, लेकिन इस बार उन्होंने बहुत निराश किया।

 
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