‘जिंदगी खूबसूरत है, फर्क सिर्फ नजरिया है’ और जिंदगी के सबसे खूबसूरत नजरिये को समझाती है फिल्म ‘नजर अंदाज’। लेकिन, फिल्म ‘नजर अंदाज’ का पोस्टर ऐसा है कि फिल्म की ये लॉग लाइन अलग ही नजरिये से समझ आती है। पोस्टर देखकर ये भी मुंबइया फिल्मी चक्की से निकली कोई चलताऊ कॉमेडी फिल्म नजर आती है। लेकिन, इसे संयोग कहें या कुछ और, स्मार्ट टीवी पर यूट्यूब खंगालते खंगालते इस फिल्म के ट्रेलर पर रिमोट क्लिक हो गया। ट्रेलर देखकर कुछ अलग सा महसूस हुआ। पता किया कि फिल्म का कोई एडवांस शो है क्या? और, शोर में तब्दील हो चुके बैकग्राउंड म्यूजिक, नौटंकी में तब्दील हो चुके अभिनय और स्पेशल इफेक्ट्स से लबालब होती जा रही फिल्मों के दौर में देखने को मिला एक सच्चा सिनेमा! जी हां, अरसे बाद देखने को मिली एक ऐसी फिल्म जिसमें जिंदगी है, आशा है, उम्मीद है और है अभिनेता कुमुद मिश्रा का दिल को छू जाने वाला ऐसा अभिनय जिसे लोग बरसों बरस याद करेंगे।
‘जिंदगी खूबसूरत है, फर्क सिर्फ नजरिया है’ और जिंदगी के सबसे खूबसूरत नजरिये को समझाती है फिल्म ‘नजर अंदाज’। लेकिन, फिल्म ‘नजर अंदाज’ का पोस्टर ऐसा है कि फिल्म की ये लॉग लाइन अलग ही नजरिये से समझ आती है। पोस्टर देखकर ये भी मुंबइया फिल्मी चक्की से निकली कोई चलताऊ कॉमेडी फिल्म नजर आती है। लेकिन, इसे संयोग कहें या कुछ और, स्मार्ट टीवी पर यूट्यूब खंगालते खंगालते इस फिल्म के ट्रेलर पर रिमोट क्लिक हो गया। ट्रेलर देखकर कुछ अलग सा महसूस हुआ। पता किया कि फिल्म का कोई एडवांस शो है क्या? और, शोर में तब्दील हो चुके बैकग्राउंड म्यूजिक, नौटंकी में तब्दील हो चुके अभिनय और स्पेशल इफेक्ट्स से लबालब होती जा रही फिल्मों के दौर में देखने को मिला एक सच्चा सिनेमा! जी हां, अरसे बाद देखने को मिली एक ऐसी फिल्म जिसमें जिंदगी है, आशा है, उम्मीद है और है अभिनेता कुमुद मिश्रा का दिल को छू जाने वाला ऐसा अभिनय जिसे लोग बरसों बरस याद करेंगे।
कुमुद मिश्रा की बेलौस कलाकारी
कुमुद मिश्रा देखा जाए तो हिंदी सिनेमा के हाशिये पर अटके ऐसे सुपरस्टार हैं जिनको उनकी पिछली लीड किरदार वाली फिल्म ‘राम सिंह चार्ली’ के लिए ही सिर आंखों पर बिठा लिया जाना चाहिए था। लेकिन उनको मिली सीरीज ‘डॉ. अरोड़ा गुप्त रोग विशेषज्ञ’। अली अब्बास जफर ने जरूर उनकी अदाकारी की काबिलियत के हिसाब से अपनी फिल्म ‘जोगी’ में उन्हें मुख्य विलेन का किरदार थमाया। लेकिन, अपनों अपनों को रेवड़ी बांटने वाले पुरस्कार आयोजकों के लिए भी ‘नजर अंदाज’ के बाद उनकी अदाकारी को अब नजर अंदाज करना मुश्किल है। ये फिल्म एक ऐसा एहसास है जिसे सिर्फ देखकर ही महसूस किया जा सकता है। ऊपर ऊपर ये एक ऐसे दृष्टिहीन व्यक्ति का जीवन के साथ अपनापा है जिसके दिल में मोहब्बत की कसक बचपन से दबी हुई है। वह संगीत में निपुण है। वायलिन बजाता है तो ‘ब्रह्मास्त्र’ के गाने ‘केसरिया तेरा’ की धुन सी बजती मालूम होती है, लेकिन ये धुन फिल्म में बार बार दोहराई जाती है तो ये भी समझ आता है कि संगीतकार विशाल मिश्रा और प्रीतम दोनों की इस सरगम का स्रोत हो सकता है, एक ही हो। और, ये सरगम ही कहानी के नायक सुधीर भाई के जीवन की उम्मीद है। और राजशेखर के लिखे गाने जो उनके साथ या आसपास बजते हैं, वे उनकी उमंगों का आईना बनते रहते हैं।
फर्क सिर्फ नजरिया है!
फिल्म ‘नजर अंदाज’ में नायक सुधीर भाई परदे पर पहली बार आते हैं तो सड़क के एक छोर पर खड़े दिखते हैं। एक दूसरा दृष्टिहीन उनसे सड़क पार करने की फरियाद करता है और वह उसका हाथ थाम कर वाहनों के बीच ही सड़क पर उतर चलते हैं। सड़क के दूसरी छोर पर दोनों सकुशल पहुंच जाते हैं। सुधीर भाई कहते हैं, ‘मदद के इंतजार की आदत नहीं डालनी चाहिए। नहीं तो सड़क के उस तरफ ही खड़े रह जाओगे।’ सुधीर भाई का यही जीवन परिचय है और यही जीवन दर्शन। बिना अनिष्ट की आशंका किए जीवन जीते जाना। खांडवी उनका परम प्रिय भोजन है जिसका रिश्ता उनके अपने कस्बे मांडवी से जुड़ता है। सुधीर भाई की अपनी तमन्नाएं हैं जिन्हें वह कभी खुली छत वाली कार में खड़े होकर मुंबई से बाहर लंबी सैर पर जाकर पूरी करते हैं तो कभी घास पर नंगे पैर चलकर। लेकिन, उनको एक ही दुख रहा है कि वह चार कदम भी जीवन में अपने बूते भाग नहीं सके। कहानी को इस छोर तक लाने के लिए सुधीर भाई का हाथ थामते हैं अली और भवानी।
सुधीर, अली और भवानी
अली का नाम ‘गली बॉय’ का जिक्र करते ही सुधीर भाई के जेहन से उपजता है। वह चाहते हैं कि जब भी वह ‘या अली मदद’ पुकारें तो अली भागता हुआ आ जाए। अली को खुद नहीं पता कि उसका नाम क्या है। दो करोड़ से ज्यादा लोगों के शहर मुंबई की गलियों में पला बढ़ा अली पेशेवर चोर है। लेकिन, सुधीर भाई उसको अपने घर में ठिकाना देते हैं। वह पूछता भी है कि एक अनजान पर भरोसा करके उन्हें डर नहीं लगता। सुधीर भाई का जवाब जिंदगी का एक और फलसफा है। वह कहते हैं, ‘जिस इंसान पर कोई भरोसा नहीं करता, उस पर जिसने भरोसा किया, वह उसी को धोखा दे जाए, ऐसा होना तो नहीं चाहिए।’ उधर, भवानी हरियाणा की दुत्कारी बिटिया है। उसे सुधीर भाई से मिलकर ही पता चला कि सच्चा प्रेम क्या होता है। वह ‘चंट’ है। सुधीर भाई की विरासत पर उसकी नजर है। खाना वह सारा मोबाइल पर ऑर्डर करके मंगाती है। सुधीर भाई को लगता है वह पाक कला में निपुण है। तीनों का ये संगम ही फिल्म ‘नजर अंदाज’ की सांसें हैं। ये कभी उखड़ती हैं तो कभी संयत होती हैं। और, बात जब हांफ जाने की हद तक सुधीर भाई के बाहें पसार कर बेधड़क भागने तक पहुंचती है तो कहानी को दूसरा छोर मिल जाता है।