हर मां बाप का सपना होता है कि उसके बच्चे पढ़ लिखकर इस काबिल बन जाए कि उनका भविष्य आगे चलकर सुरक्षित रहे है। हर मां बाप का ऐसा सोचना जायज भी है। आज की तारीख में एक दूसरे से आगे बढ़ने की जो प्रतिस्पर्धा चल रही है, ऐसे माहौल में हर मां बाप अपने बच्चों पर बचपन से ही दबाव डालते हैं कि पढ़ाई में अव्वल रहना है। इस वजह से बच्चे स्कूल में होने वाले पाठ्येत्तर गतिविधियों (एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज) पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं। फिल्म 'म्यूजिक स्कूल' इसी विषय पर आधारित है।
फिल्म 'म्यूजिक स्कूल' की शुरुआत बच्चो के स्कूल से होती है। स्कूल के बच्चे पढ़ाई के दबाव की वजह से संगीत जैसे विषय को वक्त की बर्बादी समझते हैं। फिल्म में श्रिया सरन ने एक म्यूजिक टीचर का किरदार निभाया है, जो बच्चों को म्यूजिक सीखने के लिए प्रेरित करती है। उसकी लाख कोशिशों के बावजूद बच्चे म्यूजिक क्लास में भाग लेने के लिए राजी नहीं होते। शरमन जोशी उसी स्कूल में बच्चों को एक्टिंग सिखाते हैं। शरमन जोशी की सलाह पर श्रिया सरन अपनी सोसाइटी में म्यूजिक स्कूल खोलती है। म्यूजिक स्कूल खुलने के बाद बच्चे स्कूल जाते हैं कि नहीं जाते हैं, इसी के इर्द गिर्द पूरी फिल्म की कहानी घूमती है।
फिल्म 'म्यूजिक स्कूल' तो कहने के लिए बच्चों की फिल्म है, लेकिन यह बच्चों की फिल्म कम, बचकाना फिल्म ज्यादा लगती है। फिल्म असल मुद्दे से भटक कर श्रिया सरन और शरमन जोशी के रोमांस पर आकर अटक जाती है। एक्टिंग टीजर का अपना एक अलग अतीत है, उसकी पत्नी का निधन हो चुका है और वह अपनी बेटी के साथ रहता है। गायक शान ने म्यूजिक टीजर के पूर्व बॉयफ्रेंड का किरदार निभाया है। फिल्म के रिलीज से पहले गायक शान ने एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि फिल्म में उनका बहुत ही दमदार रोल है, लेकिन उनका किरदार फिल्म में सिर्फ पांच मिनट में ही सिमट कर रह गया।
किसी भी अच्छी फिल्म को बनाने के लिए अच्छे विषय के साथ- साथ फिल्म के कलाकारों का चयन भी अच्छी होना जरूरी होता है। म्यूजिक टीचर की भूमिका में श्रिया सरन और एक्टिंग टीचर की भूमिका में शरमन जोशी बिल्कुल भी नहीं जमे। फिल्म हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगू में भी बनी है, तो फिल्म के निर्देशक पापाराव बियाला ने फिल्म के कलाकारों का चयन उसी हिसाब से किया है। श्रिया सरन और प्रकाश राज का साउथ इंडस्ट्री में बड़ा नाम हैं। हिंदी सिनेमा से शरमन जोशी और शान को सभी जानते ही है। इन चेहरों के बजाय निर्माता- निर्देशक पापाराव बियाला को ऐसे चेहरों को लेना चाहिए था जो कहानी और किरदार में फिट बैठते, भले ही वे नए चेहरे ही क्यों न होते।
'म्यूजिक स्कूल' के नाम पर फिल्म में कुल 11 गीत है लेकिन ये गीत कहानी में अड़चन ही बनते हैं। फिल्म के 11 गीतों में से आठ गीतों का संगीत इलैयाराजा ने दिया है बाकी तीन गीत हॉलीवुड की फिल्म 'साउंड ऑफ म्यूजिक' से लिए गए हैं लेकिन फिल्म का ऐसा कोई गीत नहीं जिसे आप दोबारा सुनना पसंद करेंगे।