कहानी
कहानी है एक सीरियल किलर की, जो मुंबई में एक के बाद एक कत्ल किए जा रहा है और हत्या करने का तरीका एक जैसा ही है। सभी को रस्सी से दम घोंटकर मारा जाता है। सीरीज की कहानी शुरु होती है ऐसे ही मुंबई में एक्टर विराट मल्होत्रा के कत्ल से। पुलिस कमिश्नर अरुण खत्री मौका-ए-वारदात पर पहुंचते हैं। कत्ल करने के तरीके को देखते हुए कमिश्नर की शक की सुई सीधा जाती है हैदराबाद के जेल में कैद सीमा देशपांडे उर्फ मिसेज देशपांडे उर्फ जीनत पर। जीनत पिछले 25 साल से जेल में बंद है। उसने पुणे में आठ मर्डर किए थे और हत्या का तरीका बिल्कुल वैसा ही जैसा कि मुंबई का सीरियल किलर कर रहा है।
अब यही से शुरु होती है कहानी, कमिश्नर मुंबई की इस गुत्थी को सुलझाना चाहते हैं इसलिए वो मिसेज देशपांडे के बारे में हैदराबाद की जेल में फोन करके पूछते हैं। मिसेज देशपांडे अपना नाम जीनत रखकर जेल में बंद है। जब जीनत को पता चलता है कि मुंबई में कोई सीरियल किलर घूम रहा है तो वो कमिश्नर की मदद करने की बात कहती है। इसके बाद जीनत को अनऑफिशियली इस केस को सुलझाने के लिए कमिश्नर हैदराबाद की जेल से बाहर निकलवाकर एक सुरक्षित जगह पर रखते हैं। इस केस की जिम्मेदारी सौंपी जाती है एसीपी तेजस को, जो मुंबई में अपनी बीवी और नाना के साथ रहता है। क्या सभी कत्लों के पीछे मिसेज देशपांडे का ही हाथ था? अगर नहीं तो आखिर कौन मुंबई में एक के बाद एक लोगों को मौत के घाट उतारे जा रहा है, ये जानने के लिए आपको सीरीज देखनी होगी।
अभिनय
एक्टिंग की बात करें तो मिसेज देशपांडे उर्फ जीनत के रूप में माधुरी दीक्षित का एक ऐसा अवतार देखने को मिलता है जो कि इससे पहले कभी नहीं देखा होगा। आपने माधुरी को अब तक रोमांटिक, चुलबुली, भोली भाली महिला के रूप में अक्सर पर्दे पर देखा है लेकिन इस सीरीज में उनका एक अलग ही रूप देखने को मिलता है। ग्रे शेड अवतार में माधुरी ने साबित कर दिया है कि उनके अभिनय में काफी रंग हैं। जिस गहराई से उन्होंने अपने किरदार को पर्दे पर उतारा है, एक भी पल के लिए ऐसा नहीं लगता कि हम मिसेज देशपांडे को नहीं, बल्कि माधुरी को स्क्रीन पर देख रहे हैं। इस किरदार के लिए माधुरी ने काम किया है, ये साफ-साफ झलकता है।
उनके अलावा कमिश्नर के किरदार में हैं प्रियांशु चटर्जी जिन्हें आपने इससे पहले कई फिल्मों और सीरीज में देखा है। प्रियांशु की बात करें तो उनके किरदार में दिखाने के लिए कुछ खास था नहीं। उन्हें देखकर वाव फैक्टर नहीं आता लेकिन ठीक-ठीक तरीके से उन्होंने भी खुद को पर्दे पर उतारा है। इंस्पेक्टर तेजस के किरदार में सिद्धार्थ चांदेकर भी सीरीज की जान कहे जा सकते हैं। उनके किरदार में भी अलग-अलग फ्लेवर हैं जिन्हें देखकर आपको उनके अभिनय की प्रतिभा का अंदाजा होता है। एक गंभीर पुलिसवाला जो हर हाल में शहर में बुराई फैला रहे अपराधियों को कड़ी सजा दिलवाना चाहता है। वो अपनी पत्नी को समय नहीं दे पाता क्योंकि ज्यादातर समय वो अंडरकवर मिशन्स पर ही रहता है। सिद्धार्थ चांदेकर इस सीरीज के सरप्राइज फैक्टर निकलते हैं। उनके अलावा दीक्षा जुनेजा और निमिशा नायर ने भी अपने-अपने किरदारों से पूरी जस्टिस करने की कोशिश की है लेकिन सिर्फ कोशिश ही कहेंगे क्योंकि वहां देखकर लगता है कि थोड़ा अनुभव और गहराई अभिनय में लाई जाती तो ज्यादा बेहतर होता। कुल मिलाकर अभिनय के दम पर सीरीज के ज्यादातर कलाकारों ने काफी प्रभावित किया है। कुछ सरप्राइज लेकर पर्दे पर आते हैं तो माधुरी जैसे एक्टर्स ने अपने अनुभव का अच्छे से इस्तेमाल किया है।