निर्माताः एच.आर. मुशिक
निर्देशकः शॉन अरन्हा
सितारेः हिमेश रेशमिया, फराह करीमी, नसीरूद्दीन शाह, शेखर कपूर, कबीर बेदी
रेटिंग *1/2
आप इस फिल्म को देखें या न देखें, निर्माता की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वह रिलीज से पहले ही दंभ भरी घोषणा कर चुके हैं कि हम मुनाफे में है। संगीत से सैटेलाइट अधिकार तक सब बिक चुके हैं। जितना लगा है उससे ज्यादा निकाल चुके हैं। अतः वह आराम से मुंह ढंक कर सो सकते हैं। अब आप अपनी जेब की सोचिए क्योंकि जो निकल जाएगा, वापस नहीं आएगा।
यह उस समय का सिनेमा है जिसमें महत्वपूर्ण यह है कि कितना कमाया। बाकी बातें गौण हैं। मनोरंजन की कसौटी भी बेकार हो गई है। इस पर हिमेश स्टारर यह फिल्म कहीं से कस भी नहीं पाती।
हिमेश की 2007 में बनी आपका सुरूर ब्रांड को यहां आगे बढ़ाया गया है। उसी अंदाज का प्रेम, थ्रिल, ऐक्शन और संगीत।
हिमेश लोकप्रिय कंपोजर-सिंगर हैं मगर उनकी जिद है कि अभिनय के लिए जाने जाएं। परंतु इसके लिए वह जिम में बनाए सिक्स पैक्स युक्त शरीर को दिखाने से ज्यादा कुछ करते नजर नहीं आते। अपनी पुरानी फिल्मों की तरह वह इस फिल्म में भी अभिनेता के तौर पर निराश करते हैं। उनके मनमा कभी इमोशन जागता नहीं दिखता। उनके संगीत में मौजूद एकमात्र तनाव का सुर अभिनय भी मौजूद है।
फिल्म की सबसे बड़ी मुश्किल यह कि यहां सब बेहद बनावटी और फाइबर ग्लास का सा एहसास देता है। कहानी, अभिनय, संगीत, ऐक्शन लेकर लोकेशन तक। एक-एक सीन बुना हुआ और नकली मालूम पड़ता है। इन बातों के बीच नसीरूद्दीन शाह, शेखर कपूर और कबीर बेदी माहौल को सहज बनाते हैं तो नकलीपन ज्यादा उभर आता है। फराह करीमी इस कृत्रिम कारीगरी में फिट हैं और उन्हें निर्देशक ने अभिनय के साथ शरीर दिखा कर भी दर्शकों को आकर्षित करने का मौका दिया है। अतः वह कुछ लोगों की नजरों को भा सकती हैं।