फिल्मिस्तान जैसी फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके नितिन कक्कड ने अपनी नई फिल्म नोटबुक में कश्मीर की वादियों को कहानी कहने का जरिया बनाया है। थाईलैंड की फिल्म टीचर्स डायरी की इस ऑफिशियल रीमेक में नितिन के सामने चुनौती रही दो नए कलाकारों का करियर शुरू करने की और नितिन इस पर खरे उतरे हैं।
फिल्म नोटबुक से डेब्यू कर रहे हैं जहीर और प्रनूतन, जिनके फिल्म में किरदारों के नाम हैं कबीर और फिरदौस। कबीर कश्मीरी पंडित है, जो घर छोड़ चुका है। फिरदौस एक टीचर है और कश्मीर की एक गुमनाम सी जगह में बने स्कूल में बच्चों को पढ़ाया करती थीं। कबीर सेना की नौकरी छोड़ चुका है और इसी स्कूल में पढ़ाने आता है।
यहां उसे एक डायरी मिलती है जो फिरदौस ने लिखी है। डायरी से शुरू ये प्रेम कहानी डायरी पर आकर ही खत्म होती है। कैसे? ये जानने के लिए तो आपको फिल्म ही देखनी चाहिए।
किसी दूसरी भाषा में पहले ही बन चुकी फिल्म में ज्यादा कुछ प्रयोग करने की गुंजाइश होती नहीं क्योंकि ऐसे में कहानी के तार उलझ जाने का खतरा रहता है। फिल्म रीमेक है फिर भी इसकी लेखन टीम में शब्बीर हाशमी, दाराब फारूकी और पायल अशर के नाम हैं। पायल अशर ने फिल्म के संवाद लिखे हैं और नए कलाकारों को देखते हुए इनके लिए उनकी तारीफ बनती है।
नितिन कक्कड़ की फिल्म में कुदरत का कोई करिश्मा होता है और जिसे नितिन अपनी कहानी का सूत्रधार बनाकर फिल्म आगे बढ़ाते हैं। इस काम में इस बार नितिन की मदद की है सिनेमैटोग्राफर मनोज खतोई ने, जिनका कैमरा कश्मीर की वादियों के कैनवास पर कूंची की तरह चलता है।