गोवा के एक पिक्चर पोस्टकार्ड जैसे खूबसूरत गांव -पोकोलिम- को अगर आप नक्शे में ढूंढने की कोशिश करेंगे तो वह नहीं मिलेगा। इसी गांव में रहती है एंजी (दीपिका पादुकोण)। जो विधवा है। उसका पति शादी के जश्न में ही केक खाते हुए मगर गया था।
एंजी सास (डिंपल कपाड़िया) के साथ रहती है। जिसकी पूरे गांव में धाक है। इसी गांव में रहता है, फर्डी (नसीरूद्दीन शाह), जिसने शादी नहीं की क्योंकि वह फैनी से प्यार करता था।
उसने फैनी को खत लिख कर प्यार का इजहार किया था, लेकिन जवाब ही नहीं आया। अब 46 साल बाद वह खत लौटकर आया है, जो फैनी तक पहुंचा ही नहीं। विडंबना देखिए कि फर्डी गांव के डाकघर का पोस्टमास्टर है।
तलाश है फैनी की
‘फाइंडिंग फैनी’ उसी फैनी की तलाश है। एंजी, उसकी सास और फर्डी के साथ इस तलाश में मुंबई से छह साल बाद गांव लौटा सावियो डि-गामा (अर्जुन कपूर) और इंटरेशनल पेंटर डॉन पैद्रो (पंकज कपूर) भी शामिल है। फैनी को ढूंढ कर फर्डी अपने दिल की बात कहना चाहता है।
पुरानी-सी खटारा कार में होने वाली लंबी यात्रा असल में दो और प्रेम कहानियों गवाह बनती है। एंजी और सावियो तथा सास और डॉन पैद्रो की प्रेम कहानियां। इन किरदारों का चरित्र और मिजाज धीरे-धीरे खुलता है।
गोवा के खूबसूरत दृश्यों में रची यह फिल्म कहानी के लिहाज से बहुत रोचक है। पूरा कथानक किसी लैटिन अमेरिकी उपन्यास की तरह धीरे-धीरे सूत्रों को खोलता हुआ चौंकाता है। लेकिन सभी दर्शक इससे खुद को जोड़ सकें यह संभव नहीं है। मुश्किल यह है निर्देशक होमी अदजानिया ने इसे हिंदी के फिल्म दर्शकों के हिसाब से नहीं बनाया है।
पर सोच है अंग्रेजी वाली
मूल रूप से उन्होंने फिल्म अंग्रेजी में बनाई और हिंदी में डब कर दिया। डबिंग में कई जगहों पर साफ-साफ कलाकारों के होठों के हिलने और उनके द्वारा कहे गए शब्द के उच्चारण में फर्क दिखता है। यह किताब में होने वाली प्रूफ की गलतियों की तरह खटकता है।
निर्माता-निर्देशक का इरादा हिंदी के दर्शकों तक अनूठी कहानी को पहुंचाने का कम और हिंदी बाजार को भुना लेने का ज्यादा है। इसी बात का परिणाम है कि गोवा की कहानी में पंजाबियत का तड़का लगा संगीत बजाते हुए निर्देशक को हिचक नहीं होती।
सभी का अभिनय लाजवाब
फिल्म में नसीर, पंकज और डिंपल जैसे अनुभवी ऐक्टर हैं। उनके सामने दीपिका और अर्जुन का आत्मविश्वास चौंकाता है। आश्चर्य होता है कि यह बॉलीवुड की मसाला फिल्मों में काम करने वाले कलाकार हैं। दीपिका बहुत सहज और सुंदर लगी हैं, जबकि अर्जुन ने मेहनत से काम किया है। ‘फाइंडिंग फैनी’ कॉमेडी फिल्म नहीं है, लेकिन उसका टोन कॉमिक है।
किरदारों के साथ होने वाले घटनाएं और उनके बातें करने का अंदाज, उनके संवाद लगातार गुदगुदाते हैं। अगर आप इस फिल्म में मौजूद सितारों के फैन हैं और अलग ढंग की कहानियां देखने में रुचि रखते हैं तो यह फिल्म एंटरटेन करेगी। परंतु अगर आप खान, कपूर और कुमार ब्रांड कलाकारों के द्वारा किए जाने वाले मनोरंजन से ही खुद को धन्य पाते हैं तो ‘फाइंडिंग फैनी’ आपके लिए नहीं है।