फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mother Teresa & Me Review: संत बनने से पहले की मदर टेरेसा की कहानी, कमल मुसले के हुनर की एक और मिसाल

विज्ञापन
'मदर टेरेसा एंड मी' फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन
Movie Review
मदर टेरेसा एंड मी
कलाकार
बनिता संधू , जैकलीन फ्रिट्ची कॉर्नाज , दीप्ति नवल , विक्रम कोचर , ब्रायन लॉरेंस , हीर कौर , केविन मेन्स , जीना बैश्य और जैक गॉर्डन आदि
लेखक
कमल मुसले
निर्देशक
कमल मुसले
निर्माता
कमल मुसले
रिलीज:
5 मई 2023
रेटिंग
3/5

फिल्म ‘मदर टेरेसा एंड मी’ तीन असाधारण महिलाओं की कहानी है जिनका जीवन आशा, करुणा और प्रेम से जुड़ा हुआ है। फिल्म की कहानी मदर टेरेसा के इर्द गिर्द घूमती है। यह फिल्म भारत में मदर टेरेसा के शुरुआती वर्षों यानी 1940 के दशक के मध्य की है जब वह कोलकाता (कलकत्ता) में गरीबों, बीमारों और मरने वालों की मदद करने की कोशिश कर रही थीं। यह फिल्म मदर टेरेसा के जीवन से प्रेरित प्रेम और करुणा के बारे में है। साथ ही यह भी दिखाया गया कि उनके विचारों का प्रभाव समाज पर कितना पड़ा है। 

विज्ञापन

'मदर टेरेसा एंड मी' फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘मदर टेरेसा एंड मी’ में दो समानांतर कहानियां चलती हैं। एक मदर टेरेसा की, जब उन्होंने कोलकाता (कलकत्ता) की झुग्गियों से काम करना शुरू किया था। और, दूसरी लंदन में रहने वाली भारतीय मूल की एक आधुनिक युवती कविता की, जिसके लिए प्यार एक भ्रम है। वह एक असंतुष्ट रोमांटिक रिश्ते, अपने माता-पिता की भारतीय परंपरा के अनुसार शादी करने की योजना और एक अप्रत्याशित गर्भावस्था के आंतरिक संघर्षों से गुजर रही है। फिल्म की कहानी मदर टेरेसा और कविता के जीवन, भावनात्मक यात्रा और समझौता न करने वाली आपस में गुंथी हुई कहानियों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी बुनी गई। दोनों महिलाएं गंभीर व्यक्तिगत संदेह के बावजूद अपना मुकाम हासिल करती हैं। मदर टेरेसा का जीवन संघर्षों से भरा रहा फिर भी उन्होंने अपना काम जारी रखा। वहीं भारतीय मूल की युवा ब्रिटिश महिला कविता को आज के कोलकाता में सच्चे प्यार और करुणा की तलाश है।

'मदर टेरेसा एंड मी' फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘मदर टेरेसा एंड मी’ गर्भपात जैसे मुद्दे पर प्रकाश डालती है। भारतीय मूल की कविता जब शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाती और अस्पताल में गर्भपात के लिए जाती है तो फिल्म में चल रही समांतर कहानी में दिखाया गया है कि मदर टेरेसा स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं और कहती है, 'गर्भपात करना किसी भी स्थिति में ईश्वर की मर्जी के खिलाफ है। भले ही कोई लड़की रेप के दौरान ही प्रेग्नेंट क्यों न हो जाए।’ गर्भ में पल रहे बच्चे को पैदा करना या फिर बच्चा पैदा होने के बाद उसकी परवरिश की जिम्मेदारी किसकी है। एक लड़की किसी भी वजह से प्रेग्नेंट क्यों ना हो? वह अपने बच्चे को मारने के लिए नहीं सोच सकती है, क्योंकि वह एक मां है। ऐसे कई सामाजिक मुद्दों को इस फिल्म में उठाया गया है। मदर टेरेसा पर यह भी आरोप लगा था कि लोगो को शिक्षित करने के बहाने उनका धर्मांतरण करने की कोशिश करती हैं। फिल्म में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है।

'मदर टेरेसा एंड मी' फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म के लेखक-निर्देशक कमल मुसले ने इंग्लैंड से फिल्म निर्देशन और पटकथा लेखन में स्नातक करने के बाद करीब 30 से अधिक फिल्में बनाई हैं, जिनमें फीचर फिल्म, वृत्तचित्र और कला फिल्में शामिल हैं। उनकी  'द थ्री सोल्जर्स' और 'रैलेट करी' जैसी कई फिल्में अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित समारोहों में दिखाई जा चुकी हैं, जिन्होंने कई पुरस्कार भी जीते हैं। फिल्म 'मदर टेरेसा एंड मी' में उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ एक अच्छी फिल्म बनाने की कोशिश की है। यह फिल्म वास्तविकता के बहुत करीब है। लेकिन फिल्म में थोड़ी से यह बात खटकती है कि जब कोलकाता (कलकत्ता) की झुग्गियों में रहने वाले लोग फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करते हैं तो फिल्म में कई जगहों पर मदर टेरेसा को ऐसे लोगों से बंगला भाषा में बात करते दिखाया गया है। अगर झुग्गी बस्ती में रहने वालों के संवाद भी उनकी स्थानीय भाषा में होते तो उसका प्रभाव कुछ और ही पड़ता।

'मदर टेरेसा एंड मी' फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म में मदर टेरेसा की भूमिका जैकलीन फित्ची कॉर्नाज ने निभाई है। वह मदर टेरेसा की भूमिका में काफी प्रभावशाली लगी हैं। पंजाबी मूल की एक ब्रिटिश अभिनेत्री बनिता संधू ने फिल्म में कविता का किरदार निभाया है। उन्होंने अपनी भूमिका के साथ काफी हद तक न्याय करने की कोशिश की है। हिंदी फिल्मों में वह सुजीत सरकार की फिल्म 'अक्टूबर' में वरुण धवन के साथ काम कर चुकी हैं। काफी समय बाद दीप्ति नवल एक बेहतरीन किरदार में नजर आई हैं। विक्रम कोचर, ब्रायन लॉरेंस, हीर कौर, केविन मेन्स, लीना बैश्य, शोबू कपूर, माही अली खान, फेथ नाइट और जैक गॉर्डन जैसे अभिनेताओं ने अपने अभिनय से सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
विज्ञापन

'मदर टेरेसा एंड मी' फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म की शूटिंग कोलकाता और लंदन में हुई है। इस फिल्म में कोलकाता (कलकत्ता) के साल 1940 के उस दौर को दिखाया गया है जब मदर टेरेसा ने वहां काम शुरू किया था। फिल्म के कला निर्देशक ने उस दौर को अच्छे से क्रिएट किया है और सिनेमैटोग्राफर कीको नखरा ने उतनी ही खूबसूरती से फिल्म के एक एक दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया। फिल्म वास्तविक घटनाओं पर आधारित है, इसलिए निर्देशक ने इस बात का ख्याल रखा है कि सिनेमा में लिबर्टी के नाम पर कुछ भी ना ठूंसा जाए। फिर भी फिल्म की लंबाई अगर 15 मिनट कम होती तो फिल्म के कुछ बोरियत भरे सीन हटाए जा सकते थे। इस मामले में फिल्म के एडिटर की थोड़ी सी चूक नजर आती हैं। पीटर शायर, एनिक रोडी, वाल्टर मैयर और लॉरेंस क्रेवोइसियर का संगीत सामान्य है। फिल्म में कविता को संगीत प्रेमी दिखाया गया है सो वहां संगीत को बेहतर बनाने की गुंजाइश थी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें