हिरोकाजु कोरे-एडा ने पहली बार किसी दूसरे लेखक की फिल्म का निर्देशन संभाला है। कहानी सिंगल मदर और उसके 10 साल के बेटे की है जो पांचवी कक्षा में पढ़ रहा है। बच्चा किस हालात से गुजरा है, उसे दर्शाने के लिए हिरोकाजु पहले उसके व्यवहार में आने वाले परिवर्तन को सिगड़ी पर चढ़ाते हैं। फिल्म धीमी आंच पर पकनी शुरू होती है और बच्चे की हरकतों में आ रहे बदलाव के कारण तलाशती हुई आगे का सफर तय करती है। मां स्कूल पहुंचती है। स्कूल से शिकायत करती है। पहले तो स्कूल की प्रिंसिपल और बाकी स्टाफ कुछ करता नहीं है लेकिन फिर बात बात आगे बढ़ती है, और धीरे धीरे बच्चे के दिमागी विकास पर नकारात्मक असर डालने वाली बातें और उनके कारक सामने आने शुरू होते हैं।
युजी सकामोटो की लिखी कहानी बाल शोषण, स्कूल में बदमाशी, नारीवाद और समलैंगिक रोमांस जैसे संवेदनशील विषयों पर है। कहानी इस बात पर खास जोर देती है कि ऐसी क्या वजह होती है, जब एक 10 साल का लड़का अजीबो गरीब हरकतें करने लगता है। वास्तव में वह कोई मानसिक बीमारी है या कोई और वजह है? ऐसी स्थिति में अभिभावक की क्या जिम्मेदारी होती है और इन सब परिस्थियों से वह कैसे निकलता है, फिल्म में इन सब बातों पर प्रकाश डाला गया है। फिल्म का निर्देशन करने के अलावा हिरोकाजु कोरे-एडा ने ही फिल्म का संपादन भी किया है। फिल्म में तीन कहानियां समानांतर चलती रहती हैं, और दिक्कत यहां ये है कि तीनों कहानियों का एक दूसरे से तारतम्य लड़खड़ाया हुआ है।
अभिनय के लिहाज से मिनाटो मुगिनो की भूमिका में सोया कुरोकावा का अभिनय जबरदस्त रहा है। 10 साल के बच्चे की भूमिका में उन्होंने काबिले तारीफ काम किया है। योरी होशिकावा की भूमिका में हिनाता हिरागी, साओरी मुगिनो की भूमिका में सकुरा एंडो, शिक्षक मिचिटोशी होरी की भूमिका में एइता नागायामा, मिचिटोशी होरी की प्रेमिका हिरोना सुजुमुरा की भूमिका में मित्सुकी ताकाहाटा का अभिनय प्रभावशाली रहा है। ऑस्कर विनर संगीतकार रयुइची सकामोटो की यह आखिरी फिल्म है। जापान में इस फिल्म के रिलीज के दो महीने पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। यह फिल्म उनकी स्मृतियों को समर्पित है।