फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Modern Love Mumbai Review: फातिमा, अरशद और चित्रांगदा ने जीता दिल, मुंबई में घूमतीं आधुनिक प्रेम कहानियां

विज्ञापन
मॉडर्न लव मुंबई - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
Movie Review
मॉडर्न लव मुंबई
कलाकार
प्रतीक गांधी , प्रतीक बब्बर , मेयांग चैंग , रणवीर बरार , वामिका गब्बी , मसाबा गुप्ता , अरशद वारसी और फातिमा सना शेख आदि।
लेखक
-
निर्देशक
हंसल मेहता , विशाल भारद्वाज , अलंकृता श्रीवास्तव , शोनाली बोस , ध्रुव सहगल और नुपूर अस्थाना
निर्माता
-
ओटीटी
अमेजन प्राइम वीडियो
रिलीज डेट
13 मई 2022
रेटिंग
3/5

न्यूयॉर्क टाइम्स के कॉलम ‘मॉडर्न लव’ पर प्राइम वीडियो ने अमेरिका में बेहद लोकप्रिय सीरीज इसी नाम से बनाई। हर पल बदलते जीवन की आपाधापी में मेट्रो शहरों की उम्मीदों, कठिनाइयों और संघर्ष के बीच उगने वाली इन प्रेम कहानियों की महक को मुंबई में तलाशने की कोशिश है फिल्मावली ‘मॉडर्न लव मुंबई’। जैसा कि नाम है इन प्रेम कहानियों में कुछ ऐसा तलाशने की कोशिश इसके निर्देशकों ने की है जो कुछ ‘मॉडर्न’ जैसा हो, अगर इन कहानियों के इनके कथ्य की गुणवत्ता, कहानी के विकास और कलाकारों के साहस के हिसाब से देखना चाहें तो इसमें पहला नंबर फिल्म ‘रात रानी’ का आता है। प्रतीक गांधी और रणवीर बरार की कहानी ‘बाई’ का हल्ला भी खूब है। लेकिन विशाल भारद्वाज और हंसल मेहता जैसे निर्देशकों की ये जिम्मेदारी है कि वह ऐसी कहानियों को नई दिशा दिखाएं। दोनों निर्देशक यहां सिनेमा में कुछ नया कुछ ‘मॉडर्न’ जोड़ने की कोशिश तो करते दिखे लेकिन उनकी कोशिशों पर शोनाली बोस और नूपुर अस्थाना के करतब भारी हैं।

विज्ञापन

मॉडर्न लव मुंबई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

रात रानी की महक
निर्देशक शोनाली बोस की कड़ी में फातिमा सना शेख ने कमाल का काम किया है। मुंबई में किसी के भरोसे अपनी जिंदगी शुरू करने का ख्वाब ही कितना फिल्मी है, ये कहानी बताती है। किसी दूसरे के कंधे पर सिर रखकर रोने का सहारा तक ये शहर अक्सर नहीं देता। लाली घर से भागती है सदियों पुराने प्रेम के ताप के असर से। लेकिन, उसको इसकी आंच झुलसाती है मुंबई आकर। जिसके भरोसे वह आई। वही भरोसा तोड़ गया। फातिमा सना शेख ने लाली के किरदार में दिल जीत लिया है। वह काबिल अदाकारा हैं। उनको बेहतर निर्देशक चाहिए। साथ में भूपेंद्र जडावत और दिलीप प्रभावलकर भी हैं। छह कहानियों की फिल्मावली ‘मॉडर्न लव मुंबई’ में रात रानी की महक अव्वल है।

मॉडर्न लव मुंबई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कटिंग चाय की चुस्की
फिल्मावली ‘मॉडर्न लव मुंबई’ की छह कहानियों में जो दूसरी कहानी सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वह है ‘कटिंग चाय’। इसके दोनों कलाकार अरशद वारसी और चित्रांगदा सिंह, हिंदी सिनेमा के ऐसे कलाकार है जिनकी प्रतिभा इस उद्योग की राजनीति और रंगदारी में कभी खुलकर सामने आ ही नहीं पाई। प्रकाश झा जब कहते हैं कि भारतीय सिने कलाकार अदाकारी के मामले में दोयम हैं तो उन्हें अरशद औऱ चित्रांगदा जैसे कलाकारों का अभिनय शायद दिखता ही नहीं। ‘कटिंग चाय’ मुंबई शहर के आसमान में उड़ान भरने को बेताब दो परिंदों की कहानी है जिन्हें अपने घोसले के सुकून का एहसास रेलवे स्टेशन पर होता है। नुपूर अस्थाना ने दोनों काबिल कलाकारों से बेहतरीन अभिनय कराया है।

मॉडर्न लव मुंबई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

इंसान की स्थान से मोहब्बत
मसाबा गुप्ता और ऋत्विक भौमिक अभिनीत कहानी ‘आई लव ठाणे’ का संघर्ष असल जिंदगी का ऐसा संघर्ष है जो नई सदी में जन्मे किशोरों और युवाओं की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। इन्हें अपनेपन की तलाश है लेकिन ये वह पीढ़ी है जिनकी पर्स में एक अदद कंडोम हमेशा होता है कि पता नहीं कब अंगूठा राइट स्वैप कर जाए। दैहिक संबंधों से आगे के रिश्तों और एहसासों की डोर तलाशती निर्देशक ध्रुव सहगल की इस कहानी में प्रेम को पनपते दिखाने का तरीका थोड़ा धीमा जरूर है लेकिन आखिर तक अपना असर बनाने में कामयाब रहता है। मसाबा गुप्ता बतौर अभिनेत्री धीरे धीरे विकसित हो रही हैं। ऋत्विक भौमिक के ऊपर कहानी को कामयाब बनाने का दबाव दिखता है।

मॉडर्न लव मुंबई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

हंसल मेहता के नाम का सहारा
फिल्मावली ‘मॉडर्न लव मुंबई’ तीन अपेक्षाकृत नए और तीन दिग्गज निर्देशकों की फिल्मों का कॉकटेल है या कह लें कि गुलदस्ता है। हालांकि जिस क्रम में मैं इन्हें लिख रहा हूं ओटीटी पर वे इस क्रम में नहीं है लेकिन इस क्रम में फिल्में देखकर आप अपना समय बचा सकते हैं और अपना मूड भी दुरुस्त रख सकते हैं। इन कहानियों में सबसे ज्यादा प्रचारित कहानी ‘बाई’ दो मुस्लिम लड़कों के समलैंगिक रिश्तों की कहानी है। हंसल मेहता ने ओटीटी पर अपना एक अलग रसूख बनाया है। उस रसूख के दाम लगाने का जब भी मौका मिलता है वह छोड़ते नहीं है। प्रतीक गांधी उनको ना कर नहीं सकते और रणवीर बरार को कैमरे के सामने डेब्यू करना है तो वह ऐसी फिल्म तुरंत लपक ही लेंगे। ‘बाई’ की बस इतनी सी कहानी है, एक जरूरत से ज्यादा तानी गई फिल्म। तनूजा का अपना आभामंडल रहा है, उन्हें इस तरह की फिल्मों से दूर रहना चाहिए।

मॉडर्न लव मुंबई - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विशाल के सुरों का आसमान
हंसल मेहता जैसी ही निराशा होती है फिल्म ‘मुंबई ड्रैगन’ देखकर। विशाल भारद्वाज ने या तो मुंबई की सड़कों पर घूमना छोड़ दिया है या फिर शोहरत और दौलत ने उनको आम जिंदगी के रस से दूर कर दिया है। वह बासी दाल में सरसों के तेल का तड़का लगाकर उसमें सोंधी खुशबू डालने की कोशिश करते रहते हैं। नसीरुद्दीन शाह उनके एहसानों तले दबे कलाकार हैं। वामिका गब्बी को हर उस निर्देशक के साथ काम करने की जल्दी है, जिसका नाम रहा हो। फिल्म के दोनों मुख्य कलाकारों येओ यान यान व मेयांग चैंग ने अपने किरदार निभाने में पूरी ईमानदार कोशिश की है, बस ये कहानी दर्शकों से रिश्ता नहीं जोड़ पाती। जबर्दस्ती के ट्विस्ट फिल्म का असर फीका करते हैं।
विज्ञापन

मॉडर्न लव मुंबई - फोटो : अमर उजाला,
झाइयों की परछाइयां
‘मॉडर्न लव मुंबई’ में शामिल लघु फिल्मों में सबसे कमजोर फिल्म है अलंकृता श्रीवास्तव निर्देशित फिल्म ‘माई ब्यूटीफुल रिंकल्स’। वैसे देखा जाए तो सारिका, दानिश रिजवी, एहसास चानना और तनवी आजमी जैसे काबिल कलाकारों के साथ इस कहानी को लेकर एक अलग और अद्भुत संसार रचा जा सकता था लेकिन फिल्म ‘दिल चाहता है’ में डिंपल और अक्षय खन्ना वाले ट्रैक सी इस कहानी में जीवन का वह रस नहीं है जो दो अलग अलग आयुवर्ग के बीच पनपने वाले प्रेम में महसूस होता है। ये अलग तरह का प्रेम है। अलग तरह का समर्पण है। और, इसको समझने के लिए एक अलग तरह की परिपक्वता की जरूरत होती है। रामगोपाल वर्मा ने ‘शब्द’ में इसे समझाने की कोशिश की थी। यहां वैसा आधुनिक प्रेम नहीं है। मुंबई का तो कतई नहीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें