सरहदों पर जब सेनाएं लड़ती हैं, तो उनको इस बिंदु तक लाने के कई कारक होते हैं। क्या ऐसा कोई कारक कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी तैयार कर सकती हैं? आईएमएफ का जासूस एथन हंट इसी सवाल का जवाब देकर विदा हो रहा है। साल 1996 में हैरतअंगेज कारनामों के साथ दुनिया भर में अपने प्रशंसकों की एक नई फौज खड़ी कर देने वाले अभिनेता टॉम क्रूज द्वारा अभिनीत ये किरदार पूरे सम्मान के साथ नई जिंदगी जीने निकल रहा है। दाग तो उसके दामन पर तमाम होंगे लेकिन दुनिया को तबाही से बचाकर जो बड़ी लकीर उसने अपनी नई फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग’ में खींची है, वह कमाल है। ये इस फ्रेंचाइजी की आखिरी फिल्म है। एक और बात जो शुरू में ही बता देना ठीक रहेगा कि हाल फिलहाल में होती रही तमाम चर्चाओं के विपरीत किसी भी भारतीय कलाकार को इस फिल्म में अभिनय का मौका नहीं मिला है।
मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आखिरी मिशन, सबसे बड़ी कामयाबी
फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग’ शुरू होती है तो नई कहानी की भूमिका बांधी जाती है। रिकैप के तौर पर पुरानी कहानी भी सुनाई जाती है। लेकिन, किसी एक्शन फिल्म को शुरू करने का ये अंदाज थोड़ा बोरिंग है। होना तो यही चाहिए था कि जेम्स बॉन्ड की तरह ही एथन हंट भी हूवर डैम जैसी किसी मानव निर्मित विशालकाय परियोजना से कहीं लटकता तो कहीं अटकता नजर आता लेकिन एक बढ़िया हुकर क्रिएट करने से फिल्म की राइटिंग टीम चूक गई। ये तो आपको पता ही है कि ‘क्रूसिफाई की’ मिलने के बाद एथन हंट को वह जगह तलाशनी थी जहां एआई की आत्मा है यानी कि वह पनडुब्बी जहां इसका सोर्स कोड छुपा है। लूथर ने इस एआई का तोड़ ढूंढ निकाला है। बस इस तोड़ को सोर्सकोड से जोड़ना है और इसे दुनिया के सबसे बड़े डाटा वॉल्ट के सर्वर पर अपलोड करने के साथ ही पलक झपकते ही एक 5डी डाटा ड्राइव में कैद कर लेना है। अमेरिका के असली फाइटर करियर से लेकर अलास्का तक में फिल्म के कुछ बेहतरीन एक्शन सीक्वेंस फिल्माए गए हैं। पर, इस बार दर्शकों की धड़कनें वैसी तेज होती नहीं है जैसी इस फ्रेंचाइजी की पहले की फिल्मों मे होती रही हैं।
मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग
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क्रिस्टोफर और क्रूज की जोड़ी का चरम
62 साल के हो चुके टॉम क्रूज ने इस फिल्म फ्रेंचाइजी को रोकने का फैसला बहुत सोच समझ कर लिया है। वह खुद इस फ्रेंचाइजी के निर्माता रहे हैं। सीरीज की आखिरी चार फिल्में उन्होंने क्रिस्टोफर मैकक्वैरी से ही निर्देशित कराई है। दोनों के बीच सहजता का जो रिश्ता फिल्म फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फालआउट’ में अपने उत्कर्ष पर दिखा था, वह इसके बाद से ढलान पर रहा और अब फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग’ तक आकर दोनों के करिश्मे में वह ओज नही रहा, जिसके लिए इस सीरीज की फिल्में देखने लोग मोटी रकम खर्च करके सिनेमाघरों में जाते हैं। एक तो पिछली कड़ी और इस ताजा कड़ी की कहानी में कोई नवीनता नहीं है। ये ठीक है कि कहानी की घटनाओं में रोचकता और अत्यावश्यकता (अर्जेंसी) दिखाने के लिए फिल्म दुनिया भर में इस बार भी घूमती है लेकिन दर्शकों से पूरी सीट के पैसे लेकर उन्हें उसका कोने पकड़ने पर मजबूर कर देने वाला कोई सीक्वेंस इस फिल्म में नहीं दिखा।
मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग
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अपने ही पैमाने पर कसे गए टॉम क्रूज
मनोरंजन के लिहाज से फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग’ अच्छी है और तमाम दूसरी हॉलीवुड फिल्मों से बेहतर भी लेकिन इस फ्रेंचाइजी के लिए टॉम क्रूज के अपने बनाए पैमाने पर ये फिल्म पूरी तरह खरी नहीं उतरती। कहीं कुछ कमी सी रह जाती है। पटकथा बहुत ही अपेक्षित रास्ते पर चलते हुए अपना सफर पूरा करती है। कुछ भी ऐसा नहीं होता फिल्म में कि दर्शक अपनी सीटों से उछल पड़ें। बस एक जगह ऐसा होते होते रह जाता है जब पहली ‘मिशन इंपॉसिबल’ फिल्म के कलाकार रॉल्फ सैक्सन नजर आते हैं। इस एक क्षेपक को छोड़कर फिल्म के बाकी के सब प्लॉट्स उतने मजबूत नहीं हैं। हां, फिल्म के क्लाइमेक्स के बाद जब एथन हंट के सारे नए पुराने साथी फिर से मिलते हैं, तो वह दृश्य काफी अच्छा और भावुक बन पड़ा है। मिशन पूरा होने के बाद लूथर का ऑडियो संदेश बहुत अच्छा लिखा गया है। लूथर, वी विल मिस यू!
मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग
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एथन हंट की सेवानिवृत्ति का सही समय
संवादों में जो रोचकता फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग’ ने हासिल की है, वह इसकी कहानी और पटकथा से मिसिंग है। अभिनय में टॉम क्रूज ने फिर एक बार अपनी जान की बाजी लगाकर काम किया है। एक्शन सीन्स काफी सारे उन्होंने खुद ही किए हैं जैसे कि इसके पहले की फिल्मों में वह करते रहे हैं। साउथ अफ्रीका में शूट हुआ दो जहाजों वाला एक्शन सीक्वेंस फिल्म की हाईलाइट बनना था लेकिन हीरो और विलेन की इस वन ऑन वन लड़ाई से दर्शकों का रिश्ता जुड़ने में काफी समय लगता है। उम्र टॉम क्रूज पर हावी हो रही है। क्लोज अप शॉट्स में ऐसा दिखता भी है। जासूसों का अगर कोई रिटायरमेंट टाइम होता होगा, तो ये एथन हंट के रिटायर होने का बिल्कुल सही समय है। उनके अलावा चोर से जासूस बनीं ग्रेस के किरदार में एटवेल ने अच्छा काम किया है। लूथर बने विंग रेम्स का किरदार इस फ्रेंचाइजी के लोकप्रिय किरदारों में शामिल रहा है। इस फिल्म के बाद वह दर्शकों के दिल के और करीब आ जाएंगे। बेनजी बने साइमन पेग का काम अच्छा है। फ्रेंचाइजी की फिल्म ‘फालआउट’ में सीआईए डायरेक्टर के रूप में दिखीं एंजेला बैसेट का अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में दिखना फिल्म की कास्टिंग की बढ़िया सोच दर्शाता है।
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राष्ट्रपति के फौजी बेटे वाला यादगार प्रसंग
फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग’ ऐसे समय में रिलीज हुई है जब चीन और तुर्किये के हथियारों से पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने की कोशिश की, फिल्म में भी यही दिखाया गया है कि कैसे कृत्रिम मेधा दुनिया से मानवता का सफाया करने के लिए नाभिकीय शक्तियों वाले सारे देशों को आपस में भिड़ाने की तैयारी कर चुकी है। युद्ध किसी समस्या का अंत नहीं है और इसके लिए इन्कार करके कम से कम फिल्म में अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक अच्छा संदेश दिया है। बड़बोले ट्रम्प को ये फिल्म इस मायने में जरूर देखनी चाहिए। दूसरा संदेश फिल्म में इसी किरदार के माध्यम से ये भी दिया गया है कि किसी सफल इंसान के बेटे को उस जैसा सफल होना जरूरी नहीं है और ये भी जरूरी नहीं कि वह नौकरी करते समय अपने अभिभावकों की गरिमा बनाए रखने का बोझ उठाता फिरे। यहां राष्ट्रपति का बेटा उनकी अगवानी में तैनात फौजियों के बीच साधारण सैनिक के रूप में खड़ा मिलता है और राष्ट्रपति को सबके सामने उसे अपने बेटे के रूप में पहचानने में कोई शर्म महसूस नहीं होती।
मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मु्ंबई
चलते चलते, बात आईनॉक्स पीवीआर की
टॉम क्रूज की फिल्में तकनीकी रूप से बहुत कमाल की होती हैं। इनके प्रशंसकों की एक बड़ी संख्या इसीलिए इन फिल्मों को आईमैक्स थियेटर में देखना पसंद करती है, ये और बात है कि देश के तमाम सिनेमाघर अब भी इन फिल्मों के लिए सोचा गया दृश्य और श्रव्य प्रभाव सिनेमाघरों में पैदा कर पाने से चूक जाते हैं। यहां मुंबई के आईमैक्स, आइनॉक्स मलाड मे देखी गई इस फिल्म का खराब प्रोजेक्टर के चलते खूब कचरा हुआ। पहले दिन का सुबह 6 बजे का पहला शो, पहले तो करीब 40 मिनट की देरी से शुरू हुआ और फिर राष्ट्रगान से लेकर फिल्म की कमान खिंचने तक परदे पर दृश्य बार बार फ्रीज होते रहे। फिल्म ‘मिशन इंपॉसिबल: द फाइनल रेकनिंग’ की अपनी अवधि 170 मिनट है और ऊपर से फिल्म को देर से शुरू करना, बीच में इंटरवल कर देना और फिल्म का रुक रुककर चलना, ये बताने के लिए काफी है कि देश के मल्टीप्लेक्स हर्जाना भरने के बाद भी दर्शकों को लेकर उतने गंभीर नहीं हैं, जितने अपने पॉपकॉर्न और समोसा की बिक्री को लेकर दिखते हैं।