पुलिस कमिश्नर ने भी खबर को गलत बता दिया, दबाव भी बहुत आए, दहला देने वाली इस खबर के कारण तुम और द डेली पर ब्लैकमेल में इल्जाम लगे, लेकिन जब संजय मॉरीशस से मुम्बई आया तब उसे सहारा एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
मुम्बई के बम-ब्लास्ट दिल दहलानेवाले थे, जिसमे 257 की मौत तो तभी हो गई थी, बाद में भी घायल 1000+ में से कई की मौत हुई। सैकड़ों अनाथ हो गए थे। अगर संजय बच निकलता तो यह अन्याय होता, उनके लोगों के साथ।
बेखौफ पत्रकारिता की मशाल थामे रहने का शुक्रिया तो क्या कहूँ, तुम पर आज भी फख्र है, यही कहना चाहूंगा। संजू के प्रचार के शोर में तुम्हारा नाम दब नहीं सकता। जांबाजी से पत्रकारिता करते रहो, मेरा सलाम।
पुनश्च : शेर और रिपोर्टर कभी बूढ़े नहीं होते