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Matsya Kand Review: ठग विद्या की दिलचस्प कहानी में चमके रवि दुबे, रवि किशन का दिखा भोजपुरी अंदाज

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मतस्य कांड रिव्यू - फोटो : MX player
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Movie Review
मत्स्य कांड
कलाकार
रवि दुबे , जोया अफरोज , पीयूष मिश्रा , गिरीश शर्मा , श्रीकांत वर्मा , मधुर मित्तल , राजेश शर्मा और रवि किशन
लेखक
शिव सिंह
निर्देशक
अजय भुयान
निर्माता
नमेश दुबे
ओटीटी
एमएक्स प्लेयर
रेटिंग
2.5/5

वह कहानी तो आपने सुनी ही होगी कि जब हनुमान लंका दहन करके समुद्र में पूंछ बुझाने के लिए कूदे तो उनका पसीना एक मछली पी गई थी। अमीश और आनंद नीलकंठन जैसे लेखक चाहें तो रामचरित मानस का एक अलग यूनीवर्स खड़ा करके इस कथा के ऐसे कम जाने पहचाने किरदारों के कांड लिख सकते हैं। लेकिन, रामचरित मानस से लेकर ओटीटी तक आते आते कांड का अर्थ बदल चुका है। अब कांड का मतलब गाथा नहीं, कुछ ऐसा कर दिखाना है जो वाकई में ‘कांड’ लगे। गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में सेमी पॉर्न और पॉर्न वेब सीरीज को ललचाती युवा पीढ़ी के भरोसे एक अरब डाउनलोड का रिकॉर्ड बनाने वाले ओटीटी एमएक्स प्लेयर ने आखिरकार कुछ ऐसा करने की कोशिशें भी शुरू की हैं कि लोग इस पर कुछ ढंग की कहानियों बनी बनी वेब सीरीज या फिल्में देखने भी आ सकें। वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ इन्हीं कोशिशों का अच्छा कदम है। ओवरएक्टिंग थोड़ा इसमें कम होती और लिखने वालों ने बहुत ज्यादा हिंदी फिल्में न देखी होतीं तो ये सीरीज एमएक्स प्लेयर की इस साल की सबसे शानदार सीरीज बन सकती थी। सूत्र यहां रामचरित मानस की बजाय महाभारत से लिए गए दिखते हैं।

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मतस्य कांड रिव्यू - फोटो : MX player
वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ देखी जा सकती है एक एक एपीसोड करके। बिंज वॉच लायक ये सीरीज तो नहीं बन सकी है लेकिन टीवी पर एंकरिंग और एक्टिंग करते रहे रवि दुबे ने इस सीरीज में दिखाया है कि हुनर भले हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में खेमेबाजी का शिकार होता रहे लेकिन ओटीटी का लोकतंत्र अब आज नहीं तो कल काबिल कलाकारों का दमखम उनके प्रशंसकों तक पहुंचा ही देगा। इस लिहाज से वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ रवि दुबे की अदाकारी का अब तक का सबसे अच्छा और सबसे बड़ा प्रदर्शन है। यशराज फिल्म्स की क्रिएटिव टीम को ये सीरीज जरूर देखनी चाहिए। ‘बंटी और बबली’ का जो होना था सो तो हो गया लेकिन अगर आगे कभी उन्हें ‘धूम’ फ्रेंचाइजी में विलेन को ठग दिखाना हो तो सारी रिसर्च यहां मिल जाएगी।

मतस्य कांड रिव्यू - फोटो : MX player
वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ ने अपनी कहानी का धरातल वही रखा है जहां एमएक्स प्लेयर जैसे ओटीटी की असली दर्शक संख्या है। नेटफ्लिक्स जैसे दिग्गज ओटीटी भी अब भारत की तरफ भाग रहे हैं। उनको भी समझ आ गया है ‘इंडिया’ उनका ब्रांड तो मजबूत कर सकता है लेकिन 199 रुपये वाला मोबाइल प्लान ‘भारत’ में ही बिकना है। एमएक्स प्लेयर भी मुफ्त का सामान दिखाकर ग्राहक बनाने के बाद अब अपना गोल्ड प्लान ला चुका है और वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ जैसी कहानियां थोड़ा बेहतर कलेवर, कथानक और करिश्मे के साथ परोसी गईं तो ये ओटीटी अपना अलग स्थान बना सकता है। शिव सिंह ने अपने किरदारों के लिए कैनवास सही चुना है, बस इस कैनवास पर सजाने के रंग सारे वह हिंदी सिनेमा से उठा लाए हैं। कहीं कहीं इसमें ‘नारकोस’ की झलक भी दिखती है। मूल कहानी का तार अच्छा है। तरंग इसकी बेहतर हो सकती थी। कहानी में आमने सामने हैं, जेल से प्रशिक्षित होकर निकले एक ठग का बहुरुपिया बनने का हुनर और एक रंगबाज पुलिस अफसर की उसे पकड़ने की जिद।

मतस्य कांड रिव्यू - फोटो : MX player
वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ अगर इतनी लंबी सीरीज की बजाय तीन घंटे की ओरीजनल फिल्म की तरह बनती तो इसे और चुस्त दुरुस्त और तंदुरुस्त रखा जा सकता था। सीरीज की कहानी और पटकथा कहीं कहीं बहुत बोर करती है। मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा की फिल्मों जैसे किरदार भी आंखों में खटकते हैं। पोस्ट ऑफिस घोटाला जैसी नई चीजें भी यहां हैं लेकिन लंबे बालों वाले पुलिस अफसर बने रवि किशन वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ को हकीकत के करीब नहीं आने देते। उनके अभिनय पर भोजपुरी सिनेमा की भयंकर छाया है। रवि दुबे ने भी हिंदी सिनेमा के तमाम सितारों की जमकर कॉपी अपने किरदारों में की है। अजय भुयान ने कुल मिलाकर नेटफ्लिक्स की ‘रेड नोटिस’ फिल्म जैसी 12 मसाले 56 जायके वाली ऐसी वेब सीरीज बना दी है, जिसका अमूमन हर अध्याय दर्शकों को पहले से ही पता होता है।
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मतस्य कांड रिव्यू - फोटो : MX player
रवि दुबे और रवि किशन के बीच चलती चोर पुलिस की इस कहानी के तमाम दूसरे किरदार भी किश्तों में अपना रंग जमाते चलते हैं। पीयूष मिश्रा का कैमरे के सामने अपने कलर दिखाने का वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ अच्छा मौका है। जल्द ही वह ‘इलीलीगल 2’ में भी दिखने वाले हैं। युवाओं के बीच उनका एक अलग क्रेज रहा है और अपनी ब्रांड वैल्यू के हिसाब से वह जेल में रहकर अपनी अपराध पाठशाला चलाने वाले एक कोच के किरदार में खूब जमे हैं। जोया अफरोज से निर्देशक अजय भुयान ने ठीक ठाक काम कराया है। लेकिन, उनको अदाकारी के कुछ बेहतर पाठ सीखने अब भी बाकी हैं। साथ में राजेश शर्मा, श्रीकांत वर्मा और मधुर मित्तल जैसे काबिल कलाकार भी पूरा जोर लगाते दिखते हैं। गिरीश शर्मा को जब भी मौका मिलता है वह अपना असर छोड़ जाते हैं। संपादन और संगीत वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ की कमजोर कड़ियां हैं। इसके बावजूद खाली वक्त हो तो वेब सीरीज ‘मत्स्य कांड’ एक एक एपीसोड करके देखी जा सकती है।



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