वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
कहानी की शुरुआत टाटा ग्रुप के भीतर नए कारोबार की तलाश से होती है। टाटा प्रेस घाटे में है और ग्रुप को नए रास्ते खोजने हैं। इसी दौरान जेरक्सिस देसाई (जिम सर्भ) एक ऐसा प्रस्ताव लेकर आते हैं, जो सुनने में जितना अच्छा लगता है, उतना ही जोखिम भरा भी है।
भारत में ऐसी घड़ियां बनाना जो विदेशी ब्रांड्स को टक्कर दे सकें, उस दौर में आसान बात नहीं थी। जेरक्सिस के इस सपने को सबसे पहले समझते हैं जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (नसीरुद्दीन शाह) जब कई लोग इस प्लान को लेकर डाउट में हैं, तब जेआरडी टाटा उनके साथ खड़े नजर आते हैं।
अब आगे इस सफर में जेरक्सिस की पत्नी (नमिता दुबे) भी अहम भूमिका निभाती हैं। वहीं मस्तान भाई (राहुल देव) के जरिए विदेशी घड़ियों की तस्करी वाली दुनिया की झलक भी देखने को मिलती है।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
एक्टिंग
जिम सर्भ इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत हैं। जेरक्सिस देसाई के किरदार में उन्होंने ऐसा काम किया है जो लंबे समय तक याद रहेगा। उनकी एक्टिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि वह किरदार को हीरो बनाने की कोशिश नहीं करते। वह उसे इंसान बनाए रखते हैं। कई बार सिर्फ चेहरे के भाव ही बहुत कुछ कह जाते हैं।
नसीरुद्दीन शाह ने जेआरडी टाटा को किसी बड़े बिजनेसमैन की तरह नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति की तरह निभाया है जो लोगों और उनके विचारों पर भरोसा करना जानता है। यही बात उनके किरदार को खास बनाती है।
नमिता दुबे, वैभव तत्त्ववादी, जॉय सेनगुप्ता और कावेरी सेठ जैसे एक्टर्स ने सीरीज को मजबूत सहारा दिया है। खास तौर पर वैभव तत्त्ववादी, जेरक्सिस के दोस्त आकाश बंसल के रोल में खूब जंचते हैं। दोनों की दोस्ती कहानी में कई जगह गर्माहट लेकर आती है। राहुल देव का रोल छोटा है, लेकिन मस्तान भाई के रूप में वह अपनी छाप छोड़ जाते हैं।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, वैभव तत्ववादी
- फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशन
निर्देशक की तारीफ इसलिए बनती है क्योंकि उन्होंने एक ऐसी कहानी को रोचक बनाए रखा है जिसमें न कोई बड़ा विलेन है, न गोलीबारी है और न ही कोई सनसनीखेज मोड़। 80 के दशक का माहौल बनाने में मेकर्स ने काफी मेहनत की है। पुराने ऑफिस, फैक्ट्री, मशीनें, सरकारी फाइलें और उस दौर का वर्क कल्चर कहानी को रियल बनाते हैं।
खास बात यह है कि सीरीज में जगह-जगह उस समय के असली फुटेज भी इस्तेमाल किए गए हैं। इससे कहानी और उस दौर के बीच का फासला कम हो जाता है। कई सीन डॉक्यूमेंट्री और ड्रामा के बीच का दिलचस्प बैलेंस बनाते हैं।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
स्क्रीनप्ले
सीरीज का लेखन इसकी मजबूत कड़ी है। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और हर एपिसोड टाइटन की जर्नी का नया अध्याय खोलता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां बिजनेस की बातें भी आसान लगती हैं। फैक्ट्री लगाने, ब्रांड बनाने, मार्केटिंग करने और कस्टमर्स का भरोसा जीतने जैसी बातें बोझिल नहीं लगतीं। हालांकि बीच के कुछ हिस्सों में रफ्तार धीमी पड़ती है। खासकर बीच के एपिसोड थोड़ा और कसाव मांगते हैं।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या खटकता है?
कई जगह लगता है कि सीरीज टाइटन और उसके मेकर्स से इतनी प्रभावित है कि उनसे मुश्किल सवाल पूछने से बचती है। जॉय सेनगुप्ता, कावेरी सेठ, वैभव तत्त्ववादी और टीम के कुछ दूसरे किरदारों के बारे में और जानने की इच्छा रह जाती है।
राहुल देव का मस्तान भाई वाला ट्रैक दिलचस्प है, लेकिन जल्दी खत्म हो जाता है। बीच के कुछ एपिसोड थोड़े लंबे महसूस होते हैं।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
देखें या नहीं?
घड़ी तो ज्यादातर लोगों ने देखी होगी, लेकिन उसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं। यही बात इस सीरीज को खास बनाती है। हां, सीरीज में कमियां हैं। कुछ किरदार और स्क्रीन टाइम डिजर्व करते थे। कुछ हिस्से थोड़े छोटे भी किए जा सकते थे। लेकिन इन कमियों के बावजूद इसमें इतना दम है कि आप इसे बीच में छोड़ना नहीं चाहेंगे। इसकी सबसे बड़ी वजह है अभिनय।