निर्माताः सीडीबी म्यूजिकल/अंजुम रिजवी
निर्देशकः अश्तर सईद
सितारेः रवीना टंडन, दिव्या जगदाले, मधुर मित्तल, रुशद राणा
रेटिंग *1/2
रवि बुले
हाल के समय में स्त्रियों के विरुद्ध हिंसा के विषय पर जो चर्चित फिल्में आई हैं, उनमें मातृ सबसे कमजोर है। मातृ हालात का सच दिखाने की कोशिश करती शुरू होती है और क्रमशः फिल्म हो जाती है।
इंटरवेल से बढ़ते हुए अंत तक आधा दर्जन से ज्यादा बलात्कारियों और राज्य के मुख्यमंत्री की हत्या होती है। हत्याओं का अंदाज ऐसा कि उन्हें अंजाम देती नायिका पर अंगुली तक नहीं उठती। अपराधी-पुलिस-राजनीति के गठबंधन में यहां पुलिस कमजोर और हताश है। मातृ में न तो कथा की चमक है और न पटकथा का शिल्प। रह जाती हैं रवीना टंडन।
एक दशक पहले पारी समेट चुकीं रवीना दूसरी पारी में अपने अभिनय से न संवेदना जगाती हैं और न ऐक्शन से थ्रिल। फिल्म के बेहद निराशाजनक होने की वजह सेंसर की कैंची को बताया जा सकता है, परंतु जो सामने आता है वह बांधने में नाकाम है।
अमेरिकी फिल्म निर्माता-लेखक माइकल पैलिको ने मातृ लिखी है लेकिन कथा-पटकथा में नयापन या विशेषता नहीं है। कहानी में प्रतिशोध के दृश्य दोहराते रहते हैं। यह नहीं भूला जा सकता कि बदले की ऐसी कहानियां दर्शकों ने खूब देखी हैं। अश्तर सईद के निर्देशन में कोई अलग अंदाज-ए-बयां नहीं है।
ये भी पढ़ें - सोनू निगम को लेकर लाइव शो में भिड़े अभिजीत भट्टाचार्य और मौलाना कादरी