चार पीढ़ियों की बेटियों की कहानी
फिल्म ‘लव सितारा’ दरअसल चार महिला किरदारों की कहानी है। घर की मुखिया अमूमां। उनकी दो बेटियां। एक शादीशुदा और दूसरी एक शादीशुदा मर्द संग विवाहेत्तर रिश्तों में। और बड़ी बेटी की एक बेटी जो शादी करने नानी के घर आई है। फिल्म शुरू वहां से होती हैं जहां इस बेटी के गर्भवती होने की बात सामने आती है। लेकिन, डॉक्टर तो कह चुका था कि उसके अंडाशयों में ही गड़बड़ है और उसके मां बनने की संभावनाएं ही नगण्य हैं। तो अब बेटी क्या करेगी? वह अपने बिछड़े दोस्त से फिर से दोस्ती गांठती है। उसे शादी के लिए मनाती है और पहुंच जाती है केरल में अपनी नानी के पास। नानी बिंदास हैं। सेक्स, संभोग और मैथुन उनके लिए गौशाला में गायों के वंश बढ़ाने के साधन मात्र हैं।
बी जयश्री के अभिनय का जादू
शुरू शुरू में फिल्म ‘लव सितारा’ थोड़ी धीमी रफ्तार में चलती दिखती है। शायद यही वजह हो सकती है कि फिल्म चार साल से अपनी रिलीज की राह तकती रही है, और वह भी तब जब इसमें रंगमंच के कुछ बेहतरीन कलाकार हैं। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के 1973 की छात्रा बी जयश्री को परदे पर देखना एक अलग अनुभव है। कन्नड़ सिनेमा के दर्शक उन्हें खूब पहचानते हैं। अभिनेता राजकुमार की फिल्मों में जब माधवी और जया प्रदा जैसी अभिनेत्रियों अभिनय करतीं तो उनकी आवाज बी जयश्री ही हुआ करती थीं। उनके साथ सुधन्वा देशपांडे हैं, संजय भूटियानी हैं, रिजुल रे हैं और तमारा डिसूजा और इखलाक खान की रंगत भी खूब बन पड़ी है। राजीव सिद्धार्थ को भी फिल्म में बड़ा मौका मिला है, और उसे भुनाने की वह पूरी कोशिश करते दिखते हैं।
मां, मौसी और नानी...
लेकिन, फिल्म ‘लव सितारा’ बी जयश्री, उनकी दोनों बेटियां बनी वर्जीनिया रॉड्रिग्स व सोनाली कुलकर्णी और शोभिता धुलिपाला की फिल्म है। तीन पीढ़ियों की ये बेटियां जब क्लाइमेक्स के दृश्यों में एक साथ एक फ्रेम में होती हैं तो क्या ही फ्रेम खिल उठता है, लेकिन इस संगम तक आने से पहले इन तीन पीढ़ियों की चार अलग अलग कहानियों की सच्चाई खुलती है। जो खुशी सच्चाई में है, वह किसी दूसरी बात में नहीं और सच ये भी है कि सच बोलना दुनिया का सबसे मुश्किल काम भी रहा है। शादी वाले घर में शादी के परकोटे से बाहर वाले रिश्ते एक एक कर खुलते हैं। बच्चे के पिता का सवाल आता है, मौसी के प्रेमी का बवाल आता है और नानी के एकाकी जीवन का टपाल जब खुलता है तो फिल्म का असल कमाल सामने आता है।
वंदना कटारिया के निर्देशन का चंदन
दिबाकर बनर्जी की फिल्मों ‘ओए लकी लकी ओए’, ‘शंघाई’ और ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी’ की प्रोडक्शन डिजाइनर रहीं वंदना कटारिया ने फिल्म ‘गली बॉय’ में जोया अख्तर की सहायक बनकर निर्देशन की पगडंडी पकड़ी है। फिल्म ‘लव सितारा’ उनकी पहली फीचर फिल्म है और फिल्म देखने के बाद कहीं से लगता नहीं है कि वह नौसिखिया निर्देशक हैं। खुद प्रोडक्शन डिजाइनर रही हैं तो फिल्म का हर फ्रेम किसी पेंटिंग जैसा लगता है, ऊपर से केरल की लोकेशन। उफ! करिश्मा शर्मा को उन्होंने सारे कलाकारों की पोशाकें दुरुस्त रखने पर लगाया है और जिमॉन लेंकोव्स्की की सिनेमैटोग्राफी के बूते उन्होंने एक दर्शनीय फिल्म बनाने में सफलता पाई है। वंदना के निर्देशन में ताजगी की एक सोंधी सी खुशबू महसूस होती है।
अभिनय के सोने पर शोभिता का सुहागा
तकनीकी टीम की कप्तानी तो वंदना कटारिया ने कुशलता से निभाई ही है, मानवीय संवेदनाओं को अपने किरदारों के जरिये पेश करने में भी वह सौ फीसदी सफल रही हैं। फिल्म की पटकथा थोड़ी और चुस्त होती और किरदारों के आदर्शों का हकीकत से सामना कराने वाले किस्से अगर फिल्म में शुरू से ही एक एक करके पिरोए गए होते तो इसका नतीजा ही कुछ और हो सकता था। कहानी के सारे पत्ते वंदना की राइटिंग टीम यहां फिल्म के आखिरी के 30 मिनट में खोलती है और वहां तक आते आते ही तमाम दर्शकों का धीरज जवाब दे सकता है। फिल्म के गीत-संगीत में रवानी सी तो महसूस होती है, लेकिन इसकी महक फिल्म खत्म होने के बाद तक याद नहीं रह पाती। ये फिल्म देखनी है तो थोड़ा आराम से समय लेकर देखिए। बी जयश्री, सोनाली कुलकर्णी, वर्जीनिया रॉड्रिग्स इस फिल्म में सोने सी चमकी हैं और इन तीनों का सुहागा हैं शोभिता धूलिपाला।