वेब सीरीज ‘लुटेरे’ को सुपर्ण वर्मा और अंशुमान सिन्हा ने एक ऐसी अपराध कथा के रूप में गढ़ा है जिसकी कहानी एक अलग रफ्तार से आगे बढ़ती दिखती है। कहानी का केंद्र बिंदु एक ऐसा कंटेनर है जिसके अंदर की सामग्री की जानकारी दुनिया के सामने आने से मामला बिगड़ सकता है। दूर देश के एक बंदरगाह की राजनीति से ये सीरीज शुरू होती है। वहां रह रहे भारतीय विक्रांत गांधी को फिर से बंदरगाह चलाने वाली समिति का अध्यक्ष बनना है लेकिन मामला उनकी सोची सियासत के हिसाब से आगे बढ़ नहीं पाता है। ऐसे में अगर ये कंटेनर बंदरगाह तक पहुंचा तो मामला बिगड़ सकता है। समुद्री लुटेरों की मदद ली जाती है, इस कंटेनर को ला रहे जहाज को रोकने के लिए लेकिन लुटेरों की अति सक्रियता से मामला बिगड़ जाता है। जहाज का कप्तान अपने स्टाफ को बचाने की तमाम जुगतें लगाता है। स्टाफ भी पूरा अतरंगी है। जहाज पर समुद्री लुटेरों के मुखिया का कब्जा तो हो जाता है, लेकिन उसे अपने ही गैंग के लोगों को संभालना भी कम मुश्किल नहीं है।
हंसल मेहता ने बतौर शोरनर वेब सीरीज ‘लुटेरे’ ऐसा कोई सामाजिक, मानसिक और व्यावसायिक ताना बाना तो नहीं बुना है जैसा कि फिल्म ‘शाहिद’ के बाद उनकी कहानियों में दिखता रहा है लेकिन उन्होंने शामियाना कहानी और कलाकारों की मदद से ठीक ठाक तान लिया है। हिंदी वेब सीरीज के मामलों में वेब सीरीज ‘लुटेरे’ इसलिए देखी जा सकने लायक सीरीज बन सकी है क्योंकि ये दर्शकों को कुछ तो नया परोसती है। निर्देशक के तौर पर जय मेहता ने अपनी समझ और सोच के हिसाब से रोमांच से भरी एक ऐसी सीरीज गढ़ने की कोशिश की है जिसकी प्रेरणा तमाम अंग्रेजी वेब सीरीज से ली गई दिखती है। लेकिन, जय मेहता का निर्देशन दिलचस्प है। वह कलाकारों को सुस्ताने का मौका नहीं देते हैं। कहानी सरपट भागती है। रहस्य की परतें एक एक कर खोलती है। इस लिहाज से लेखकों और निर्देशक का साम्य यहां बनता दिखता है।
कलाकारों में वेब सीरीज में रजत कपूर ही सबसे लोकप्रिय और तुरंत पहचाने जा सकने वाले सितारे हैं। पानी के जहाज की कभी यात्रा न करने वाले रजत कपूर ने अपने किरदार की अंतर्धाराओं को सजगता से जीते हुए इस किरदार को कहीं से भी हल्का नहीं होने दिया है। किरदार की गंभीरता के साथ साथ मौके की नजाकत के हिसाब से वह अपने किरदार के प्रस्तुतीकरण में अच्छा उतार-चढ़ाव लाने में कामयाब रहे हैं। विवेक गोम्बर कहानी के मुख्य किरदार हैं। एक तरह अपने सामाजिक रुतबे और दूसरी तरफ अपनी आपराधिक गतिविधियों से अपने परिवार को दूर रखने की कोशिश करता ये किरदार शुरुआती दृश्यों की अड़चन के बाद अपनी पकड़ बनाने लगा है। सीरीज के आने वाले एपिसोड में विवेक का किरदार किस करवट बैठता है, उस पर सीरीज का उपसंहार टिका रहेगा। बरकत के रूप में बचामेन का अभिनय उनके रंग, रूप और कद-काठी से मदद पाता है। वोरा, सान्याल, खानविलकर आदि कलाकार भी अपनी अपनी जगह अगर कहानी में ढंग से जमे रहे तो सीरीज देखने का मजा हफ्ता दर हफ्ता बना रह सकता है।
वेब सीरीज ‘लुटेरे’ की अपनी कमियां भी हैं। कहानी कहते कहते इसका क्षेपक कथाओं में विस्तार से निकल जाना सीरीज की सबसे बड़ी कमजोरी है। सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक, सिनेमैटोग्राफी और संपादन सामान्य है जबकि ऐसी अपराध कथाओं में इन तीनों का योगदान काफी होता है। डिज्नी प्लस हॉटस्टार की फिल्में और सीरीज जल्द ही जियो सिनेमा पर देखने को मिल सकती हैं और ऐसे में अभी हॉटस्टार पर ऐसी तमाम कहानियों की रिलीज जल्दी जल्दी हो सकती हैं, जिन्हें या तो पूरा कर लिया गया है या जिन्हें रिलायंस द्वारा कंपनी के अधिग्रहण की सूचना के सार्वजनिक होने के आसपास खरीदा गया है।