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Lilo & Stitch Review: मूल फिल्म से तुलना करने में वक्त न गंवाएं, बच्चों के साथ छुट्टियों में ये फिल्म देख आएं

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लीलो एंड स्टिच - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
लीलो एंड स्टिच
कलाकार
माइया कीआलोहा , सिडनी एलिजाबेथ अगुडोंग , क्रिस सैंडर्स , टिया कैरेरे , हैना वाडिंगहैम , कोर्टनी बी. वांस , जज रीनहोल्ड और जैक गैलीफिनेकिस
लेखक
क्रिस केकानिओकलानी ब्राइट और माइक वैन वेज
निर्देशक
डीन फ्लेशर कैंप
निर्माता
जोनाथन एरिक और डैन लिन
रिलीज
23 मई 2025
रेटिंग
2.5/5

फिल्म ‘लीलो एंड स्टिच’ इसी नाम की डिज्नी की साल 2002 में आई एनीमेशन फिल्म की लाइव एक्शन रीबूट फिल्म है। ये  कहानी एक अकेली बच्ची लीलो की है, जो स्टिच नामक एक कुत्ते-जैसे दिखने वाले परग्रही जीव को गोद ले लेती है। उसे यह पता ही नहीं होता कि स्टिच वास्तव में एक विनाशकारी शक्ति के रूप में जेनेटिक रूप से तैयार किया गया एलियन है, जिसे उसके ग्रह की सरकार पकड़ने की कोशिश कर रही है। लीलो एंड स्टिच’ डिज्नी की एक बेहद लोकप्रिय फ्रेंचाइजी रही है। इसके किरदारों पर अलग अलग और अन्य किरदारों के साथ भी फिल्में व वेब सीरीज बनती रही हैं। स्टिच का किरदार बच्चों के बीच अपनी शैतानियों के चलते काफी लोकप्रिय रहा है और इसकी मर्चेंडाइज सबसे ज्यादा बिकने वाली मर्चेंडाइज में भी शामिल रही है।

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लीलो एंड स्टिच - फोटो : अमर उजाला
डिज्नी की एक और लाइव एक्शन फिल्म
डिज्नी ने इधर बीते एक दशक में अपनी ही एनीमेशन फिल्मों को लाइव एक्शन फिल्म के रूप में बदलने की एक अजीब सी जिद पाल रखी है। ऐसा नहीं कि इस सीरीज की सारी फिल्में ही कमजोर रही हों या दर्शकों द्वारा बिल्कुल नकार दी गई हों। आखिर क्लासिक एनिमेटेड फिल्मों को लाइव एक्शन या सीजीआई से बनाने का कुछ तो गणित रहा ही होगा। साल 2017 में ‘ब्यूटी एंड द बीस्ट’ से शुरू हुआ ये सिलसिला साल 2019 में ‘द लॉयन किंग’, साल 2023 में ‘लिटिल मरमेड’ से होता हुआ अब इस साल ‘लीलो एंड स्टिच’ तक आ पहुंचा है। इनमें से ‘द लॉयन किंग’ पर हाथ आजमाना सबसे सफल रहा। लेकिन फिल्म ‘लीलो एंड स्टिच’ उतनी शानदार फिल्म नहीं बन पाई है।

लीलो एंड स्टिच - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इमोशन्स से ज्यादा तकनीक पर जोर
फिल्म ‘लीलो एंड स्टिच’ देखने में एक तकनीकी रूप से परफेक्ट फिल्म दिख सकती है। निर्देशक डीन फ्लेशर कैम्प ने इसमें भावनाएं भी कुछ कुछ वैसी ही रखने की कोशिश की हैं, जैसी कि 2002 की मूल एनिमेटेड फिल्म की थीं, लेकिन बातें और करामातें दर्शकों के दिलों को सीधे छू नहीं पाती हैं। फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है, स्टिच का नया कंप्यूटर ग्राफिक्स अवतार। मूल फिल्म में इसकी आत्मा नटखट है और फिर भी वह एक प्यारा सा, झबरीला सा प्राणी नजर आता है। एल्विस प्रेसले का फैन ये एलियन इस बार भी उथल पुथल तो बार बार मचाता है लेकिन दर्शकों का इन घटनाओं से वैसा जुड़ाव नहीं होता दिखता।

लीलो एंड स्टिच - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
माया कीलोहा ने जीत लिया दिल
फिल्म की सबसे प्यारी बात जो है वह हैं लीलो की भूमिका निभा रहीं माया कीलोहा। अपने नाम के ही अनुरूप दिखने में वह सुंदर और मासूम हैं,लेकिन इस किरदार में जो गुस्सा, अकेलापन और अनूठा पागलपन रहा है, वही फिल्म की जान है। इस बार ये तीनों बातें दबी दबी दबी सी लगीं। जैसे कि लीलो शरारतें भी करेंगी तो अपनी बड़ी बहन नीना से पूछकर। शायद डिज्नी ने डीन को निर्देश दिया हो कि फिल्म के किरदारों को ज्यादा ओवरबोर्ड नहीं जाने देना है और इसी चक्कर में सब कुछ संतुलित करने का हिसाब लगाते लगाते कुछ ज्यादा ही संतुलित हो गया हो। फिल्म में मूल फिल्म के अलावा भी कुछ सीन डाले गए हैं। समंदर की लहरों पर सर्फिंग वाला सीक्वेंस और अच्छा हो सकता था लेकिन मामला वहां भी ज्यादा जमा नहीं।
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लीलो एंड स्टिच - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
काश, बरकरार रह पाए डिज्नी का ओहाना
फिल्म ‘लीलो एंड स्टिच’ न तो ज़्यादा यथार्थवादी होने की कोशिश करती है, न ही अपनी कल्पनाशीलता से भागती है। शायद इसी वजह से यह बाकी रीमेक्स की तुलना में ज़्यादा समय टिकने वाली फिल्म है। हालांकि, बार बार बन रहे एनीमेशन से लाइव एक्शन के इन रीमेक्स को देखकर ऐसा भी महसूस होता है कि डिज्नी एनिमेशन की स्वतंत्रता और भावनाओं की अतिशयोक्ति को धीरे धीरे खो रहा है। सब कुछ रीयल दिखाने की होड़ में ये फिल्में सिनेमाई ‘ओहाना’ यानी कि परिवार, भाव, और पागलपन का संगम को समग्र रूप से दिखाने से चूक भी रही हैं। नाइजल ब्लक की सिनेमैटोग्राफी दर्शनीय है। एडम गर्स्टेल और  फिलिप जे. बार्टेल के संपादन ने फिल्म को चुस्त रखा है। कुल 108 की ये मिनट इसी के चलते बच्चों के साथ वन टाइम वॉच वाली फिल्म बनने में सफल रहती है। फिल्म में अधिकतर गाने मूल फिल्म वाले ही हैं और इसीलिए नॉस्ताल्जिया भी जगाते हैं।
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