फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'खिलाड़ी 786' में एक्शन भी हंसाएगा आपको

Fri, 07 Dec 2012 05:18 PM IST
रोहित मिश्र
विज्ञापन
विज्ञापन
'खिलाड़ी 786' में नायक का नाम है 72, उसके पिता जी का नाम 70,  चाचा का नाम 71 और छोटे बच्चे का नाम 74। संख्याओं का क्रम देखें तो एक संख्या मीसिंग है। दरअसल यह 73 है। 73, 72 का जुड़वां भाई है जो कि एक मेले में गुम हो गया होता है। नाम सुनकर आपको हंसी आई होगी। ऐसा होता भी है।
विज्ञापन


यह फिल्म आपको हंसाती है और जहां आपको लगता है कि हंसने का अंदाज बदलना चाहिए वहां यह आपके लिए 'खिड़की-दरवाजे तोड़' टाइप के एक्शन दृश्य ले आती है। बिल्कुल कॉमिक अंदाज में। 'खिलाड़ी 786' ऐसी फिल्म है जिसका एक्शन भी आपको हंसाता है, कॉमेडी तो खैर हंसाती ही रहती है। फिल्म में खलनायक जैसी कोई चीज नहीं है। अब चूंकि फाइटिंग अपने से विरोधी के साथ ही होगी इसलिए एक ऐसा पात्र चुन लिया गया जो नायक से पिटने के लिए तैयार रहता है।

न तो फिल्म का प्लाट नया है न ही उसका फिल्मांकन। बावजूद इसके यह फिल्म आपको बांधकर रखती है। यह कुरसी पर आराम से पीठ टिकाकर देखने वाली, और ऑडी से निकलकर भूल जाने वाली फिल्म है।
विज्ञापन


कहानी
फिल्म की कहानी नायक 72 (अक्षय कुमार) की है। नायक का परिवार अपनी गुंडागर्दी के लिए पूरे क्षेत्र में बदनाम है। इसलिए नायक की शादी नहीं हो रही होती है। खुद अक्षय कुमार के पिता 70 (राज बब्बर) लंदन की एक मेम से शादी करते हैं। यह समस्या और भी पुरानी है। 72 के दादा ने दक्षिण अफ्रीका और चाचा ने चाइना की लड़की से शादी की होती है।

मनसुख लाल (हीमेश रेशमिया) लोगों की शादियां करवाता है। मुंबई में उसकी मुलाकात अचानक ऐसी लड़की (आसिन) से हो जाती है जो अपने लिए आए हुए हर लड़के को किसी न किसी बहाने ऐन शादी के पहले भगा चुकी होती है। लड़की के बड़े भाई टीटीटी (मिथुन चक्रवर्ती) उसकी शादी के लिए परेशान हैं। मनसुख लाल टीटीटी को एक अच्छा रिश्ता कराने की बात करता है। वह यह रिश्ता 72 के लिए करवा रहा होता है। यह रिश्ता कराने के लिए मनसुख दोनों तरफ थोड़ा-थोड़ा झूठ बोलता है।

मनसुख टीटीटी से कहता है कि लड़के सहित उसका का पूरा परिवार पुलिस में है। अक्षय कुमार का परिवार इस रिश्ते के लिए मान जाए इसलिए वह बताता है कि लड़की का भाई टीटीटी पुलिस में एसपी है। मनसुख के यह बात वाकई नहीं जानता कि 72 का परिवार पुलिस में नहीं है। खैर शादी के लिए दोनों पक्ष मान जाते हैं और 72 का पूरा परिवार एक ट्रक में लदकर मुंबई आ जाता है। कैसे यह झूठ खुलते हैं और झूठ खुलने के बाद भी शादी में क्या-क्या अवरोध आते हैं यही फिल्म की कहानी है। इस बीच आसिन का अपने एक पुराने प्रेमी के साथ अफेयर का भी एक साइड ट्रैक है।

अभिनय
पूरी फिल्म अक्षय कुमार पर टिकी हुई होती है। उनके एक्शन और कॉमेडी दृश्यों पर। दर्शक लंबे समय से अक्षय कुमार को कॉमेडी करते देख रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार का वही स्टाईल देखने को मिला है। एक जैसी ऐक्टिंग करने के बावजूद इसमें कुछ भी बांसीपन नहीं दिखता है। अक्षय कुमार के अलावा मिथुन चक्रवर्ती और हीमेश रेशमिया को लगभग
बराबर फुटेज मिले हैँ।

मिथुन चक्रवर्ती की भूमिका लगभग वैसी ही है जैसी उन्होंने 'हाऊसफुल 2' में निभाई है। उनका खामोश अभिनय अच्छा लगा है। हीमेश रेशमिया जो कि इस फिल्म को प्रोड्यूसर भी हैं इस नए रोल में फ्रेश लगे हैं। कुछ अच्छे संवाद भी हीमेश के हिस्से आए हैं। आसिन की इस फिल्म में कमजोर भूमिका है। उनके पास करने के लिए ज्यादा कुछ नहीं था, हां फिल्म के हर गाने में वह नजर जरूर आई हैं। तब भी जब नायक उनसे मिला भी नहीं होता है।

छोटी भूमिकाओं में संजय मिश्रा, राज बब्बर, मुकेश ऋषि और राहुल सिंह भी ठीकठाक रहे हैं। छोटे परदे के कई हास्य कलाकार फिल्मों में जाते रहे हैं। इस फिल्म से भारती सिंह की फिल्मों में एंट्री हुई है, जो कि औसत से भी नीचे लगी हैं।

निर्देशन
कई कॉमेडी फिल्मों में रोहित शेट्टी को असिस्ट कर चुके आशीष आर मोहन की निर्देशक के रूप में यह पहली फिल्म है। अपनी पहली फिल्म में आशीष ने हिट कॉमेडी फिल्मों के कई अच्छे टुकडों को सजाकर एक बुके बनाने की कोशिश की है। 'खिलाड़ी 786' शुद्घ रूप से कॉमेडी फिल्म है। एक्शन के दृश्य सिर्फ बीच-बीच में मन बहलाने के लिए डाले गए हैं।

एक्शन के दृश्यों को जानबूझ कर जंग की तरह नहीं दिखाया गया। एक्शन इस तरह से डिजाइन किया गया है कि आपको एक्शन भी कॉमेडी लगे। कॉमेडी फिल्में आमतौर पर प्लाट बनाने के बाद हंसाना शुरू करती हैं। प्लाट बनने के यह शुरुआती 25-30 मिनट बोरिंग होते हैं। 'खिलाड़ी 786' इस मायने में बेहतर फिल्म है। फिल्म का ताना-बाना इस तरह से बुना गया है कि कहानी 15 से 20 मिनट में ट्रैक में आ जाती है।

 राज बब्बर, संजय मिश्रा और जॉनी लीवर जैसे किरदारों के साथ ओवरऐक्टिंग की समस्या होती है। इस फिल्म में इनकी ओवरऐक्टिंग भी कंट्रोल करने की कोशिश सफल दिखती है। फिल्म का क्लाइमेक्स थोड़ा बेहतर हो सकता था। निर्देशक को रोहित शेट्टी के बजाय प्रियदर्शन की फिल्मों से प्रेरित होना चाहिए था।  

संगीत
फिल्म के गाने अच्छे हैं। फिल्म के संगीत निर्देशक हीमेश रेशमिया ने प्रयास किया है कि हर गाना एक अलग अंदाज में गाया जाए। 'बलमा' गीत फिल्म का सबसे बेहतरीन ट्रैक है। सुनिधि चौहान की आवाज सुनने में अच्छी लगी है। इस गाने के फिल्मांकन में पता नहीं क्यों संगीतकार आरडी बर्मन की फोटो बार-बार स्क्रीन में जूम होती रहती है।

 हीमेश रेशमिया ने गाने भी गाए हैं। 'हुक्का मार' और 'लोनली लोनली' गाना उन्होंने ही गाया है।  'लांग ड्राइव पे चल', 'सारी सारी रात' और 'खिलाड़ी भईया' गाने बहुत अच्छे नहीं है पर वह फिल्म की गति को नहीं रोकते।
विज्ञापन


क्यों देखें
एक ऐसी फिल्म जो आपको हंसाने के साथ-साथ रजनीकांत वाले एक्शन का मजा भी देगी। एक लात मारने पर जीप को चकनाचूर होते देखना भी एक अलग किस्म का मजा है।

क्यों न देखें
यदि आप इस बात के गणित में उलझने पर विश्वास करते हों कि एक घूंसे पर आदमी दस फुट कैसे उछल सकता है। साथ ही एक गुंडा पुलिस की ऐक्टिंग कैसे कर सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें