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Ishq E Nadaan Review: तू यूं न गुजराकर तन्हा गलियों से मेरी, तेरी आजाद हंसी की आदत हो जाएगी

Sat, 15 Jul 2023 01:28 PM IST
निधि पाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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इश्क ए नादान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
इश्क ए नादान
कलाकार
मोहित रैना , लारा दत्ता , कंवलजीत सिंह , नीना गुप्ता , श्रिया पिलगांवकर , सुहैल नैय्यर और मृणाल दत्त आदि
लेखक
सुदीप निगम
निर्देशक
अविषेक घोष
निर्माता
ज्योति देशपांडे , अविषेक घोष और मनीषा डब्ल्यू
ओटीटी
जियो सिनेमा
रिलीज
14 जुलाई 2023
रेटिंग
3/5

हर इंसान को जिंदगी दूसरा मौका जरूर देती है, लेकिन उसे समय पर फैसला लेना जरूरी है। लेकिन अक्सर हम यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि लोग क्या कहेंगे? इसी सोच के तहत हम अपनी महत्वाकांक्षा और इच्छाओं को दबाकर रखते हैं। और, अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं। फिल्म 'इश्क ए नादान' की पूरी कहानी का सार इसी में छिपा हुआ है। इश्क उम्र के किसी भी पड़ाव पर किसी से भी हो सकता है, लेकिन अपनी उम्र और सामाजिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए हम उसे अपने मन में दबाकर रखते है। कई बार ऐसा भी होता है कि अपने दिल की बात किसी से कह भी नहीं पाते हैं। यह फिल्म एक भावनात्मक यात्रा है जिसमें दोस्ती और प्यार को एक अलग नजरिए से पेश किया गया है। 

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इश्क ए नादान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म की कहानी मुख्य रूप से तीन जोड़ों की है। चारुलता मुंबई में अपनी बेटी मीनू से मिलने जाती है जहां उसकी मुलाकात पूर्व फिल्म निर्देशक सुभाष कपूर से होती है। आशुतोष अपनी पत्नी के निधन के बाद से किसी अन्य महिला के साथ घर बसाना नहीं चाहता है। उनकी मुलाकात जब रमोना सिंह से होती है तो वह उसकी तरफ आकर्षित होता है। अमेरिका से मुंबई लौटी सिया को पता चलता है कि वह गर्भवती है। वह अपने होने वाले बच्चे के पिता राघव से मिलने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि दोनों शादीशुदा नहीं हैं। इन कहानियों में बनने वाले त्रिकोण पर ही है फिल्म 'इश्क ए नादान'।

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इश्क ए नादान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'इश्क ए नादान' के हर रिश्ते में एक दूसरे के प्रति विश्वास और सम्मान दिखाया गया है। यही उम्रदराज लोगों की प्रेम कहानी की खासियत भी होती है। जब सुभाष कपूर को पता चलता है कि चारुलता का एक अतीत है तो चारुलता के प्रति उसके दिल में जो प्रेम की भावना, दोस्ती में बदल जाती है। वहीं आशुतोष को जब पता चलता है कि रमोना सिंह समलैंगिक है तो उसके प्रति उनके मन में नफरत की भावना नहीं आता है। वह रमोना सिंह को समझाता है कि लोगों के डर से अपने रिश्ते को क्यों छिपाकर रखा जाए? रमोना सिंह कामयाब बिजनेस लेडी है और वह अपनी दोस्त भैरवी से छुप छुप कर मिलती है। आशुतोष के समझाने पर रमोना सिंह, भैरवी के साथ अपने रिश्ते को खुलकर स्वीकार करती है। पीयूष भले ही सिया से प्यार करता है, लेकिन वह सिया और राघव को एक साथ जोड़ने की कोशिश करता है। उसके प्रेम में समर्पण का भाव नजर आता है। 

इश्क ए नादान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

निर्देशक अविषेक घोष ने ऐसे  संवेदनशील विषय को फिल्म में बहुत ही स्वाभाविक तरीके  के साथ पेश किया है। फिल्म में प्यार और दोस्ती की खोज इस फिल्म की  मूल ताकत है। फिल्म के लेखक सुदीप निगम ने  हृदयस्पर्शी कहानी को बहुत ही सम्मोहक तरीके से लिखा है। हालांकि, फिल्म को कसी हुई बनाए रखने के लिए कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था। फिल्म के कुछ दृश्य पूर्वानुमानित लगते हैं, जिससे  भावनात्मक क्षणों का प्रभाव कम हो जाता है। बावजूद इसके यह फिल्म  प्यार, दोस्ती की शक्ति और हमारे जीवन में सार्थक संबंधों को संजोने के महत्व की याद दिलाती है।

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इश्क ए नादान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म में  नीना गुप्ता ने चारुलता का किरदार निभाया है। चारुलता एक विधवा औरत है, जो विस्थापन की भावना और अकेले होने के डर से जूझती है। नीना गुप्ता की चारुलता की भूमिका में असुरक्षा और उद्देश्य के प्रति लालसा का चित्रण मार्मिक और प्रासंगिक दोनों है। रमोना सिंह के किरदार में  लारा दत्ता ने एक  सफल व्यवसायी महिला के किरदार को  बखूबी निभाया है। लारा दत्ता का यह ऐसा किरदार है  जो वास्तविक संबंधों के लिए तरस रही है। इस किरदार को लारा  दत्ता बड़ी सहजता से निभाया है। आदित्य की भूमिका  में मोहित रैना फिल्म के खास आकर्षण हैं। फिल्म में उनके संवाद प्रभावित करते ही है साथ ही उनकी कविताओं को पढ़ने का भी अंदाज बहुत निराला है। मसलन 'तू यूं न गुजराकर तन्हा गलियों से मेरी, तेरी आजाद हंसी की आदत हो जाएगी'। सुभाष कपूर की भूमिका में कंवलजीत सिंह, सिया की भूमिका में श्रिया पिलगांवकर और पीयूष की भूमिका सुहैल नैय्यर का अभिनय भी प्रभावशाली रहा। 

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