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Heretic Movie Review: क्या होगा जब धर्म प्रचारकों का हो कुतर्कों से सामना? हॉरर में ए24 का एक और नया प्रयोग

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हेरटिक फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
हेरटिक
कलाकार
ह्यू ग्रांट , सोफी थैचर और क्लोए ईस्ट आदि
लेखक
स्कॉट बेक और ब्रायन वू्ड्स
निर्देशक
स्कॉट बेक और ब्रायन वूड्स
निर्माता
स्टैसी शेर , जुलिया ग्लाउसी , जिएनेट वॉलटर्नो , स्कॉट बेक और ब्रायन वूड्स
रिलीज
13 दिसंबर 2024 (भारत), 8 नवंबर 2024 (अमेरिका)
रेटिंग
3/5

हेरटिक, अंग्रेजी की व्याकरण में समझें तो ये एक संज्ञा है। एक ऐसा पुरुष जिसके धार्मिक विश्वास गलत या शैतानी प्रवृत्ति के माने जाते हैं। विधर्मी या अधर्मी भी उसे कह सकते हैं। अंग्रेजी में कई बार ऐसे लोगों के लिए एथीस्ट शब्द का भी प्रयोग किया जाता है। उनके पास धर्म के विरुद्ध तर्कों का पूरा तरकश होता है। लेकिन, धर्म है क्या? तेजी से दक्षिणमुखी हो रही हमारी दुनिया में धर्म पर आधारित सिनेमा सिर्फ भारत में ही बनना तेज नहीं हुआ है, पश्चिम में भी धर्म की पड़ताल चल रही है। कोई धर्मावलंबी ईसाई इस फिल्म को देखेगा तो इसे बनाने वालों को कोसता ही नजर आएगा, लेकिन धर्म को तटस्थ होकर उसके जीवन उद्देश्य को समझने वाले को इस फिल्म में एक अलग अनुभूति होगी। इसमें डर भी है लेकिन बौद्धिक धरातल वाली डरावनी फिल्में कितनी देखी होंगी आपने? बस इसी सवाल के जवाब में फिल्म ‘हेरटिक’ की सफलता छुपी है।

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हेरटिक फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
डर का नया धरातल तलाशती फिल्म
फिल्म ‘हेरटिक’ उन हॉरर फिल्मों की श्रृंखला की नई कड़ी है जिसमें डरावनी फिल्मों के लिए नए धरातल तलाशे जा रहे हैं, नई पृष्ठभूमियां तैयार हो रही हैं। वातावरण ही असली किरदार यहां भी है लेकिन यहां डराने के लिए भूत-प्रेत से ज्यादा इंसान काम कर रहा है। धर्म की बातें विश्वास पर आधारित होती हैं। और, विश्वास कैसे बनता है? क्या उन बातों को मानने से, जो हमें बचपन से सिखाई जाती हैं। या फिर उस डर से जिसके बारे में बताकर अक्सर भक्तों को ‘भगवान’ के करीब लाया जाता है। कॉरपोरेट दुनिया में डर को किसी भी प्रोडक्ट का सबसे बड़ा ब्रांडिंग टूल माना जाता है। आयोडीन वाला नमक नहीं खाओगे तो घेंघा रोग हो जाएगा, एक लाइन के इस डर ने आज से 50 साल पहले 25 पैसे किलो वाले टोर्रा नमक के स्थान पर दो रुपये किलो वाले पैकेट नमक की स्थापना कर दी। ये डर बिक गया तो फिर आया नया डर, ज्यादा आयोडीन खाओगे तो बीमार हो जाओगे। और, फिर बिकने लगा लो आयोडाइज्ड नमक! है ना डर का दिलचस्प कारोबार?

हेरटिक फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
समझिए धर्म के 10 लक्षण
ह्यू ग्रांट की हॉलीवुड सिनेमा में अपनी एक खास इमेज रही है। वह मुस्कुराते हैं तो लगता है फूल झड़ रहे हैं। बातचीत का उनका संभ्रांत लहजा और उनकी देहयष्टि का आकर्षण बार बार परदे पर साबित होता रहा है। लेकिन, यहां फिल्म ‘हेरटिक’ में वह यहूदियों से लेकर मुसलमानों और ईसाइयों के धर्मग्रंथों से उपजे विश्वास की तुलना पीढ़ी दर पीढ़ी बदलते गए बोर्ड गेम से करते नजर आते हैं। बाबाओं की उत्पति का भी वह खासा दिलचस्प नजरिया पेश करते हैं और उसे ले जाकर जोड़ देते हैं ‘स्टार वार्स’ के किरदार से। यहां देखना ये रोचक है कि हिंदू धर्म के बारे में फिल्म का ये किरदार कुछ नहीं कहता (ये मुझे बाद में पता चला कि फिल्म मे कृष्ण के प्रसंग वाला हिस्सा देश के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने हटा दिया है)। ख़ैर, धर्म के जो 10 आधार- धृति, क्षमा, दम, अस्तेय, शौच, इंद्रियनिग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध- सनातन धर्म में बताए गए हैं, वही तकरीबन उसके बाद आए हर धर्म में हैं और इन्हीं 10 लक्षणों से होकर गुजरती दिखती है फिल्म ‘हेरटिक’।

हेरटिक फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जीवन दर्शन है, या प्रपंच है, क्या है ये?
दो नन अपनी दैनिक दिनचर्या पर निकली हैं। फिल्म शुरू होती है दोनों के उस बेंच पर हो रहे उस वार्तालाप से जिसके पृष्ठ पर लिखा है, ‘बड़ा है तो बेहतर है।’ इनकी बात इनके किरदार से बिल्कुल विरोधाभासी है, बहुत बाद में फिल्म के क्लाइमेक्स में इनमें से एक के हाथ से जब गर्भ निरोधक इम्प्लांट निकलता है तो इस पहले सीन का संदर्भ समझ आता है। खैर, ये दोनों नन वीराने में बने एक ऐसे घर में पहुंची हैं जिसमें रहने वाले को उन्हें धार्मिक बनाना है। ये शख्स कहता तो है कि उसकी पत्नी भी घर में है लेकिन दोनों नन को जल्द ही समझ आ जाता है कि ऐसा है नहीं। दोनों वहां से निकलने की जितनी कोशिश करती हैं, उतनी ही वह उस जाल में फंसती जाती हैं, जिसे इस शख्स ने बहुत चतुराई से अपने तर्कों, अपने संवादों और अपने उपदेशात्मक विचारों से गढ़ा है। जो कुछ असल में होता दिख रहा है, उसका एक मिनिएचर भी उसके कमरे में बना दिखता है। भ्रम ये होता है कि जो दिख रहा है, वह कहानी है, या खेल है? धर्म सत्य है और इसका प्रपंच एक ऐसा खेल जैसा यहां खेला जा रहा है। और, फिर बटरफ्लाई थ्योरी! पता है आपको इसके बारे में? हां या नहीं दोनों, सूरत में ये फिल्म आपको हॉरर का एक नया सा अनुभव कराएगी। 

हेरटिक फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

ह्यू ग्रांट ने डराकर भी जीते दिल
फिल्म ‘हेरटिक’ का पूरा करिश्मा ह्यू ग्रांट की अदाकारी में टिका है। हॉलीवुड फिल्मों ‘नॉटिंग हिल’, ‘लव एक्चुअली’, ‘वोंका’ और ‘अनफ्रॉस्टेड’ को देखने वाले समझते हैं कि परदे पर ह्यू को देखना कितना अलग व्यू किसी भी सिनेमा को दे सकता है। वह खुद कह चुके हैं कि खलनायकी उनको भाती है। ऐसे में उन्हें एक डरावनी फिल्म में शैतानी भूमिका निभाते हुए देखना बहुत दिलचस्प है। उनके साथ क्लोए ईस्ट और सोफी थैचर मिशनरी की तिकड़ी, शुरू में तो लगता है कि नहीं जम पाएगी लेकिन, जैसे जैसे फिल्म फर्स्ट एक्ट से आगे बढ़ती है, तीनों का एक तूफानी रात में एक घर में होना कौतूहल और डर एक साथ जगाने लगता है। 
‘द लेयर ऑफ़ द व्हाइट वर्म’ में ह्यू ग्रांट की भूमिका जिनको याद होगी, उन्हें ये भी पता होगा कि एक हैंडसम विलेन कितना खतरनाक होता है। 

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हेरटिक फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बेक और वुड्स की जोड़ी फिर चैंपियन
फिल्म को उन्हीं बेक और वुड्स ने लिखा और निर्देशित किया है, जिनके खाते में अब तक ‘ए क्वाइट प्लेस’ ‘हंट’, ‘नाइटलाइट’ और ‘स्प्रेड’ जैसी लीक से इतर फिल्में शामिल हो चुकी हैं। फिल्म निर्माता कंपनी ए 24 का एक ब्रांड दुनिया भर में नए जमाने के हॉरर शौकीनों के बीच विकसित होता जा रहा है और फिल्म ‘हेरटिक’ इस ब्रांड को और मजबूत ही करती है। बेक और वुड्स को अपनी इस फिल्म में सिनेमैटोग्राफर चुंग चुंग हून की कल्पनाओं का अच्छा साथ मिला है, जस्टिन ली का संपादन चुस्त होता तो क्या ही बात होती। और, हां फिल्म में क्रिस बेकन का दिया म्यूजिक बिल्कुल हॉरर फिल्म जैसा नहीं है, ये फिल्म का प्लस प्वाइंट है या माइनस प्वाइंट, ये आप फिल्म देखकर बताएइए। 

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