फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रमन राघवः बांबे वेलवेट का पाप धोकर ऊंचे उड़े अनुराग कश्यप

Fri, 24 Jun 2016 12:43 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन
विज्ञापन
निर्माताः फैंटम फिल्म्स
विज्ञापन

निर्देशकः अनुराग कश्यप
सितारेः  नवाजुद्दीन सिद्दिकी, विक्की कौशल, सोभिता धूलिपाला, अमृता सुभाष
रेटिंग ****

आजकल यह कहने का फैशन है कि कुछ भी सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट नहीं होता। सब कुछ इनका मिश्रण ग्रे यानी धूसर है। असल में यह कहना सुविधाजनक है। ऐसा कहते हुए आप धुंधले घेरे में होते हैं, जहां कोई आपके बारे-बारे में मुकम्मल राय नहीं बना सकता। लेकिन निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म रमन राघव 2.0 के दोनों मुख्य पात्र इससे जुदा हैं। आप शुरू से अंत तक उन्हें पारदर्शी ढंग से देख सकते हैं, वह भी तब जब उनके किरदारों से लेकर परिस्थितियों तक में अंधकार भरा है।

यह ऐसा डार्क सिनेमा है जिसमें रोशनी की किरण नहीं है। इंसानियत के मीटर की सुई शून्य पर अटकी है और रिश्ते रसातल की अनंत गहराई में डूब रहे हैं। यहां खून की खुशबू है जो अगर आपको पसंद हो तो बइंतहा आनंद देती है। विश्वास कीजिए कि अगर आपका मन दुविधाग्रस्त नहीं है तो हत्या भी बलि और वध की तरह पवित्र है। अनुराग इस फिल्म में अपने सहज अंदाज-ए-बयां के साथ एक सिक्के दो पहलुओं की कहानी कहते हैं।
विज्ञापन


यहां रमन में रावण की ध्वनि है और हर युग की तरह समाज को उससे बचाने की कोशिश में लगा दुविधाग्रस्त राघव भी है। अनुराग ने 1960 के दशक में मुंबई के सीरियल किलर रमन राघव से प्रेरित होकर अपनी कहानी रची है। जिसमें रमन (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) और राघव (विक्की कौशल) अलग-अलग शख्स हैं। रमन एक के बाद एक हत्याएं कर रहा है, वहीं राघव पुलिस अधिकारी है जो हत्यारे को पकड़ना चाहता है। लेकिन यह राघव आदर्श का पुतला नहीं है। ड्रग्स और औरतें उसकी जिंदगी का हिस्सा हैं। इस तरह से यह फिल्म मूल रमन राघव का नया मॉडल (2.0) है।
विज्ञापन

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फिर कमाल किया है

- फोटो : getty images
यह फिल्म अनुराग के उन प्रशंसकों के लिए है, जो उनकी रचनात्मक वापसी का इंतजार कर रहे थे। रमन राघव 2.0 उन दर्शकों के लिए भी है जिनकी दिलचस्पी जिंदगी के डार्क डिब्बों को खोल-खोल कर देखने में है। अनुराग मानव मन के अंधेरे कोनों को शिद्दत से पहचानते और रचते हैं। वह तटस्थ ढंग से इन्हें आपके सामने रख कर दूर हो जाते हैं। एक अच्छा रचनाकार यही करता है। यहां वह सिनेमा और समाज में तथाकथित क्रांति का हंगामा खड़ा नहीं करते। फिल्म में गालियां हैं, अपशब्द हैं, गंदी बातें हैं लेकिन यह सब कहानी और किरदारों में रचा-बसा है।

कुछ संवाद आकर्षक हैं। रमन राघव 2.0 हिंदी के डार्क सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। जिनकी दिलचस्पी इंसानी किरदारों और जिंदगी के ब्लैक एंड व्हाइट में है, उन्हें रमन-राघव को देखना चाहिए। फिल्म की कमजोरी बैकग्राउंड म्यूजिक है। कई जगहों पर यह एकता कपूर के सीरियलों जैसा लाउड है, जबकि मुख्य किरदार के रूप में नवाजुद्दीन सिद्दिकी आवाज ऊंची किए बगैर असर छोड़ते हैं! यहां गीत भी खलल पैदा करते हैं। इन बातों को नजरअंदाज करें तो पूरी फिल्म पर अनुराग कश्यप की पकड़ है और क्राफ्ट यहां खूबसूरती से उभरकर आता है।

नवाज फिल्म देखने की एक और अनिवार्य वजह हैं। निःसंदेह उन्होंने हिंदी सिनेमा में अभिनय को नई ऊंचाई दी। उनका यह रोल एक और मील का पत्थर है। रमन बन कर फिल्म में वह जितना ब्लैक पर चले हैं, उनका ऐक्टर उतना ही व्हाइट होकर चमका है। विक्की कौशल ने अपनी भूमिका सजह ढंग से निभाई है। हालांकि उसमें पंख खोलने के ज्यादा मौके नहीं मिले। सोभिता धूलिपाला की यह पहली फिल्म है और उनके किरदार का ग्राफ विस्तृत नहीं है। जबकि अमृता सुभाष सीरियल किलर की बहन के रोल में अपना काम सही अंदाज में कर जाती हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें