-आई लव यू! ढाई आखर के ये तीन शब्द अंग्रेजी में जब कोई किसी से कहता है तो वाकई उसके मायने मासूम-सीधे-सरल-सादे-सच्चे होते हैं? निर्देशक लव रंजन की फिल्म प्यार का पंचनामा 2 बताती है कि कतई नहीं। चंचल आंखों, लहराते बालों, रंगीन होठों और सुंदर चेहरे के पीछे की हकीकत कुछ और होती है।
वैसे किसी विद्वान ने प्यार को लेकर कहा है कि अगर आप शहद की तलाश में निकलेंगे तो मधुमक्खियों के डंक झेलने का खतरा भी उठाना पड़ेगा! 2011 में आई प्यार का पंचनामा नए जमाने का त्रिया चरित्र था। लव उसका सीक्वल लाए हैं। पहली फिल्म देख कर लोग हंसे थे। मनोरंजन के लिए यह भी आपको उसी अंदाज में देखनी होगी।
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नौकरीपेशा जवान अपनी रूखी-सूखी जिंदगी में शहद की तलाश कर रहे हैं
सीक्वल में भी तीन नौकरीपेशा जवान अपनी रूखी-सूखी जिंदगी में शहद की तलाश कर रहे हैं। अंशुल (कार्तिक) को एक पार्टी में रुचिका (नुसरत) मिलती है, तरुण (ओमकार) जिम में कुसुम (इशिता) पर आसक्त होता है और एक शादी में सिद्धार्थ (सनी) की मुलाकात सुप्रिया (सोनाली) से होती है।
फिल्म तत्काल रफ्तार पकड़ती है और इश्क के खुशनुमा शुरुआती पल बीतने के साथ बैकग्राउंड में गाना बजने लगता है बंध गया पट्टा देखो बन गया कुत्ता...! देखते-देखते प्यार की तस्वीर पर खरोंचे पड़ने लगती है। आगे कुछ और ही दृश्य सामने आते हैं। सवाल उठता है कि क्या यही प्यार है?
प्यार का पंचनामा 2 अपनी प्रीक्वल से अलग कुछ नहीं कहती। कहानी का ट्रेक भी पुराना है। लड़कियां मतलब के लिए प्यार करती हैं! लड़के बेचारे भोले हैं! लड़कियों के जुल्मों के सताए! फिल्म उस युवा समाज की बात करती है जिसमें हर शाम पार्टी-शार्टी करने की कूवत है। जो लाखों में कमाता है।
जिंदगी में किसी बड़े उद्देश्य के अभाव में खुद को लुटाता है। सीक्वल में पिछली फिल्म की तुलना में नए उतार-चढ़ाव या नई समस्याएं नहीं हैं। अगर आपने प्यार का पंचनामा देखी है और कुछ फ्रेश पाने की उम्मीद से सीक्वल देखने जाएंगे तो निराश होंगे।
इसे देख कर आशिक प्यार की कल्पना से भी दूर रह सकते हैं
वैसे भी सीक्वल का पहला टीजर आपने देखा हो तो जानते होंगे कि निर्देशक ने साफ कहा है, ‘ये उन *** के लिए है जिन्हें पहली बार में बात समझ नहीं आई।’ एक तरह से यह पंचनामा देसी आशिकों के लिए ‘सावधान इंडिया’ है। इसे देख कर आशिक प्यार की कल्पना से भी दूर रह सकते हैं।
फिल्म में ताजगी न हो लेकिन इतना जरूर है कि दृश्य और चटपटे संवाद दर्शक को बांधे रखते हैं। यहां तीखी-चुटीली भाषा से लेकर अंग प्रदर्शन, बिकनी तथा अंतरंग दृश्य मौजूद हैं। सभी अभिनेताओं ने अपने-अपने किरदारों को बखूबी जीया है।
संगीत पक्ष जरूर कमजोर है। वह बढ़िया होता तो मजा बढ़ जाता। अगर आपने पहली फिल्म नहीं देखी या फिर पहली बार में बात आपको न समझ आई हो तो फिल्म आपके लिए है। ...और अंत में, जो गर्लफ्रेंड के साथ फिल्म देखने की योजना बना रहे हैं वे अपनी जिम्मेदारी पर जोखिम मोल लें।