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फिल्म समीक्षा/वन नाइट स्टैंड: सनी लियोनी का काम बोला, पर सीन नहीं पाए बांध

Fri, 06 May 2016 05:03 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
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निर्माताः फुरकान खान-प्रदीप शर्मा
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निर्देशकः जैस्मीन मोजेज-डिसूजा
सितारेः सनी लियोनी, तनुज विरवानी, नायरा बनर्जी
रेटिंग *1/2

इस फिल्म के नाम में कहानी छुपी है। वन नाइट स्टैंड। किसी के साथ एक रात गुजारना। फिल्म का हीरो इवेंट मैनेजर है। हैंडसम है। लड़िकयों को आकर्षित करने का हर गुर उसे पता है। एक इवेंट में उसे हीरोइन दिखती है और देखते-देखते उसकी बांहों में चली आती है। कहानी बढ़ने के साथ पता चलता है कि हीरो शादीशुदा है और हीरोइन भी...!

निर्देशक जैस्मीन मोजेज-डिसूजा की यह पहली फिल्म है। जिसे उन्होंने कामुक-थ्रिलर के रूप में पेश किया है। लेकिन फिल्म दोनों मापदंडों पर निराश करती है। दृश्य ऐसे नहीं हैं कि दर्शक सीट से न हिलें और रोमांच पूरी तरह से गायब है।वन नाइट स्टैंड के हीरो तनुज विरवानी सीनियर अभिनेत्री रति अग्निहोत्री के बेटे हैं। फिल्म का मुख्य भार उन्हीं के कंधों पर है, मगर वह किसी भी सीन में इतने मजबूत नहीं दिखते कि उन पर विश्वास हो सके।
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29 बरस के तनुज और 34 बरस की सनी की उम्र का फर्क परदे पर साफ दिखता है। एक रात के संबंध में युवती के प्यार में दीवाने होने वाले हीरो की कहानी इसलिए नहीं बांधती क्योंकि निर्देशक के पास कहने को कुछ रोचक नहीं था। घूम-फिर कर दृश्य हीरो के घर-दफ्तर में तनाव में रहने, उस रात वाली युवती के बारे में सोचने और शराब पीने का ही रचा गया है। सनी जरूर पत्नी तथा एक बच्चे की मां के रूप में अपनी अन्य फिल्मों अलग दिखी हैं लेकिन इस हिस्से वह इतनी निष्क्रिय हैं कि उनकी मौजदूगी का पता ही नहीं चलता। कहानी के केंद्र से वह लापता हो जाती हैं।
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कहानी दर्शकों को ऐसा झटका देती है कि, ये क्या!

निर्देशक के पास वन नाइट स्टैंड के बाद थ्रिल का कोई मसाला नहीं था। थ्रिल के नाम पर हीरो नायिका को बार-बार फोन लगाता है। अंतः में नायिका ही हीरो से कह देती है कि अगर तुम्हें लगता है कि मेरे पति को उस रात की बात बताने की धमकी देकर ब्लैकमेल करोगे, तो तुम गलत हो। मैं ही पति को सब बता दूंगी। फिल्म के आखिरी पलों में नायिका की आवाज सुनाई देती है, जो अपनी पति से कह रह है, ‘आदि, मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं...।’ द एंड।

दर्शक हैरान रह जाता है कि ये कैसे मोड़ पर कहानी धोखा दे गई!! सनी लियोनी का बॉलीवुड करिअर शुरू से सेक्स और कामुकता संबंधी कहानियों के सहारे कभी कम कभी ज्यादा चल रहा है। कुछ और फ्लॉप फिल्मों तक वह ऐसे ही चलेगा। मगर तनुज को गंभीरता से सोचना चाहिए। वह नए हैं।

सिनेमा में इधर खूब विविधता है। इसका लाभ उन्हें उठाना चाहिए। तनुज की पत्नी के रूप में नायरा बनर्जी ने अपना काम ठीक ढंग से निभाया है। गीत-संगीत कमजोर है। फिल्म और कहानी पर जैस्मीन मोजेज-डिसूजा की पकड़ नहीं दिखती। उनकी प्रतिभा शायद अगली फिल्म में निखर कर आए।

वन नाइट स्टैंड देखते हुए एहसास होता है कि यह कथानक भट्ट कैंप के ज्यादा माकूल था। वह संभवतः इसे अच्छे संगीत/बेहतर किरदारों/कुछ रोचक ट्विस्ट एंड टर्न के साथ प्रस्तुत कर पाते। खैर, जो बीत गई सो बात गई।
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