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Film Review: रोमांटिक ह्यूमर को पंचर कर देती है 'मेरी प्यारी बिंदू'

Fri, 12 May 2017 01:55 PM IST
रवि बुले
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'मेरी प्यारी बिंदू' फिल्म रिव्यू
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निर्माताः आदित्य चोपड़ा-मनीष शर्मा
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निर्देशकः अक्षय रॉय

सितारेः आयुष्मान खुराना, परिणीति चोपड़ा

रेटिंग **1/2

नाकाम होते हुए लेखक सफलता की तलाश में अक्सर अतीत में डुबकी लगाते हैं। शायद वहां कुछ ऐसा मिले जो फिर से ऊंचाइयों पर पहुंचा दे। 'मेरी प्यारी बिंदु' के मुंबई में रहने वाले सफल उपन्यासकार अभिमन्यु (आयुष्मान खुराना) की भी यही स्थिति है। दस साल से वह कुछ बढ़िया नहीं लिख पाया है और पब्लिशर संतुष्ट नहीं हैं। तब वह अपने बचपन में लौटता है। जहां कोलकाता और पड़ोस में रहने वाली नन्हीं बिंदु है, जिसके साथ समोसे-चटनी और फिल्मी गानों के साथ दोस्ती शुरू हुई थी। जो किशोर, फिर युवा होते अभिमन्यु के एकतरफा प्यार में बदल गई थी।

फिल्म कभी आगे, कभी पीछे वाले अंदाज में चलती है और बीच-बीच में टेप रिकॉर्डर/कैसेट वाले 1980-90 के दशक के बॉलीवुड गाने बजते है, जो अभिमन्यु और बिंदु की जिंदगी के खास पलों को रेखांकित करते हैं। कुछ मौकों पर कहानी में प्यार और रिश्तों के तिकोन-चौकोन से खिंचाव और दोहराव जैसा भी मालूम पड़ता है।
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ह्यूमर में ऐसे पंच नहीं हैं जो हंसा सकें

'मेरी प्यारी बिंदू' फिल्म रिव्यू
बीते कुछ दशकों में प्यार और दोस्ती का घालमेल बहुत रहा है। निर्देशक अक्षय रॉय की यह फिल्म प्यार की जगह दोस्ती की बातें ज्यादा करती है। रोमांस एक तरफा और ठंडा टाइप का है। हीरो-हीरोइन जिंदगी की अलग-अलग राहों पर चलते हुए, एक मोड़ पर फिर मिलते हैं। तब लगता है कि अब शायद कुछ बॉलीवुड कहानियों जैसा ही होगा। मगर इस लिहाज से फिल्म अलग है।

डिफरेंट-इंटेलिजेंट श्रेणी की महानगरीय कहानियां, बातों-रिश्तों के मैट्रो अंदाज अगर आप पसंद करते हैं तो यह फिल्म थोड़ा बहुत संतोष दे सकती है। अन्यथा ऊब भी पैदा कर सकती है। इसके ह्यूमर में ऐसे पंच नहीं हैं जो हंसा सकें। अतः यह ऐसी रोमांटिक-कॉमेडी नहीं है, जो कोमल एहसास पैदा करके गुदगुदाती है। बचपन का प्यार एक मोड़ पर देवदासनुमा प्यार जैसा लगता है।

आयुष्मान ने जरूर बढ़िया अभिनय किया है। इससे पहले 'विक्की डोनर' और 'दम लगा के हइशा' में भी वह प्रतिभा दिखा चुके हैं। परिणीति जरूर कहीं-कहीं चौंकाती हैं परंतु अब भी लंबी रेस वाली बात उनमें नजर नहीं आती। अक्षय रॉय को कुछ अधिक स्पष्ट, तार्किक और बेहतर कहानी मिलती तो वह ज्यादा प्रभावी होते।
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