‘3 एएम’ एक हॉरर फिल्म है। इसका भूतों से अलग हटकर है। क्या आप इस भूत से डर जाएंगे।
यह भूत रात को तीन बजे ही क्यों सक्रिय होता है, इसका जवाब आपको ‘3 एएम’ में नहीं मिलता। मुंबई की एक भुतहा मिल में कुछ बच्चे पहुंचते हैं तो वहां एक भूत उन्हें कहानी सुनाता है। मिल के कंपाउंड में अच्छे और बुरे भूत रहते हैं।
बुरा भूत इतना ताकतवर है कि वह अच्छे भूतों पर नियंत्रण रखता है। निर्देशक की फिलॉसफी यह कि इस दुनिया में दोनों तरह की ताकतें हैं। लेकिन बुरी ताकत है इसलिए अच्छी का अस्तित्व है। शायद पहली बार आप देखेंगे की किसी भूत को भगवदगीता की पॉकेट साइज प्रति चिपका दी गई तो वह जलने लगा।
‘3 एएम’ सनी (रणविजय सिंह), उसकी पत्नी सारा (अनिंदिता नायर) और उसके दो दोस्तों की कहानी है। सनी फिल्ममेकर है और सारा डॉक्युमेंट्री बनाती है। शादी के बाद सारा भुतहा मिल में रात को डॉक्युमेंट्री के काम से जाती है और सुबह उसकी लाश फांसी लगाए हुए मिलती है।
सनी इस मिल का राज जानने की ठान लेता है। वह दुनिया को बताना चाहता है कि इस संसार के बाहर भी एक संसार है। मरे हुए लोगों का संसार। मिल का मालिक बहुत क्रूर था और मिल में आग लगने से वह हजारों मजदूरों समेत जल कर मर गया।
भूतों के संसार में भी इस मिल मालिक के अत्याचार जारी हैं। वह नहीं चाहता कि मिल में कोई आए? क्या सनी और उसके दोस्त मिल में से जिंदा बचकर लौट सकेंगे?
फिल्म न तो ढंग से डराती है और न कोई रोचक कहानी कहती है। तर्क के कई सिरे ढीले हैं। कलाकार औसत हैं। भूत की कहानी कहती हुई फिल्म अचानक अतीत में चली जाती है जहां सनी, सारा और उनके दोस्त गोवा में छुट्टियां मनाते और नाचते-गाते दिखते हैं।
हिंदी में कई बेहतर हॉरर फिल्में बनी हैं। अगर ऐसी किसी फिल्म के मजे लेने के इरादे हों तो लाइब्रेरी को टटोलें। ‘3 एएम’ के भूत आपको सिनेमा के बेहतर भविष्य की कोई झलक नहीं दिखाते।