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बॉस को तो बस पैसा निकालना है...!

Wed, 16 Oct 2013 04:29 PM IST
रवि बुले, मुंबई
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फिल्म ‘बॉस’ में अक्षय कुमार बार बार बोलते हैं, ‘अपने को क्या है... अपने को सिर्फ पानी निकालना है...।’ फिल्म भी कुछ इसी अंदाज में बनी है कि ...बस बनानी है! चाहे जैसी बने।
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अक्षय ने हमेशा अपनी स्टार इमेज पर अपने एक्टर होने से ज्यादा भरोसा किया है। ‘बॉस’ में भी यही है। दक्षिण भारतीय फिल्मों के ऐक्शन और रोमांस की तर्ज पर इन दिनों बन रही फिल्मों की यह एक और कड़ी है। जो अब धीरे-धीरे बासी पड़ने लगी है।

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बिना दिमाग लगाए देखने वाली फिल्में बॉलीवुड में सदा बनती रही हैं। इस फिल्म को भी आप यूं ही देखना चाहें तो देख लें। वर्ना कोई कारण नहीं कि इसे ‘बकबॉस’ फिल्म न कहा जाए।
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थकी और धीमी-धीमी चलती कहानी के गानों में ही रफ्तार है। लेकिन गाने भी ऐसे कि आप सिनेमाहॉल में ही भूल जाएं। एक्शन और स्टंट सीन इतने पुराने कि आप दर्जनों फिल्मों में देख चुके हैं।

कॉमेडी भी याद रखने लायक नहीं। अतः जो अक्षय कुमार को बहुत मनोरंजक मान कर खुद को उनका फैन समझते हों, उन्हें ही यह फिल्म देखने में मजा आएगा।

फिल्म ऐसे लड़के (अक्षय कुमार) की कहानी है, जिसे उसके अहिंसावादी पिता (मिथुन चक्रवर्ती) ने गलत समझा। उसे घर से बेघर कर दिया। नतीजतन उसे किसी और (डैनी) ने पाला। बड़ा होकर लड़का ‘बॉस’ बना। सही-गलत काम का कांट्रेक्ट लेने लगा। लड़के का छोटा भाई (शिव पंडित) है, जिसे पिता ने खूब प्यार दिया।

छोटे भाई को एक भ्रष्ट और ताकतवर पुलिसवाले (रोनित रॉय) की बहन (अदिति राव हैदरी) से प्यार हो गया। पुलिसवाले ने उसे दिन में तारे दिखा दिए। पिता को ‘बॉस’ की मदद लेनी पड़ी। यहां से ‘बॉस’ का पुलिस से पंगा शुरू हो गया। आखिर में बॉस की जीत हुई। भाई को प्यार मिला। पिता को अपनी गलती का एहसास हुआ।

फिल्म में अक्षय कुमार वैसे ही दिखे हैं जैसे दिखते हैं। कुछ नया नहीं है। शिव पंडित साधारण न्यूमकमर की तरह हैं। जनता जनार्दन के बीच अपनी छाप छोड़ने का संघर्ष कर रहीं अदिति राव हैदरी ने रंग-बिरंगी बिकनी पहन कर लुभाने की कोशिश की है।

बाकी कलाकारों का काम उल्लेखनीय नहीं है, सिवा रोनित रॉय के। वे जोरदार खलनायक लगे हैं। उनके चेहरे की सख्ती पसीने छुड़ाने के लिए काफी है। फिल्म का कैमरावर्क जरूर अच्छा है।

इन तमाम बहसतलब बातों के बीच मुद्दे की बात यह है कि ‘बॉस’ की नजर पब्लिक के पैसों पर है। उस पैसे पर जो बहने आता है तो पानी की तरह बहता है। इसी पानी से बॉक्स ऑफिस पर सौ करोड़ का झरना बनता है।
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इसीलिए ‘बॉस’ बार-बार कहता है, ‘अपने को क्या है... अपने को सिर्फ पानी निकालना है...।’ अब समझना आपको है कि पानी के जैसा बहने वाला अपना पैसा कैसे बचाएं।
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