आज के हिंदी सिनेमा में कलाकारों के लिए अपनी पहचान बनाना बहुत मुश्किल है। फिल्म जगत में लगातार मुकाबला बढ़ रहा है, फिर चाहे मुकाबला आइटम गानों का ही क्यों न हो। नोरा फतेही फिल्म इंडस्ट्री की नई आइटम गर्ल हैं और एक बार फिर वह अपनी इसी पहचान को मुकम्मल करते दिख रही हैं, फिल्म मरजावां के नए गाने एक तो कम जिंदगानी में।
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पहले दिलबर (सत्यमेव जयते) और फिर साकी-साकी (बाटला हाउस) से हिंदी सिनेमा की आइटम गर्ल नंबर वन का तमहा हासिल करने वाली नोरा मरजावां के तीन मिनट 17 सेकेंड के एक तो कम जिंदगानी गाने में नोरा में काफी कुछ कोशिशें करती दिख रही हैं, लेकिन आइटम गानों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि परदे पर दिख रही कलाकार के पास काबिलियत न हो तो देह प्रदर्शन लंबे समय तक काम नहीं आता। नोरा पर फिल्माया गया गाना भी इसी के चलते मात खाता दिख रहा है।
इंदीवर औऱ कल्याणजी आनंद जी की संगत से बने फिल्म जाबांज के गाने एक तो कम जिंदगानी को रीमिक्स मास्टर तनिष्क बागची ने भले कम छेड़छाड़ के साथ रिक्रिएट किया हो लेकिन गाना ओरीजनल के आसपास भी नहीं फटक पाया है। तनिष्क बागची जैसे संगीतकारों ने हिंदी फिल्म संगीत का सबसे ज्यादा बेड़ा गर्क किया है, उनके पास न तो संगीत की समझ है और न ही गुणी संगीतकारों के काम की इज्जत करने का सबक। सिर्फ पैसे के लिए किसी भी गाने को छेड़कर नया रीमिक्स बना देने का काम इन दिनों सिर्फ तनिष्क ही कर रहे हों, ऐसा भी नहीं है, दरअसल बड़ी म्यूजिक कंपनियों के सामने सीना ठोक कर खड़े रहने का दम दिखा पाने वाले गीतकार और संगीतकार ही गिनती के बचे हैं।
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निर्देशक मिलाप झावेरी की फिल्म मरजावां के ट्रेलर ने दर्शकों में इस फिल्म को लेकर काफी उत्सुकता जगाई है, लेकिन नोरा फतेही पर फिल्माए गए इस रीमिक्स गाने ने फिल्म के नंबर एकदम से काफी कम कर दिए हैं।