कहानी यूं है कि मोहित और ऋतिका की गाड़ी रात को एक सुनसान जगह पर खराब हो जाती है। उनकी नजर सामने एक नग्न अवस्था में खड़े व्यक्ति पर पड़ती है तो दोनों डर जाते हैं, लेकिन फिर उस व्यक्ति से सहानुभूति पैदा हो जाती है और उसे अपने घर लेकर आते हैं। वह व्यक्ति बिल्कुल रोबोट की तरह खड़ा रहता है। मोहित और ऋतिका उसे समझने और बात करने की कोशिश करते हैं। काफी समय के बाद उन्हें समझ में आता है कि वह पक्षियों की आवाज पर अपनी प्रतिक्रिया देता है। दोनों अपने दोस्तों को बुलाकर उस अजीब से दिखने वाले इंसान के बारे में समझने की कोशिश करते हैं, उन्हें हैरानी तब होती हैं, जब उन्हें पता चलता है कि वह खाने में सिर्फ मिट्टी खाता है। दोनों उसे अपने ही घर में रखने का फैसला करते हैं। उसके बाद क्या-क्या घटनाएं होती हैं? इसी के इर्द-गिर्द फिल्म की पूरी कहानी आगे बढ़ती है।
फिल्म की शुरुआत होती है तो ऐसा लगता है कि यह कोई सस्पेंस थ्रिलर हॉरर होगी। फिल्म एक ऐसी काल्पनिक कहानी से आगे बढ़ती हैं, जिसकी कल्पना भी समझ से परे है। मोहित को उस अजीब से दिखने वाले इंसान से इतना भावनात्मक लगाव हो जाता है कि एक रात सोते वक्त उसे किस करके सोने को कहता है और सुबह देखता है कि वह व्यक्ति उसके बेडरूम से गायब है। जब किचन से किसी व्यक्ति की अजीबो गरीब आवाज आती है तो मोहित और ऋतिका किचन में जाकर देखते है कि एक व्यक्ति किचन में जो भी खाने की वस्तु मिल रहा है वह खा रहा है और खुद को मोहित बताता है। कुछ समय के बाद जब ऋतिका अजीब से दिखने वाले इंसान को किस करके सोने को कहती है तो अगली सुबह किचन में उसी हालत में एक दूसरा व्यक्ति मिलता है जो खुद को ऋतिका बताता है।
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फिल्म की कहानी फिल्म के निर्देशक करन गौर ने खुद ही लिखी हैं, इस फिल्म के माध्यम से वह क्या कहना चाह रहे हैं, वही समझ सकते हैं। फिल्म की पटकथा बेहद ही कमजोर है। फिल्म के निर्देशक इस फिल्म के माध्यम से जो भी बताना चाह रहे हैं, वह आम भारतीय दर्शकों की समझ से परे है। इस फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि अगर पति पत्नी आपसी रिश्ते से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है तो हम कल्पनाओं में बेहतर संबंध कैसे स्थापित कर सकते हैं ? निर्देशक करन गौर की सोच अच्छी है, लेकिन अपनी सोच को पर्दे पर ठीक से पेश नहीं कर पाए।
इस फिल्म की सिर्फ एक ही खासियत है कि फिल्म के सभी कलाकारों ने अभिनय में जान लगाई है। ऋतिका की भूमिका में रसिका दुग्गल, मोहित की भूमिका में मुकुल चड्ढा, अजीब तरह के इंसान की भूमिका में निखिल देसाई, कबीर की भूमिका में चंद्रचूड़ राय और हंसा की भूमिका में अमित पथारे का अभिनय ही फिल्म में जो कुछ है वह देखने लायक है। बाकी फिल्म की कहानी, सिनेमैटोग्राफी, संपादन, म्यूजिक, बैकग्राउंड स्कोर या फिर प्रोडक्शन वैल्यू, सब जीरो हैं।
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