फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Expend4bles Review: जैसन स्टैथम के कंधों पर चौथी कड़ी की जिम्मेदारी, मेगन फॉक्स के हुस्न का हुनर से मुकाबला

विज्ञापन
एक्सपेंडेबल्स 4 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन
Movie Review
एक्सपेंडेबल्स 4
कलाकार
जैसन स्टैथम , सिल्वेस्टर स्टैलोन , कर्टिस ’50 सेंट’ जैकसन , मेगन फॉक्स , टोनी जा और एंडी गार्सिया आदि
लेखक
स्पेंसर कोहेन , कर्ट विमर , टैड डैगरहार्ट और मैक्स एडम्स
निर्देशक
स्कॉट वॉग
निर्माता
केविन किंग टेम्प्लेटन , लेस वेलडन , यारिव लर्नर और जैसन स्टैथम
रिलीज
22 सितंबर 2023
रेटिंग
2/5

किसी फिल्म फ्रेंचाइजी का मूलभूत चरित्र होता है इसके किरदारों का अपना एक अलग दर्शक वर्ग बना लेना। किरदार पसंद आए तो ये दर्शक वैसी ही कहानी बार बार भी देख सकते हैं, लेकिन कितनी बार? इस सवाल का जवाब निर्माताओं के लिए तलाशना मुश्किल ही रहा है। ‘फास्ट एंड फ्यूरियस’ और ‘सॉ’ जैसी फ्रेंचाइजी 10 फिल्मों तक चली आ रही हैं। मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स उससे भी आगे विस्तार लेता जा रहा है। और, ‘एक्सपेंडेबल्स’? ये फ्रेंचाइजी कहां जाएगी, इसका फैसला शायद ‘एक्सपेंडबेल्स 4’ के बॉक्स ऑफिस नतीजे तक करेंगे। वैसे तो सिल्वेस्टर स्टैलोन के इस फिल्म को छोड़ने और फिर वापस आने के किस्से ही इतने सारे हैं कि उस पर एक अलग से फिल्म बन सकती है लेकिन अरनॉल्ड श्वार्जेनेगर के जोर देने पर वह न सिर्फ इस फ्रेंचाइजी में लौटे बल्कि इस सीरीज की पिछली फिल्म के नौ साल बाद ‘एक्सपेंडेबल्स 4’ रिलीज भी हो गई है।

विज्ञापन

एक्सपेंडेबल्स 4 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वीडियो गेम जैसे धूम धड़ाका
‘एक्सपेंडेबल्स’ की अपनी अलग कार्यशैली रही है। वे बोलते कम हैं और गोलियां ज्यादा चलाते हैं। कम से कम संवादों के बीच ज्यादा से ज्यादा लोगों को मार गिराने की मनोवृत्ति इन दिनों बनने वाले हिंसक वीडियो गेम्स की देन है। फिल्मों से भी ज्यादा रोचक कहानियों और अत्याधुनिक तकनीक से बनने वाले सिनेमा जैसे एनीमेशन ने गेमिंग की दुनिया को फिल्मों की दुनिया से भी ज्यादा विशाल बनाने का बीड़ा इन दिनों इन्हें बनाने वालों ने दुनिया भर में ठान रखा है। भारत अभी इस कारोबार में पीछे है। ‘एक्सपेंडेबल्स’ जैसी फिल्में दरअसल वीडियो गेम खेलने वाले दर्शकों की मनोवृत्ति का सिनेमाई विस्तार ही कही जा सकती हैं। यहां सोचने समझने या कहानी में दर्शकों के निवेश जैसा कुछ नहीं होता है। फिल्म शुरू होती है। दो लाइन की कहानी तय हो जाती है और फिर अंत तो दर्शक को पता ही होता है।

एक्सपेंडेबल्स 4 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जंग दुनिया को बचाने की ‘एक्सपेंडेबल्स 4’ की कहानी उसी ओसलॉट को पकड़ने की कहानी है जिसे पकड़ने की कोशिश में 25 साल पहले बार्नी नाकाम रहा था। इस बार फिल्म शुरू होती है लीबिया की एक पुरानी केमिकल फैक्ट्री से जहां आतंकवादियों का एक गिरोह नाभिकीय शस्त्रों की कुंजी लूटने के लिए खतरनाक हमला करता है। ‘एक्सपेंडेबल्स’ को इसके बारे में बताया जाता है और ये सब पहुंच जाते हैं दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध से बचाने के लिए। लेकिन, मामला हाथ से तब निकल जाता है जब बार्नी को बचाने के चक्कर में ली क्रिसमस लक्ष्य से भटक जाता है। अब वह टीम से बाहर  है और नाभिकीय अस्त्रों की कुंजी हासिल करने के लिए बाकी टीम पानी के उस विशालकाय जहाज पर जा पहुंचती है जिस पर झंडा अमेरिका का है और जिसे रूस की समुद्री सीमा में ले जाकर परमाणु बम फोड़ने की आतंकी साजिश चल रही है।

एक्सपेंडेबल्स 4 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जैसन स्टैथम के हाथ में बैटन फिल्म की कहानी में जाहिर है कोई नवीनता नहीं है। इन दिनों हॉलीवुड की हर दूसरी फिल्म और तीसरी सीरीज में दुनिया को बचाने निकलने एजेंटों की पूरी बरात काम पर लगी हुई है। ‘एक्सपेंडेबल्स 4’ भी उसी लाइन में आ खड़ी हुई फिल्म है। लेकिन, यहां टॉम क्रूज नहीं हैं। यहां बुढ़ापे की अजीब सी तस्वीर बन चुके सिल्वेस्टर स्टैलोन हैं जो चाहते हैं कि ये फ्रेंचाइजी आगे बढ़े तो उसे अब जैसन स्टैथम संभालें। इसीलिए उन्हें इस फिल्म का निर्माता भी बनाया गया है। साथ में इस बार कुछ नए खिलाड़ी भी जुटे हैं। मेगन फॉक्स अपना पूरे दैहिक आकर्षण के साथ फिल्म का तापमान बढ़ाने के लिए मौजूद हैं और मौजूद हैं हनुमान को अपना सबसे पसंदीदा पौराणिक किरदार मानने वाले टोनी जा। और, भी कई नए सूरमा इस टीम में शामिल हुए हैं लेकिन कहानी पर इसका कोई खास असर होता दिखता नहीं है।

एक्सपेंडेबल्स 4 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
भावनाओं का ज्वार बनाने में चूकी कोई 10 करोड़ डॉलर यानी करीब 830 करोड़ रुपये के बजट में बनी फिल्म ‘एक्सपेंडेबल्स 4’ एक बचकानी सी फिल्म है। कहानी में दम नहीं है और इसके किरदारों की अंतर्कथाएं इसके पटकथा लेखकों ने बुनी नहीं है। ली क्रिसमस और उसकी पूर्व प्रेमिका व सीआईए एजेंट जीना की प्रेम कहानी फिल्म का भावुक पहलू बन सकती थी लेकिन यहां भी दोनों मोहब्बत कम और मारपीट करते ज्यादा दिखते हैं। बार्नी और क्रिसमस के बीच का भावनात्मक रिश्ता जताने के लिए भावुकता भरे कुछ दृश्य कारगर हो सकते हैं लेकिन चूंकि फिल्म लिखने वालों का ध्यान पूरा एक्शन पर है तो दोनों के बीच ‘ब्रदर फ्रॉम अदर मदर’ जैसा रिश्ता है, ये बात क्रिसमस को बोलकर बतानी होती है।
विज्ञापन

एक्सपेंडेबल्स 4 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तकनीकी रूप से भी कमजोर फिल्म तकनीकी रूप से भी फिल्म बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करती है। एक्शन दृश्य दोहराव लिए हुए हैं और क्लाइमेक्स के अधिकतर हिस्से के स्पेशल इफेक्ट्स किसी दोयम दर्जे की फिल्म जैसे लगते हैं। हिंसक वीडियो गेम खेलने वालों को ये फिल्म भले भाए लेकिन आम दर्शकों के लिए फिल्म में कुछ खास है नहीं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें