अक्षय कुमार एक बार फिर कॉमेडी की सौगात आपके लिए लाए हैं फिल्म 'एंटरटेनमेंट' के माध्यम से। खान हीरोज के अलावा अक्षय ऐसे हीरो बनकर उभरे हैं जिनकी फिल्में सौ करोड़ के क्लब में शामिल हो रही हैं।
लिहाजा इनकी फिल्मों का भी अब बेसब्री से इंतजार होने लगा है। अब बात की जाए 'एंटरटेनमेंट' की तो कई कॉमेडी फिल्में लिख चुके फरहाद-साजिद ने निर्देशक के रुप में अक्की को लेकर यह पहली फिल्म बनाई है। जानिए इस फिल्म की पूरी समीक्षा।
कुत्ते द्वारा इंसानियत का सबक सिखाती है कहानी
'एंटरटेनमेंट' की कहानी यह है कि एक हीरा व्यापारी अपनी तीन हजार करोड़ रुपये की जायदाद छोड़ कर मर गया है। अनेक संघर्षों से जूझते हुए जिंदगी जी रहे अखिल लोखंडे (अक्षय कुमार) को अचानक मालूम पड़ता है कि यह बिजनेस टाइकून उसका नाजायज पिता था।
राज खुलने पर अखिल संपत्ति को ओवरटेक करने पहुंचता है, तो वकील हबीबुल्ला (जॉनी लीवर) से पता चलता है कि एक कुत्ता एंटरटेनमेंट जायदाद को ओवरटेक कर चुका है। हीरा व्यापारी इस पालतु कुत्ते के नाम अपनी सारी संपत्ति कर गया है।
अखिल एंटरटेनमेंट को खत्म करने अमीर बनना चाहता है। जबकि एंटरटेनमेंट एक हादसे में उसकी जान बचाता है। हृदय परिवर्तन के बाद अखिल संपत्ति पर दावा छोड़ लौटना चाहता है कि कहानी में खलनायकों यानी करन-अर्जुन (प्रकाश राज-सोनू सूद) की एंट्री होती है।
वे धोखे से एंटरटेनमेंट की दौलत कब्जा लेते हैं, मगर अखिल उन्हें सबक सिखाता है। इस बीच अखिल और साक्षी (तमन्ना भाटिया) की लव स्टोरी भी चलती है। साक्षी का पिता (मिथुन चक्रवर्ती) गरीब अखिल को बेटी का हाथ सौंपना नहीं चाहता।
वह बेटी को अपने अनुभव से सलाह देता है कि शादी के बाद आदमी की जिंदगी कुत्ते जैसी हो जाती है, इसलिए उसे रईस कुत्ते से ही शादी कर लेनी चाहिए। फिल्म कुत्ते के माध्यम से इंसानियत का सबक सिखाती है। अगर आपको कुत्तों से प्यार है और इस कहानी से एंटरटेन होते हैं तो फिल्म आपके लिए है।
निर्देशक जोड़ी की परीक्षा
यह फिल्म इंसान के सबसे वफादार साथी कहलाने वाले कुत्ते की है। कुत्ता फिल्म के हीरो को इतना भावुक बना देता है कि वह कहता है, आज के बाद अगर कोई मुझे कुत्ता कहेगा तो बुरा नहीं मानूंगा। हो सकता है कि फिल्म से भावनात्मक रूप से जुड़ जाने और एंटरटेन होने वालों को भी सिनेमा हॉल से निकलने के बाद कुत्ता शब्द गाली न लगे।
लेकिन यह कहना होगा कि निर्देशक जोड़ी फरहाद-साजिद की फिल्म शुरू से अंत तक धैर्य की परीक्षा लेती है कि आप कितनी देर बैठ सकते हैं। कई कॉमेडी फिल्में लिख चुके फरहाद-साजिद की निर्देशक के रूप में यह पहली फिल्म है।
नए निर्देशकों से उम्मीद होती है कि वे कुछ नया लाएंगे। परंतु इस जोड़ी ने नया कुछ करने के बजाय पुराने कॉमिक फार्मूलों को ही आजमाया है। यानी लीक पर चलते हुए कोई जोखिम नहीं लिया।
इस फिल्म में कैसी रही अक्षय की कॉमेडी?
वैसे अक्षय कुमार अपनी पुरानी कॉमेडी फिल्मों से अलग नहीं लगे हैं और उनका अंदाज भी वही है। तमन्ना भाटिया के लिए करने को यहां कुछ खास नहीं था। जॉनी लीवर भी फीके पड़ चुके हैं।
सोनू सूद और प्रकाश राज यहां सिर्फ इसलिए हैं कि एक दबंग वन का और दूसरा दबंग टू का विलेन है। अक्षय कुमार बॉक्स ऑफिस पर कामयाब हैं और उनके चाहने वाले भले ही सलमान जितने न हों, लेकिन काफी हैं।
ऐसे में बॉक्स ऑफिस की चिंता उन्हें नहीं है। दर्शकों में भी मनोरंजन की भूख है। सस्ता और सतही ही सही, बाजार ने पर्दे के मनोरंजन को जीवन की जरूरत साबित कर दिया है।
एंटरटेनमेंट चुटकुलों से हंसाने की पूरी कोशिश करती है। अगर आपका स्तर उनके साथ मैच कर गया तो आपके लिए इस फिल्म के जैसी कोई फिल्म नहीं होगी। वर्ना पछताएंगे।
कुत्ते को लेकर एक चुटकुला आप जरूर जानते होंगे। एक आदमी नया कुत्ता खरीद कर लाया। उसने दरवाजे पर कुत्ता बांध दिया। जब मेहमान उसके दरवाजे पर आए तो उन्होंने पूछा कि क्या यह काटता है। तब उस आदमी ने कहा कि आप दरवाजे से आइए तब तो पता चलेगा।
ऐसे में आपको यही राय है कि एंटरटेनमेंट के लिए सिनेमाहॉल के अंदर जाने से पहले एक बार अपने उन हमखयाल संगी-साथियों से जरूर विचार-विमर्श कर ले लें, जो यह फिल्म देखने के लिए अंदर जाकर बाहर आ चुके हैं।