हम जहां पैदा हुए, उस जगह ही...
क्या ही शानदार शुरुआत हुई साल 2023 की इस साल 25 जनवरी को यशराज फिल्म्स की धमाकेदार फिल्म ‘पठान’ से। दीपिका पादुकोण के बेशरम रंग और हैंडसम विलेन बने जॉन अब्राहम के साथ मिलकर शाह रुख खान ने घरों में बैठे दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच लिया। फिर तो ये सिलसिला ‘गदर 2’ से होते हुए ‘जवान’ और ‘एनिमल’ तक खूब जारी रहा। और, हिंदी सिनेमा के चाहने वालों को पूरी उम्मीद थी कि शाह रुख खान साल का अंत भी एक धमाकेदार फैमिली एंटरटेनर से करेंगे। लेकिन, ये हो न सका। और, अब ये आलम है कि शाह रुख खान की फिल्म ‘डंकी’ का आने वाले लंबे समय तक इस बात के लिए पोस्टमार्टम होता रहेगा कि अभिजात जोशी व राज कुमार हिरानी की सुपरहिट जोड़ी से इस फिल्म में गलती कहां हुई? क्या कनिका ढिल्लों ने फिल्म को ‘मॉडर्न’ बनाने के चक्कर में गफलत कर दी या फिर कि फिल्म ‘काबुलीवाला’ में मन्ना डे के गाए मर्मस्पर्शी गाने की एक लाइन ‘हम जहां पैदा हुए, उस जगह ही निकले दम, तुझ पे दिल कुरबान’ पर 2023 में एक फिल्म बनाकर राज कुमार हिरानी ने अपने दर्शकों की नब्ज पहचानने में भूल कर दी। क्या ही शानदार गाना लिखा था प्रेम धवन ने साल 1961 में रिलीज हुई इस फिल्म में! वह जिंदा होते तो इस साल सौ साल के हो चुके होते।
इंटरवल के बाद शुरू हुई ‘डंकी’
फिल्म ‘डंकी’ का जिस बात को लेकर खूब प्रचार प्रसार हुआ, वह बात फिल्म में इंटरवल तक नदारद रहती है। फिल्म अपना आधार बनाने में इतनी देर कर देती है कि बाद में फिल्म का दूसरा हिस्सा लाख चाहकर भी इसे संभाल नहीं पाता। और, प्रेम धवन के गाने से ही प्रेरित फिल्म में सोनू निगम का गाया जावेद अख्तर का लिखा गाना आते आते फिल्म दर्शकों को इतना बोर कर चुकी होती है कि किसी का इस गाने के बोलों की तरफ ध्यान भी नहीं जाता। राज कुमार हिरानी इस बार अपने चिर परिचित गलियारों से निकलकर पंजाब पहुंचे। वहां के गांव लाल्टू में विदेश जाने के लिए बेताब युवाओं की कहानी में हैरी सिंह ढिल्लों नामक फौजी (जी हां, फिर से फौजी) आता है। वह आता है खुद को बचाने वाले का टेपरिकॉर्डर लौटाने लेकिन यहां के लोगों के सपने पूरे करने के लिए वह यहीं रुक जाता है। एक फौजी अवैध तरीके से इन लोगों को लंदन पहुंचाए, इसके लिए आधार बनाने में फिल्म इतना समय ले लेती है कि असली नमक का स्वाद आने तक आयोडीन ही हवा में उड़ जाता है।
फिल्म से बेहतर था अनाउंसमेंट वीडियो
राज कुमार हिरानी ने विधु विनोद चोपड़ा कैंप से बाहर आने के बाद बनाई अपनी पहली फिल्म ‘डंकी’ में अपने प्रशंसकों का विश्वास तो खोया ही है, शाहरुख खान ने भी अपने चाहने वालों का दिल तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पूरी फिल्म उनका किरदार पंजाबी बोलता रहता है। साफ पता चलता है कि उनकी पंजाबी अब वैसी नहीं रही जैसी दिल्ली से बंबई आने तक उनकी रही होगी। फिल्म शुरू होने से पहले और बीच में उनके खूब सारे विज्ञापन दिखाए जाते हैं, ये दिखाने के लिए शाहरुख खान की ब्रांड वैल्यू क्या है? एक वाशिंग पाउडर के विज्ञापन में वे अपने चिर परिचित अंदाज में बाहें पसारे भी नजर आते हैं। और, इस मौके पर याद आता है फिल्म ‘डंकी’ का वह अनाउसमेंट वीडियो जिसमें शाहरुख ने राज कुमार हिरानी की फिल्म मिलने पर मजाक मजाक में अपने हाथ तक कटवा देने की बात कही थी। फिल्म ‘डंकी’ का ये वीडियो जितना प्रभावशाली था, फिल्म ‘डंकी’ उतनी हम बेअसर बनी है।
सबको याद है 1995 का शाहरुख खान
शाह रुख खान को इस फिल्म में देखकर लगता है कि उनका गेटअप फिल्म ‘पठान’ और फिल्म ‘जवान’ में उनके गेटअप से मैच कराते रहने के लिए बदलता हुआ दिखाया गया है। ये दोनों फिल्में एक्शन फिल्में रही हैं तो बिना जरूरत के फिल्म ‘डंकी’ में भी शाहरुख के दो एक्शन वाले सीन में डाल दिए गए हैं। एक में गोलियों से बचते हुए और दूसरे मे गोलियां चलाते हुए। कहानी अधिकतर 1995 की है और तब शाह रुख कैसे दिखते थे, ये देश ही क्या दुनिया भर के उनके करोड़ों चाहने वाले बता सकते हैं। 2023 के बुजुर्ग शाहरुख का जो जलवा एटली ने फिर ‘जवान’ में बांधा, वैसा करिश्मा फिल्म ‘डंकी’ के डीएनए में ही नहीं है। शाहरुख खान ने इस फिल्म की मेकिंग में कितना हस्तक्षेप किया ये तो पता नहीं लेकिन फिल्म देखकर लगता है कि फिल्म ‘पठान’ और ‘जवान’ में अपने किरदार के छींटे इस फिल्म में भी डालने का आइडिया उन्हीं का ही रहा होगा। और, ये बात तो मैं रिव्यू के शुरू में ही लिख चुका हूं कि कैसे हिंदी सिनेमा के वे दिग्गज निर्देशक शाह रुख को पाते ही अपनी कला भूल गए, जिनके सिनेमा पर दर्शकों ने इससे पहले खूब भरोसा किया।
अब कैसे बोलेंगे हैप्पी न्यू ईयर?
फिल्म की कथा, पटकथा, निर्देशन और शाह रुख खान के औसत से अभिनय के अलावा फिल्म की दूसरी बड़ी कमजोरी इसकी प्रोडक्शन डिजाइन है। पंजाब का सेट लगाने से पहले इस फिल्म की टीम ने लगता है यश चोपड़ा की फिल्में खूब देखी हैं। यशराज फिल्म्स की ‘वीर जारा’ से लेकर ‘रब ने बना दी जोड़ी’ तक की हवेलियां और गलियां फिल्म ‘डंकी’ में नजर आती है। लंदन, दुबई, यूएई सब देखा देखा सा है। रिवर्स डंकी वाले सीन को छोड़कर फिल्म में कहीं कोई बात ऐसी नहीं है जो आपको सीट से थोड़ा उचककर बैठने के लिए उकसाए और ये सोचने पर मजबूर करे कि अब क्या होने वाला है? सारे कलाकार इतने गोरे चिट्टे नजर आते हैं कि निर्देशक को भी इसे स्थापित करने के लिए एक लाइन डालनी पड़ती है, ‘मेरी मां कहती थी तू बिल्कुल फॉरेनर’ लगता है। गाने, शाने तो जी, जैसे हैं वैसे हैं ही। बड़ी कोफ्त इस बात को लेकर हुई कि इतना हंसी खुशी गुजर रहा साल जाते जाते एक ऐसी फिल्म का सियापा करते बीतने वाला है।