डरपोक हीरो, दिलेर हीरोइन की कहानी
फिल्म ‘धूम धाम’ कोयल और वीर की कहानी है। कोयल झूठ बोलने में उस्ताद है। कूकती मस्त है। और, वीर हमारा बिल्कुल नासमझ है। ऐन मौके पर उसे ऊंचाई से डर लगने लगता है। बंद जगहें उसे काट खाने को दौड़ती हैं और मौत पीछा कर रही हो तब भी वह ट्रैफिक के नियमों का पालन करते हुए गाड़ी चलाता है। गोलियां चला रहे दो गुट इनके पीछे पड़े हैं। दोनों को किसी ‘चार्ली’ की तलाश है। लगता है मामला जम जाएगा। लेकिन, नहीं यहां यामी गौतम को मुंबई के ओशिवारा में खुले रेस्तरां वन बीएचके के चीज केक का प्रचार भी करना है। अपना एक्शन अवतार भी दिखाना है और क्लाइमेक्स में साथी जब पिट रहा हो तो उसे ये भी बताना है कि कोर स्ट्रॉन्ग रखो कुछ नहीं होगा! ऐसे संवाद कौन लिखता है भाई?
प्रतीक से प्रतीक तक पहुंचने में ढेर हुई कहानी
दो ठीक ठाक परिवारों के बीच शादी की रस्मों के पूरी होते होते शुरू होने वाली ये चोर-पुलिस और पुलिस-पुलिस वाली कहानी सिरे से कमजोर है। हीरो को यहां कमजोर बनाया गया है। और, हीरोइन को चतुर सुजान। कहानी यहीं सिरे से औंधी हो जाती है। प्रतीक गांधी जानवरों के डॉक्टर बने हैं और फिल्म में एक कुत्ता ऐसा है जो कहीं भी अपनी छिछोरी हरकतें शुरू कर देता है। हास्य का ऐसा विद्रूप रूप तो इससे पहले दादा कोंडके की फिल्मों में ही होता रहा होगा। कहानी, पटकथा और संवादों के नाम पर पैदल फिल्म में कुछ भी तो ऐसा नहीं है जिसको देखकर या सुनकर दिल खुश हो जाए। फिल्म के संवाद कितने छिछोरे हैं, ये समझना हो तो प्रतीक बब्बर वाला पूरा सीक्वेंस ही काफी है। फिल्म का संगीत भी समय से पैदल है। गुजराती फैमिली की कहानी में पंजाबी म्यूजिक?
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आदित्य धर का बतौर फिल्म निर्माता दूसरा उदय
फिल्म के निर्माता आदित्य धर हैं। फिल्म ‘उरी द सर्जिकल स्ट्राइक’ के छह साल बाद भी अपनी अगली फिल्म बतौर निर्देशक जमाने में जुटे निर्देशक का दर्द समझ आता है। पहले ‘अश्वत्थामा’ बनाने जा रहे थे लेकिन विक्की कौशल के साथ फिल्म का बजट और उसकी रिकवरी सही नहीं बैठी। फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गई। अब ‘धुरंधर’ शुरू की है। रणवीर सिंह के साथ है। इस बीच वह अपनी पत्नी को दो फिल्मों में हीरो की तरह पेश कर चुके हैं। ‘आर्टिकल 370’ मुद्दे पर बनी फिल्म थी, इसलिए चल निकली। लेकिन, ‘धूम धाम’? कॉमेडी फिल्म बनाने में बड़े बड़े दिग्गजों के हुनर का इम्तिहान होता रहा है, इस बार फेल होने की बारी आदित्य धर की है। यामी गौतम के खाते में खामखां एक कमजोर फिल्म जुड़ गई है।
कमजोर फिल्मों में जूझने को अभिशप्त गांधी
फिल्म ‘धूम धाम’ का टेक ऑफ ही अजीबो गरीब है। इधर हिंदी फिल्मों के शुरू में अंग्रेजी गाने बजाने की ऐसी परंपरा चल निकली है कि समझ ही नहीं आता कि ये बन किस दर्शक वर्ग के लिए रही हैं। जेन जी की भीड़ ‘कैप्टन अमेरिका ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ के शो में नजर आती है। सिनेमा की जेन जी ‘धूम धाम’ बना रही है। होना तो ये चाहिए कि देश की अंग्रेजीदां जेन जी के लिए हिंदी सिनेमा के धुरंधरों को भी एकाध फिल्म पूरी तरह अंग्रेजी में बनाकर देखनी चाहिए। क्या पता? तुक्का लग ही जाए। यहां ‘धूम धाम’ में प्रतीक गांधी के साथ फिर से स्कैम हो चुका है। बेचारे की एक भी फिल्म में करंट नहीं दिख रहा। बड़े परदे पर पहुंची जिस फिल्म में करंट था भी, उसका प्रचार ही नहीं किया बनाने वालों ने। नेटफ्लिक्स की इस साल की स्लेट पूरी खुल चुकी है। लेकिन, मामला इकन्ना एक पर ही अटकता दिख रहा है।