ग्रू का खतरनाक दुश्मन से सामना
फिल्म ‘डेस्पिकेबल मी 4’ की मूल कहानी ग्रू और मैक्साइम के एक दूसरे पर इक्कीस साबित होने की कोशिशों की कहानी है। ग्रू भी कभी शोर मचाकर कहता था, हां मैं हूं खलनायक। लेकिन, अब वह फैमिली मैन बन चुका है। जूनियर ग्रू ने कहानी को नए नए आयाम दे रखे हैं और उसकी बेटियां जब भी परदे पर आती हैं, कुछ न कुछ हरकत करके ही जाती हैं। पत्नी ग्रू की अपनी अलग धुन में हैं। लेकिन, इस बार ग्रू की जान को खतरा है। उसने जिस खतरनाक अपराधी को जेल पहुंचाया, वह जेल से भाग चुका है और अब ग्रू और उसके परिवार के लिए खतरा बन चुका है। खलनायकों के खिलाफ काम करने वाली संस्था उसे सेफ हाउस पहुंचा देती है लेकिन मामला यहां भी सेफ रह नहीं पाता है।
क्षेपक कथाओं में खोई मूल कहानी
माइक व्हाइट और केन डाउरियो की लिखाई फिल्म ‘डेस्पिकेबल मी 4’ की कमजोर कड़ी है। मिनियन्स की क्षेपक कथाओं को फिल्म में शामिल करने के चक्कर में वे फिल्म की मूल कहानी को विकसित ही नहीं होने देते। पता ही नहीं चलता कि आखिर मैक्साइम का अपराध क्या है, और वह अपनी खास शक्ति के जरिये दुनिया के लिए आगे क्या खतरा बनने वाला है? मैक्साइम के साथ ही उसकी महिला दोस्त वैलेंटिना की कहानी भी ठीक से विस्तार नहीं पाती है। हाईस्कूल के एक कार्यक्रम में ग्रू का मैक्साइम का गाना चुरा लेना इतनी बड़ी कहानी के सेटअप के लिहाज से कमजोर बिंदु है। इसका पैबैक भी दोनों लेखकों ने कहानी में खास गढ़ा नहीं है। सुपरशक्ति से लैस करने के लिए जिन मिनियन्स पर प्रयोगशाला में प्रयोग किए जाते हैं, उनकी कहानी भी फिल्म को कुछ खास नयापन नहीं दे पाती है।
सब कुछ शामिल कर लेने की दिक्कत
फिल्म ‘डेस्पिकेबल मी 4’ की असल समस्या इस बात में नहीं है कि इसमें कुछ नहीं है। बल्कि इसकी समस्या बिल्कुल अलग किस्म की है और वह ये कि इसमें इतनी ज्यादा क्षेपक कथाएं हैं कि ऐसी हर कथा पर एक अलग फिल्म बन सकती हैं। निर्देशक क्रिस रेनाउड का अपराध यहां ये है कि वह एक कहानी से दूसरी कहानी पर उछलते जाते हैं और किसी भी एक कहानी को ढंग से न विकसित होने देते हैं और न ही दर्शकों से उसका नाता जुड़ने देते हैं। मेगा मिनियन्स की कहानी और बोरिंग है। शहर को बचाने की कोशिश में जब वह शहर की ऐसी की तैसी करते हैं तो भी ये कहानी मूल कहानी पर कोई असर डाल नहीं पाती है। फिल्म के क्लामेक्स में भी इनका कोई खास महत्व फिल्म की कहानी में दिखता नहीं है और ये तब है जब इन सारे मेगा मिनियन्स को फिल्म के प्रचार में सबसे ज्यादा मौका मिला है।
बच्चों के साथ टाइमपास लायक फिल्म
इन तमाम कमियों के बाद भी फिल्म ‘डेस्पिकेबल मी 4’ परिवार के साथ एक बार तो देखी ही जा सकती है और वह इसलिए क्योंकि इसमे ग्रू का अपने पेशे और अपने परिवार के बीच संतुलन बनाने का जो प्रयास है, वह दर्शनीय है। पड़ोसी की बेटी का उसकी पोल खोल देने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना और एक डकैती में अपना साथ देने के लिए तैयार करने वाला पूरा प्रसंग रोचक है। लेकिन, विलेन बनाने वाले स्कूल की पृष्ठभूमि का फिल्म की कहानी में बेहतर व रोचक इस्तेमाल हो सकता था। फिल्म का बैकग्राउंड इसकी रफ्तार से मेल मिलाप बनाए रखने की पूरी कोशिश करता है लेकिन एक दो जगह को छोड़कर बाकी स्थानों पर ये सिर्फ शोर ही बढ़ाता दिखता है।
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