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Dashmi Movie Review: होली से पहले ‘दशमी’ की बेरंग कहानी, क्राइम पेट्रोल जैसी कहानी में कुछ भी देखने लायक नहीं

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फिल्म 'दशमी' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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Movie Review
दशमी
कलाकार
वर्धन पुरी , गौरव सरीन , अंकित खेरा , तीर्थ भानुशाली , मोनिका चौधरी , आदिल खान , खुशी हजारे और ऐश्वर्य अनिष्का आदि
लेखक
शांतनु अनंत तांबे
निर्देशक
शांतनु अनंत तांबे
निर्माता
संजना विनोद तांबे और सारिका विनोद तांबे
रिलीज
16 फरवरी 2024
रेटिंग
1/5

होली के ठीक पहले वाले महीने में कोई फिल्म ‘दशमी’ नाम से रिलीज हो और पोस्टर पर राम, लक्ष्मण, सीता और रावण जैसे चरित्र दिखें तो मामला पहली बार तो समझ आता नहीं है कि फिल्म आखिर होगी क्या? ‘दशमी’ नाम से विजयादशमी का आभास मिलता है और फिल्म है भी इसी त्योहार के बारे में लेकिन, बात यहां एक रावण को नहीं बल्कि समाज के उन सारे रावणों को मारने की है जो मासूम बच्चियों का अपना शिकार बना रहे हैं। समाज के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने निकले नायकों की कहानियां हिंदी सिनेमा में नई नहीं हैं। निर्देशक रवि चोपड़ा की 40 साल पहले रिलीज हुई फिल्म ‘आज की आवाज’ की कहानी भी यही है। वहां प्रभात अकेले था, यहां दोस्तों का पूरा एक गुट है, कुछ कुछ एन चंद्रा की फिल्म ‘अंकुश’ की तरह।

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फिल्म 'दशमी' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कहानी पुरानी सी, पटकथा बेगानी सी
फिल्म ‘दशमी’ की सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि न सिर्फ इसकी कहानी बहुत ही जानी पहचानी सी है, बल्कि इसमें अदालत से जमानत पाए मुलजिमों को उठाने और फिर उनसे अपने गुनाह कबूलवाने का वीडियो बनाने वाले प्रसंग भी एक समय के बाद खुद को दोहराने लगते हैं। एक मुलजिम को रंगे हाथ उठाने वाला हिस्सा भी है फिल्म में लेकिन, ये पूरा प्रकरण फिल्म को और कमजोर ही करता है। फिल्म का नाम ‘दशमी’ वैसे तो विजयादशमी के दिन होने वाले क्लाइमेक्स के अनुसार है, लेकिन फिलम का शीर्षक और मजबूती से स्थापित करने के लिए इसके लेखक-निर्देशक शांतनु तांबे एक बच्ची भी कहानी में ले आते हैं, दशमी नाम की।

फिल्म 'दशमी' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म बनाने का असंवेदनशील तरीका
शांतनु तांबे ने खुद ही फिल्म लिखी है, निर्देशित की है और इसका निर्माण भी अपने परिजनों के साथ ही मिलकर किया है। फिल्म की कहानी और पटकथा तो कमजोर है ही, ये फिल्म है भी बहुत ही असंवेदनशील। इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ रहे बच्चे बार बार बलात्कार की पीड़ितों की पहचान वीडियो में उजागर करते रहते हैं और इस तरफ ध्यान नहीं देते कि ऐसा करना सामाजिक और कानूनी दोनों रूप से गलत है। ये पढ़े लिखे युवा क्यों ये सब कर रहे हैं, इसकी वजह फिल्म के दूसरे हिस्से में उजागर होती है। किसी ऐसे प्रदेश की कहानी है जहां पुलिस महानिदेशक नहीं है, बस एक कमिश्नर ही पूरे प्रदेश को संभाल रहा है। फिल्म का जो हीरो एसीपी है, उसका अधिकार क्षेत्र तय नहीं है। शुरू में ये किरदार नायक का सा लगता है, लेकिन उसके काम करने का तरीका उसे दर्शकों की नजर में खलनायक बना देता है।

फिल्म 'दशमी' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनय के सारे रंग फीके
अभिनय के मामले में फिल्म बहुत ज्यादा कमजोर है। फिल्म में एसीपी की मुख्य भूमिका निभा रहे आदिल खान का तेवर तो किसी दबंग पुलिस अफसर जैसा है लेकिन पूरी फिल्म में ये एसीपी सिर्फ अपने मातहतों को तरह तरह की तफ्तीश करने के अलावा ज्यादा कुछ खास खुद करता दिखता नहीं है। इंजीनियरिंग कॉलेज के जो छात्र बलात्कारियों को दशहरे के दिन जिंदा जला देने की योजना बनाते दिखते हैं, उनमें वर्धन पुरी और गौरव सरीन काम बहुत ही साधारण है। अंकित खेरा किसी दृश्य में हैं या नहीं हैं, फर्क नहीं पड़ता। तीर्थ भानुशाली थोड़ा दम दिखाने की कोशिश जरूर की है, लेकिन मोनिका चौधरी के भाव शुरू से लेकर एक जैसे ही बने रहते हैं।
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फिल्म 'दशमी' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इस फिल्म में सिनेमा नहीं है..
दशमी बनी बच्ची के किरदार में खुशी हजारे का काम ठीक है, लेकिन उन्हें फिल्म से पहले कुछ वर्कशॉप्स जरूर करनी चाहिए थी। ऐश्वर्या अनिष्का एथिकल हैकर की भूमिका में हैं और गिनती के दो तीन दृश्यों में दिखने वाला मोनू का ये किरदार सिवाय लड़कों की तरह बात करने के और कुछ खास करता नहीं हैं। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक ‘दशमी’ की सबसे कमजोर कड़ी है। शुरू में एक ही बीट पर बजते रहने वाला ये पार्श्वसंगीत फिल्म देखने में बहुत दिक्कतें पैदा करता है। फिल्म के गाने हालांकि अपने बोलों के हिसाब से मायने रखने वाले हैं, लेकिन इनका संगीत फिल्म को कहीं कोई मजबूती प्रदान नहीं करता। तकनीकी रूप से भी फिल्म न सिनेमैटोग्राफी में प्रभावित करती है, न संपादन में और न ही अपनी प्रोडक्शन डिजाइन में। फिल्म गिनती के सिनेमाघरों में ही रिलीज हुई है तो अगर ये आपके नजदीकी सिनेमाघरों में नहीं भी लगी है तो ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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