कैसा है अभिनय?
फिल्म में आपको अनन्या पांडे का 2.0 वर्जन देखने को मिलेगा। वो यहां 'तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी' की तरह ओवरएक्टिंग नहीं करतीं। उनकी एक्टिंग देखकर आप वाकई यकीन नहीं कर पाएंगे कि यह अनन्या ही हैं। पूरी फिल्म में कोई ऐसा सीन नहीं है जहां वो कमजोर नजर आई हों। फिल्म देखकर आप उन्हें ट्रोल करना बंद कर देंगे।
लक्ष्य सुपरस्टार मटेरियल हैं। उनके अभिनय में आपको कई जगह रणबीर कपूर की झलक मिलती है। उन्होंने अपने किरदार में प्यार, दर्द और गुस्से हर इमोशन को बखूबी हैंडल किया है। पूरी फिल्म लक्ष्य और अनन्या के इर्द-गिर्द ही बुनी गई है। बाकी कलाकारों का फिल्म में नाम का ही रोल है।
कैसा है निर्देशन?
फिल्म को विवेक सोनी ने निर्देशित किया है, जो इससे पहले 'मीनाक्षी सुंदरेश्वर' और 'आप जैसा कोई' जैसी लीक से हटकर रोमांटिक फिल्में बना चुके हैं। इस बार भी विवेक कुछ नया लेकर आए थे। फिल्म की शुरुआत भी अच्छी थी पर इंटरवल के बाद फिल्म का स्क्रीनप्ले एकदम बोझिल हो जाता है। सेकंड हाफ में फिल्म को इतना इधर से उधर घुमाया गया है कि एक वक्त बाद दर्शक इसके खत्म होने का इंतजार करने लगते हैं।
अनन्या और लक्ष्य ने इस फिल्म को अपने कंधों पर अच्छी तरह संभाला था। अगर विवेक इसे थोड़ा बेहतर निर्देशन देते तो फिल्म बेहतर हो सकती थी। कुछ सीन थे जिन्हें बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। कुछ किरदार थे जिनको फिल्म में और डेवलप किया जा सकता था।
चांद मेरा दिल ट्रेलर रिलीज
- फोटो : यूट्यूब ग्रैब
कहां रह गई कमी?
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी भटकती कहानी है। जिस तरह कहानी में किरदार नहीं जानते कि उन्हें क्या करना है, वैसे ही फिल्म के लिखने वाले राइटर्स का भी हाल था। कहानी पर विवेक सोनी के साथ तुषार परांजपे और अक्षत घिल्डियाल ने काम किया है पर तीन लोग मिलकर भी इसे एक सही दिशा नहीं दे पाए।
फिल्म की शुरुआत जितनी अच्छी थी, अंत उतना ही खराब। फिल्म के कई सीन से आप कनेक्ट करते हैं। रिश्तों के टूटने की वजह, पार्टनर से एक्सपेक्टेशन और तलाक के बाद का माहौल सब आपको असल सा लगता है पर क्लाइमैक्स तक आते-आते सब गड़बड़ हो जाती है।
बॉलीवुड की रोमांटिक फिल्मों में कई बार राइटर्स अलग क्लाइमैक्स लिखने का रिस्क तो लेते हैं पर अंत तक आते-आते वो हैप्पी एंडिंग दिखाने के फेर में फंस जाते हैं और इन सबके बीच पिसता है दर्शक। जो उम्मीद करता है कुछ नए की, पर मिलता है वही पुराना फॉर्मूला।
देखें या नहीं?
अनन्या पांडे और लक्ष्य का बेहतरीन अभिनय देखना चाहते हैं तो इसे देख सकते हैं। किसी टूटे हुए रिश्ते से गुजरे हैं तो यह आपको अपनी कहानी सी लग सकती है पर इसके अलावा इसे देखने की कोई बड़ी वजह नहीं।