'बूनी बियर्स गार्जियन कोड' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
90 मिनट मूवी वाले दौर की फिल्म ‘बूनी बियर्स गार्जियन कोड’ की अवधि सिर्फ 95 मिनट है और इसकी ये अवधि इसके अनुभव को सीमित समय में अपने सही स्तर पर बनाए रखती है। कंप्यूटर एनीमेशन श्रेणी की इस फिल्म की कहानी दो शिशु भालुओं से शुरू होती है। जंगल में आग लगती है। दोनों की मां इसकी वजह देखने भागती है और फिर वापस नहीं आती। दोनों बच्चे बड़े होते हैं। उनका एक दोस्त उन्हें विज्ञान प्रदर्शनी में रोबोट बनाकर ले जाता है। और, वहीं उन्हें दिखता है वो करामाती पत्थर, जो उनकी मां पहना करती थी। कृत्रिम मेधा (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) की एक वैज्ञानिक भी उनसे आ मिलती है और इस वैज्ञानिक के पीछे लगा है एक खतरनाक गैंग, जिसकी प्याज की परतों सी खुलती कहानी फिल्म का रोमांच आखिर तक बनाए रखती है।
'बूनी बियर्स गार्जियन कोड' रिव्यू
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फिल्म ‘बूनी बियर्स गार्जियन कोड’ बीते साल चीन में जब रिलीज हुई थी तो ये अपनी इस फ्रेंचाइजी की सबसे कामयाब फिल्म बनी थी। अब तक 200 मिलियन डॉलर कमा चुकी इस फिल्म को इस साल अंग्रेजी व दूसरी भाषाओं में रिलीज किया गया है। फिल्म तकनीकी तौर पर शुरू में थोड़ी सपाट लगती है लेकिन इसके एनीमेशन धीरे धीरे असर करते हैं और कुछ देर बाद कहानी की लय में दर्शकों को शामिल करने लगते हैं। एनीमेशन फिल्मों का दुनिया भर के बच्चों खूब चाव रहा है। भारतीय कंपनियां सिनेमाघरों में रिलीज करने लायक ज्यादा एनीमेशन फिल्में बनाती नहीं हैं, ऐसे में चीन के बाद अब दूसरे देशों की एनीमेशन फिल्मों का देसी सिनेमाघरों में रिलीज होना शुरू हो सकता है। फिल्म ‘बूनी बियर्स गार्जियन कोड’ इस दिशा में एक सही रणनीति का काम करती नजर आती है।
'बूनी बियर्स गार्जियन कोड' रिव्यू
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फिल्म ‘बूनी बियर्स गार्जियन कोड’ यूनिवर्सल अपील वाली फिल्म है। इसकी कहानी किसी भी देश में घट सकती है। दो भालू के बच्चे हैं। उनकी एक मां है जो दोबारा मिलने पर खुद को इनकी मां नहीं मानती। उसका रंग रूप भी बदल चुका है। कवच कुंडल धारण कर वह जिस युवती के पीछे लगी है, बड़े हो चुके दोनों भालू के बच्चे उसे बचाने के लिए जान की बाजी लगाए हुए हैं। कहानी में कुछ और किरदार भी इसमें रंग मिलाते रहते हैं और कुछ दूसरे किरदार रंग में भंग डालते रहते हैं। कहानी के स्तर पर फिल्म थोड़ा उलझी हुई है। समान और सीधी गति न पकड़कर इसकी पटकथा अलग अलग समयधाराओं में आगे पीछे डोलती रहती है। बच्चों को बार बार आने वाले ये फ्लैशबैक थोड़ा परेशान कर सकते हैं लेकिन बड़ों के लिए यही फिल्म के रोचक मोड़ भी हो सकते हैं।
'बूनी बियर्स गार्जियन कोड' रिव्यू
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कंप्यूटर एनीमेशन फिल्मों में सबसे ज्यादा जोर इन दिनों वातावरण को उभारने में रहता है लेकिन फिल्म ‘बूनी बियर्स गार्जियन कोड’ का फोकस इसके किरदारों पर ज्यादा है। जंगल, जमीन और जल की इस कहानी में अगर हिंदी डबिंग करते समय लोकप्रिय भारतीय कलाकारों की आवाजें ली जातीं और इसका प्रचार कुछ अरसा पहले से शुरू किया जाता तो छोटे शहरों में इस सप्ताहांत इस फिल्म का अच्छा माहौल बन सकता था। फिल्म अपनी मेकिंग और अपनी तकनीक में अच्छी बन पड़ी है। अगर आपके नजदीकी सिनेमाघरों में लगी हो और घर पर स्कूल जाने वाले बच्चे हों, तो उनके साथ ये फिल्म जरूर देख आइए। उनको आनंद आएगा। आपके लिए भी डेढ़ घंटे का अच्छा मनोरंजन रहेगा।