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Wakanda Forever Review: टूटकर बिखरने वाले मसीहाओं की रोचक दुनिया, एमसीयू प्रशंसकों को बांधे रखना बड़ी चुनौती

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वकांडा फॉरएवर - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
ब्लैक पैंथर-वकांडा फॉरएवर
कलाकार
टेनोच हुएर्टा , लेटिटिया राइड , एंजेला बैसेट , लेक बेल और लुपिटा न्यॉन्गो आदि
लेखक
रयान कूगलर और जो रॉबर्ट कोल
निर्देशक
रयान कूगलर
निर्माता
केविन फाइगी और नेट मूर
रिलीज
11 नवंबर 2022
रेटिंग
2/5

मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (एमसीयू) की दुनिया में लोगों के दिलों को झकझोर देने वाला ये भावुक पल है। चार साल पहले फरवरी में फिल्म ‘ब्लैक पैंथर’ रिलीज हुई। ये फिल्म हॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री के साथ साथ विश्व सिनेमा में अश्वेत कलाकारों का एक ऐसा मील का पत्थर बनी जिसने पूरी दुनिया का उस अश्वेत सुपरहीरो से संपूर्ण परिचय कराया जो अपने देश वकांडा में ही मिलनी वाली अलौकिक धातु वाइब्रेनियम का जनहितकारी उपयोग करना चाहता है। वह उदार है, मानवीय गुणों से भरपूर है और उसका एक ऐसा विस्तारित परिवार है, जिसमें द्वेष, घृणा और बदले की भावनाएं उफान पर दिखीं। फिल्म ‘ब्लैक पैंथर’ की सीक्वल  ‘वकांडा फॉरएवर’ तक आते आते एक बड़ा हादसा इस दौरान ये हुआ कि ब्लैक पैंथर का किरदार निभाने वाले अभिनेता चैडविक बोसमैन नहीं रहे। निर्देशक रयान कूगलर ने जो रॉबर्ट कोल के साथ मिलकर सीक्वल की जो कहानी लिखी, वह अब पूरी तरह बदल चुकी है। और, इस बदलाव को दर्शकों की भावनाओं के साथ जोड़े रखना ही फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ की सबसे बड़ी चुनौती है।

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वकांडा फॉरएवर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वकांडा है सदा के लिए
दुनिया में नायकों की कमी लगातार होती जा रही है। सर्वहारा समाज की आवाज उठाने वाले सत्ता में आते ही बदलते दिखते हैं। पिछली फिल्म में जब टीचाला का चचेरा भाई ब्लैक पैंथर बनता है तो वह उन सारी बेलों को जला देता है जिनमें अपने तेज से चमकने वाले फूल उगते हैं। इन फूलों में ही किसी इंसान को ब्लैक पैंथर की शक्ति देने की ऊर्जा है। फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ शुरू होती है पिछले ब्लैक पैंथर की टूटती सांसों को बचाने की कोशिश से। लेकिन, होनी टल नहीं पाती। पूरा वकांडा शोकाकुल है। सफेद कपड़े पहने राजसी परिवार के लोग शवयात्रा लेकर निकलते हैं। पूरा समाज शोकाकुल तो है पर वह मृत्यु को उत्सव भी मानता है। संगीत बज रहा है। दीवार पर चैडविक बोसमैन की तस्वीर दिखती है। और कहानी सीधे वहां आ जाती है जहां टीचाला की मां रानी रामोंडा राज सिंहासन पर बैठी दिखती है। दुनिया को वाइब्रेनियम का पता चल चुका है और सबकी कोशिश इसे येन केन प्रकारेण हासिल करने की है।

वकांडा फॉरएवर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
उत्तरजीविता का अनदेखा संघर्ष
फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ की कहानी का आधार पाताल में बसी उस दुनिया से जुड़ता है जहां पहली बार पता चलता है कि वाइब्रेनियम का स्रोत वकांडा के अलावा कहीं और भी है। एक किशोरी ने खेल खेल में जो स्कूल प्रोजेक्ट बनाया, वह अमेरिका के लिए वाइब्रेनियम खोजने का सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। और, पाताल लोक की इस दुनिया टलोकन में पूजनीय बन चुका राजा नामोर नहीं चाहता कि कोई और वहां से वाइब्रेनियम ले जा सके। वह इस मशीन के लिए वकांडा को दोषी मानता है, उसे उस वैज्ञानिक की तलाश है जिसने वाइब्रेनियम खोजने की मशीन बनाई। वकांडा और टलोकन आमने सामने हैं। नामोर और रामोंडा के उद्देश्य एक हैं लेकिन इन्हें हासिल करने के उद्देश्यों को लेकर दोनों का टकराव होता है। इसी टकराव से निकलती है फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ की बाकी कहानी।

वकांडा फॉरएवर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
स्त्री सशक्तिकरण का फैलता भ्रमजाल
केविन फाइगी ने एमसीयू में स्त्री सशक्तिकरण की एक चिंगारी फिल्म ‘कैप्टन मार्वल’ से सुलगाई थी। इसके बाद मिस मार्वल, लेडी हल्क, स्कारलेट विच से होते होते ये दुनिया उस मोड़ पर आ चुकी है, जहां केविन फाइगी का ये प्रयोग उनकी अपनी सोच पर भारी पड़ने लगा है। रानी रामोंडा के अलावा फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ के केंद्र बिंदु हैं राजकुमारी शूरी, जनरल ओकाये और नया किरदार नामोर। फिल्म के निर्देशक रयान कूगलर की गिनती दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में इस तथ्य के चलते हो चुकी है कि उन्होंने अश्वेत किरदारों की कहानियों को विश्वव्यापी बनाया। ‘क्रीड’ में बोया उनका बीज ‘ब्लैक पैंथर’ में वटवृक्ष बना और इस वटवृक्ष के नीचे उन्हें एक नया ब्लैकपैंथर फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ में बोने की चुनौती मिली। चुनौती उनके सामने ये भी रही कि दुनिया भर में ‘ब्लैक पैंथर’ का पर्याय बन चुके चैडविक बोसमैन के न रहने पर वह इस कहानी को कैसे आगे बढ़ाएं!

वकांडा फॉरएवर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
एमसीयू की कहानियों का एकाकी मोड़
फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ में एमसीयू का कोई दूसरा किरदार नहीं है। ये सिर्फ और सिर्फ वकांडा के आंतरिक संघर्षों और इसके सामने पानी के भीतर से आई आफत पर केंद्रित फिल्म है। हनुमान को अपना भगवान मानने वाले जबूरी कबीले के सरदार एमबाकू पर दर्शकों की उम्मीदों भरी निगाहें टिकी रहती हैं। जनरल ओकाये का अपने मिशन में विफल होते देखना दर्शकों को खटकता है। खटकता ये भी की टीचाला की प्रेमिका नामोरी कहानी में इतनी देर से क्यों आती है? या कि ओकाये की विश्वासपात्र अनेका का कहानी के विस्तार में जो प्रभाव होना चाहिए था वह क्यों नहीं बना? सीआईए एजेंट एवरेट रॉस की अपनी पूर्व पत्नी से नोकझोंक का कोण भी किसी तरह का त्रिकोण नहीं बना पाता है। और, फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ का सबसे कमजोर पहलू तब उभरकर सामने आता है जब नए ब्लैक पैंथर का परदे पर स्वागत करने के लिए सिनेमा हॉल में बैठा एक भी दर्शक तालियां नहीं बजाता। समझने पर मजबूर होना पड़ता है कि रयान कूगलर से गलतियां कहां हुईं?

वकांडा फॉरएवर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

नए राजकुमार का नया सवेरा
फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ खत्म होती है तो एक नई उम्मीद छोड़ती है। ‘ब्लैक पैंथर विल बी बैक’ का नारा भी बुलंद होता है। लेकिन एमसीयू की अपनी लोकप्रियता और अपनी मनोरंजन क्षमता के साथ फिर से बड़े परदे पर दमदार वापसी कब होगी, ये सवाल भी फिल्म छोड़ जाती है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ आशाओं, उत्कंठाओं और उम्मीदों की जमीन पर बदलती दुनिया के नजरिये से उगती नई फसल है लेकिन महिला सशक्तिकरण की बात अब एमसीयू की कहानियों में थोपी हुई लगने लगी है। इसका जो स्वाभाविक विकास इस दुनिया में होना चाहिए था, उससे केविन फाइगी भटकते दिख रहे हैं। एमसीयू के आभामंडल का अपना आकर्षण है। हो सकता है, उसके चलते फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छी ओपनिंग मिल भी जाए लेकिन फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ लंबी रेस में टिक पाएगी, इसमें संशय है।

 

वकांडा फॉरएवर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जरूरत से ज्यादा लंबी फिल्म और ढेर सारे किरदार
करीब पौने तीन घंटे की फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ में किरदारों की भरमार है। एक किरदार से दर्शक का रिश्ता बनने ही वाला होता है कि रयान कूगलर एक नया किरदार चौसर पर फेंक देते हैं। रानी रामोंडा बनी एंजेला बैसेट का प्रभावशाली अभिनय फिल्म को अपनी पकड़ में बनाए रखने की कोशिश तो करता है लेकिन बागी राजकुमारी शूरी के रूप में लेटिटिया राइट की सोच के साथ उनका संघर्ष लगातार बना रहता है। ये संघर्ष कभी अंतिम संस्कार के कर्मकांडों के दौरान सामने आता है तो कभी संघर्ष में अपनाई जाने वाली रणनीति को लेकर। ओकाये के रुप में डनाई गुरिरा का किरदार भी हाशिये में ही अटका रह जाता है और एमबाकू बने विन्स्टन ड्यूक का पिछली फिल्म में ब्लैक पैंथर को बचाने का सूत्र यहां विकसित होने ही नहीं पाता। नामोर के रूप में टेनोच हुएरटा मेजिया का अभिनय असर छोड़ता है और रिरी विलियम्स की अपनी छोटी सी भूमिका में डोमिनिक थोर्न से भी आने वाली फिल्मों में उम्मीदें बंधती हैं।

ब्लैक पैंथर वकांडा फॉरएवर का अफ्रीका में हुआ प्रीमियर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सवालों के घेरे में घिरी फिल्म
फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ कहानी और पटकथा से मात खाई फिल्म है। ऑटम डुराल्ड अर्कापॉ की सिनेमैटोग्राफी की कमी ये है कि वह दर्शकों को कहानी का हिस्सा बनाने की कोशिश ही नहीं करती। लेकिन, इसके बावजूद फिल्म में इसके कलाकारों का अभिनय दर्शकों को अपने साथ बांधे रखने की पूरी कोशिश करता है। अश्वेत कलाकारों और किरदारों की इस फिल्म का उजला पहलू लुडविग गोरानसन का संगीत है जो दर्शकों की धमनियों में रक्तसंचार की गति बढ़ाने में कई मौकों पर सफल है। रुथ कार्टर ने कहानी के हिसाब से अलग अलग लोकों की वेशभूषा बहुत शानदार ढंग से गढ़ी है। लेकिन, मार्वल स्टूडियोज के सामने फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ ने एक बड़ी चुनौती ये फेंकी है कि क्या इन कहानियों को अब दुनिया के दूसरे देशों के दर्शकों के नजरिये से देखने का समय नहीं आ गया है? या फिर कि एमसीयू की कहानियों को देखकर आह्लादित होने वाले दर्शकों को इनकी शुरुआत के 14 साल बाद भी बांधे रखने के लिए एक लोमहर्षक कहानी कब आएगी? फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ इन्हीं सवालों से घिरी फिल्म है और दिक्कत ये है कि इन सवालों के जवाब फिल्म ‘वकांडा फॉरएवर’ में नदारद हैं।
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