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Bawaal Review: प्रिय अज्जू भैया, अत्र कुशलं तत्रास्तु, सुने बिना हेलमेट निकलते हो तो ट्रैफिक वाला सलाम करता है

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बवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
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Movie Review
बवाल
कलाकार
वरुण धवन , जान्हवी कपूर , मनोज पाहवा , अंजुमन सक्सेना , प्रतीक पचौरी , व्यास हेमंग , शशि वर्मा और मुकेश तिवारी
लेखक
नितेश तिवारी , अश्विनी अय्यर तिवारी , निखिल मल्होत्रा और श्रेयस जैन
निर्देशक
नितेश तिवारी
निर्माता
साजिद नाडियाडवाला और अश्विनी अय्यर तिवारी
रिलीज
21 जुलाई 2023
ओटीटी
प्राइम वीडियो
रेटिंग
2/5

 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        प्रिय अज्जू भैया,

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ईश्वर कृपा बनी रहे...
अत्र कुशलं तत्रास्तु! समाचार ये है कि आपका पूरा नाम अब भी तमाम लोगों को यहां याद नहीं रहता है। किसी को बताओ कि अज्जू भैया का पूरा नाम अजय दीक्षित है तो वह चौंक जाता है। ये सब कहते हैं कि अवध के ब्राह्मण के ऐसे लक्षण तो नहीं होते। सुना है शाम को तुम रोज दारू पीते हो अपने उस चपड़गंजू के साथ। लखनऊ के हजरतगंज चौराहे से बिना हेलमेट के बुलेट से निकल जाते हो और ट्रैफिक वाला सिपाही चालान करने की बजाय तुम्हें सलाम करता है। कई बार तो लगता है कि मोटरसाइकिल किसी ट्रॉली पर लदी है और तभी कैमरा कभी जूम आउट नहीं होता, तुम्हारी बाइक सवारी के समय। बात कुछ हमें तो हजम नहीं होती, हां, इससे तुम्हारी इमेज जइसी भी है वो कइसे बनेगी, पता नहीं।

बवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

अच्छा ये बताओ, अज्जू भैया कि इतिहास का अध्यापक बनने के बाद तुमने अपना गोत्र वोत्र तो नहीं बदल लिया अपना। मरजाद वगैरह तो याद है ना। ऐसा इसलिए क्योंकि लोग तुम्हें जब उघारे देखते हैं तो तुम्हारे बाइसेप्स, ट्राईसेप्ट जो भी दिखें वो तो ठीक है लेकिन ई कांधे पर जनेऊ काहे नहीं दिखता। का, बांभन होकर भी बिना जनेऊ के ही ब्याह कर लिए और जब ब्याह किए हो तो बहू को घर से बाहर लेकर भी जाना चाहिए। ये ठीक है कि अब गौना वगैरह नहीं होता और तुम्हें भी अब लगने ही लगा है कि शादी के 10 महीने हो गए और बहू को घुमाने ले जाना चाहिए लेकिन ये स्कूल में विधायक के बेटे को तमाचा मारने की क्या जरूरत थी। और, विधायक भी उत्तर प्रदेश का अइसा कि स्कूल के कामकाम में दखलंदाजी कर रहा है। अपने हिसाब से बच्चों का ‘सरप्राइज टेस्ट’ ले रहा है। देखने में कुछ कुछ ‘चाइना गेट’ के जगीरा जैसे लगते इस विधायक के बारे में योगीजी को पता चल गया तो पता है न कि क्या होगा?

बवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

अच्छा एक बात यू बताऔ कि ई तुम्हाई अम्मा लखनऊ की पंडिताइन होने के बाद भी जै नर्मदा मइया काहे कहती हैं। गुजरात से बियाह के लाए थे क्या पापा तुम्हारे। पापा ने कभी उनको टोका नहीं कि लखनऊ में नर्मदा नहीं गोमती नदी है। पंडितों में जै गंगा मइया तो सब कहते हैं, जै नर्मदा मइया कहने वाली तुम्हारी अम्मा ही इकलौती हैं। हां, एक बात है अज्जू भैया। प्यार तो तुमको दोनों ढेर करते हैं, नहीं तो बैंक के बाबुओं के घर में दारू पीकर रात में घर आने वाले लड़के का प्रवेश निषेध ही रहता है। और, हां। तुम्हारे यूरोप भ्रमण के बारे में भी जाना। द्वितीय विश्व युद्ध के बहाने तुम्हारे और बहू के बीच प्रेमालाप हो पाएगा, ये जानकर खुशी हुई है।

बवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

वइसे, तुम्हें लगता नहीं कि ये कुछ ज्यादा हो गया है। एक तो तुम हिंदी ठीक से बोल नहीं पाते हो। करोड़ को करोड बोलते हो। अंग्रेजी तुम्हारी माशाअल्लाह है ही। वइसे स्कूल कित्ते तक गए तुम कि टीचर बन गए। फ्रेंच के दो तीन शब्द सीखकर बकैती करोगे तो पता है न एयरपोर्ट पर ही धर लिए जाओगे। मास्टरों वाले लक्षण तो तुम में एक भी नहीं है। एक नंबर के बदमाश रहे हो तुम। याद है ना वो क्रिकेट मैच जिसमें तुमने पांच रन बनाए थे। बहू की संगत में कुछ दिन रहोगे तो शायद तुम्हारे लक्षण सुधरें। गुण तो तुम दोनों के एक भी मिलते है नहीं। वइसे ठीक ये भी है कि बाहर की लड़ाई खत्म हो जाती है और भीतर की पता ही नहीं चलता कि कब खत्म होगी, लेकिन कुछ तो तारतम्य होना चाहिए न बातों में और कहावतों में। निशा को पढ़वा देना अगला पैरा।

बवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

बहू, चिट्ठी तो अज्जू के नाम है लेकिन दो चार लाइनें तुम्हारे लिए अलग से। तुम सुंदर हो, सुशील होने का नंबर आता है तो सुशील लगती भी हो, लेकिन तुम्हें लगता नहीं कि ये जबर्दस्ती का हेन टेन तुम पर अब सूट नहीं करता। होंठ देखकर लोग तो सवाल पहले से करते रहे हैं कि कुछ न तो कुछ सर्जरी जरूर बहू ने करा रखी है। ऊपर से विदाई से ठीक पहले जो हुआ वो अच्छा नहीं हुआ। फिर भी तुम टॉपर लड़की रही हो और अज्जू तुम्हारे साथ रहकर अपनी इमेज बनाने के चक्कर में है। इसलिए कहे दे रहे हैं कि अपना ख्याल रखना और वो जो काला सफेद याद आता रहता है न अज्जू को दुनिया की दूसरी लड़ाई को लेकर, उसके झांसे में मत पड़ना। सब माया है।

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बवाल - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई

अज्जू भैया, तुमसे हम सबको बड़ी उम्मीदें रही हैं, लेकिन चार चार लोग मिलकर भी तुम्हारी कहानी इस बार भी सेट कर नहीं पा रहे हैं। नितेश से कहना कि लड़के छिछोरपंथी के अलावा भी बहुत कुछ करते हैं कानपुर, लखनऊ के। कहानी सही बनाया करें। ये क्या बना दिया है तुमको, न ‘दंगल’ का महावीर बनने दिया और न ‘छिछोरे’ का रैगी। और, बीच वालों का हश्र क्या होता है, तुमको पता ही है। आशा करते  हैं कि तुम्हारे अच्छे दिन जल्दी आएंगे। और, अगली बार गाना बजाना भी थोड़ा ढंग का करोगे। ‘बवाल’ का सही मतलब भी ईश्वर तुम सबको जल्दी समझाएं, यही गंगा मैया से प्रार्थना करते हैं। चिट्ठी लिखने में थोड़ी देर हो गई, इसलिए कि तुमाए शहर लखनऊ के पास ही फतेहपुर चौरासी, उन्नाव में लाइटै नहीं रही छत्तीस घंटे से। ट्रांसफॉर्मर बदलने में ही हियां इत्ता टाइम लग जाता है। बाकी तुम मस्त रहो। अपना ख्याल रखो और चिट्ठी लिखते रहा करो। ‘बवाल’ तुम्हारा इस बार ठीक से कटा नहीं है। अगली बार लखनऊ कानपुर के आसपास का बकर बनना हो ना तो पहले से बताना। बहुत मसाला है हमरे पास।

तुम्हारा शुभचिंतक

लिखैया

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