'बंदों में था दम' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कहानी ‘बंदों में था दम’ की
चार एपीसोड की सीरीज ‘बंदों में था दम’ कोरोना काल में क्रिकेट के एक ऐसे करिश्मे की कहानी है जिसकी चर्चा दर्शकों के बीच उतनी हो नहीं सकी, जितनी होनी चाहिए थी। गावस्कर और बॉर्डर ट्रॉफी के नाम से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट मैच सीरीज होती है। पिछली सीरीज के मैचों के दौरान ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम दर्शकों से लेकर वहां के खिलाड़ियों और पत्रकारों के सीधे निशाने पर रही। कभी खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर उनकी खिंचाई हुई तो कभी बायो बबल तोड़ने को लेकर वे निशाने पर रहे। इन खिलाड़ियों पर ‘स्वार्थी’ होने के आरोप लगे और टीम के कप्तान का अधिकतर समय खेल पर ध्यान देने की बजाय इन विवादों पर सफाई देते ही बीता। लेकिन, विपरीत परिस्थितियों में भारतीय क्रिकेट के उभरते खिलाड़ियों ने जो जज्बा और जुनून वहां दिखाया, उसी की कहानी है सीरीज ‘बंदों में था दम’।
'बंदों में था दम' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आर अश्विन की गुगलियां
वेब सीरीज ‘बंदों में था दम’ में भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे को ऐतिहासिक बताने और बनाने की कोशिश है। ये एक तरह से उन खिलाड़ियों की ब्रांडिंग भी करती है जिनके बूते भारत ने वहां कमाल कर दिखाने में कामयाबी हासिल की। सीरीज की धुरी आर अश्विन पर टिकी है। सीरीज जहां भी नीरस होती दिखती है, वह परदे पर आकर दर्शकों को साथ जोड़े रखने के लिए कुछ फुलझड़ियां छोड़ जाते हैं। आर अश्विन इससे पहले भी यूट्यूब पर काफी शोहरत बटोर चुके हैं और यहां भी नीरज पांडे की पूरी कोशिश उनकी इसी शोहरत का फायदा उठाने की है।
'बंदों में था दम' रिव्यू
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सीरीज के साथी सितारे
वेब सीरीज ‘बंदों में था दम’ में की स्क्रिप्ट कुछ इस तरह से लिखी गई है कि पूरी टेस्ट सीरीज का असल हीरो आर अश्विन को ही बनाती दिखती है। इस सीरीज में हालांकि चेतेश्वर पुजारा ने काफी हिम्मत वाला काम किया था। लेकिन, उनका दमखम आखिरी एपीसोड में ही सामने आता है। लाइनें भी उनकी ऐसी लिखी गई हैं कि उनमें रोमांच नहीं दिखता। अजिंक्य रहाणे पर भी कैमरा उतना नहीं टिकता जितना काम टेस्ट सीरीज में उनका रहा है। इसी तरह मोहम्मद सिराज, वाशिंगटन सुंदर औऱ ऋषभ पंत भी सीरीज के साइड हीरो के तौर पर सामने आते हैं।
'बंदों में था दम' रिव्यू
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देखें कि ना देखें
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली हर टेस्ट सीरीज खास रही है। कंगारुओं को हराकर ही भारत ने दुनिया भर में टेस्ट क्रिकेट में सम्मान पाने की शुरुआत अतीत में की और अब भी जब भी दोनों टीमें ऑस्ट्रेलिया में आमने सामने होती हैं, पूरी दुनिया की नजर इन मैचों पर टिकी रहती है। कोरोना काल में अगर आप इस पिछली टेस्ट सीरीज के अनमोल क्षणों को नहीं देख पाए हों तो इसे पूरी नाटकीयता के साथ परदे पर पेश करती है वेब सीरीज ‘बंदों में था दम’। सीरीज तकनीकी तौर पर हालांकि कमजोर है, लेकिन क्रिकेट के दीवानों को तो ड्रेसिंग रूप की कहानियों में दिलचस्पी रहती है और उस लिहाज से ये सीरीज एक बार तो देखी ही जा सकती है।