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Bada Naam Karenge Review: अब ओटीटी पर चमका राजश्री का ‘सूरज’, बताया- जेन जी को परखने की नहीं समझने की जरूरत

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बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
बड़ा नाम करेंगे (वेब सीरीज)
कलाकार
रितिक घनशानी , आयशा कडुस्कर , कंवलजीत सिंह , अलका अमीन , राजेश जैस , चैत्राली लोकेश , दीपिका अमीन , जमील खान , राजेश तैलंग , अंजना सुखानी और सचिन विद्रोही
लेखक
एस मनस्वी और विदित त्रिपाठी
निर्देशक
पलाश वासवानी
निर्माता
राजश्री प्रोडक्शंस
ओटीटी
सोनी लिव
रिलीज
7 फरवरी 2025
रेटिंग
4/5
गीतकार आनंद बक्षी का गाना याद है न, प्रेम कहानी में एक लड़का होता है, एक लड़की होती है, कभी दोनों हंसते हैं, कभी दोनों रोते हैं...! देखा जाए तो हर प्रेम कहानी में तकरीबन यही होता है। बस ये दोनों कब हंसते हैं और कब रोते हैं, किसकी वजह से हंसते-रोते हैं, और अपने साथ दर्शकों को हंसा या रुला पाते हैं कि नहीं, इसी में किसी प्रेम कहानी की सफलता या विफलता छिपी होती है। और, पिछले 63 साल से हिंदी फिल्में बनाती आ रही फिल्म निर्माण कंपनी राजश्री प्रोडक्शंस को इसी में महारत हासिल है। इनकी तमाम प्रेम कहानियों में एक सतत अंतर्धारा जो देश, काल और परिस्थितियों से परे होते हुए भी निरंतर दिखती है, वह हैं अमीर परिवारों के पारिवारिक संस्कार। और, हालात के चलते इनके सामने आ खड़े होने वाले किसी गरीब या मिडिल क्लास पिता का अपनी बेटी पर अभिमान और अपने स्वाभिमान के आगे बड़े से बड़े धन कुबेर को बौना साबित कर देना...! ‘मैंने प्यार किया’ याद है ना, जब सुमन का पिता अपने पुराने सखा प्रेम के पिता को उसके घर में रही अपनी बेटी पर हुआ खर्चा बताने को कहता है...!!
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बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कहानी से ऋद्धि-सिद्धि का श्रीगणेश
आमतौर पर होता यही है अमीरी-गरीबी की प्रेम कहानी में रईसों को निष्ठुर, निर्लज्ज और निर्मोही दिखाया जाता है, लेकिन कहानी राजश्री प्रोडक्शंस की अंगीठी में पक रही हो और इसे बनाने वाला सूरज बड़जात्या जैसा फनकार अपने इंटरव्यू की शुरुआत ही इसके लेखक एस मनस्वी के जिक्र से करता हो, तो मामला इतना सरल भी नहीं होता। कहानी यहां है उज्जैन के गुप्ता परिवार की बिटिया के रतलाम के राठी परिवार के बेटे से होने वाले रिश्ते की। रिश्ता बनाने की बात से ही कहानी शुरू होती है। फिर पीछे कोरोना संक्रमण काल में वहां जाती है, जहां दोनों संयोग से या कह सकते हैं कि दुर्योग से, पांच दिन एक ही घर में एक ही छत के नीचे रहने को मजबूर हो गए। दोनों एक दूसरे को पहले से जानते हैं, ये बात बताने का समय निकलने को होता है कि ‘फूफाजी’ नाराज हो जाते हैं और बच्चों का आशियाना बसने से पहले ही उजाड़ने को आमादा हो जाते हैं। बच्चों की पसंद, नापसंद के लिए बड़ों के बदलने की कोशिशों पर आकर बात दम लेती है, और बताती है कि अगर पसंद का ऐसा साथी साथ हो, जिसका हाथ अपने हाथों में लेकर आप कहीं भी निकल सकते हों, तो वाकई दोनों मिलकर ‘बड़ा नाम करेंगे’।

बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी वेब सीरीज का इतना बड़ा एपिसोड मैंने तो अब तक नहीं देखा, लेकिन कमाल है कि पूरे एपिसोड में आप मिनट भर को भी बोरियत महसूस करें। एस मनस्वी और विदित त्रिपाठी की जोड़ी ने कथा, पटकथा और संवादों का जो ताना-बाना यहां सजाया है और क्लाइमेक्स पर आकर कन्हैया की जिस पालकी ने दर्शकों को राठी परिवार के साथ रुलाया है, उसे जल्दी भूल पाना आसान नहीं है...
मेरी राहों के सारे तू मझधार सजा देना,

मैं जैसे ही डूबन लागूं तू उस पार लगा देना,
नैनों से मैं नाम पुकारूं, 
नैन मेरे पढ़ जाना..
मैं तुझसे अब क्या ही चाहूं, 
तू सब जाने कान्हा....

बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पिता का स्वाभिमान उसकी बेटी..
इस भक्ति गीत के गीतकार जूनो हैं, गायक और संगीतकार ‘गुल्लक’ वाले अनुराग सैकिया हैं और दोनों ने मिलकर क्या ही गजब संगीत बनाया है वेब सीरीज ‘बड़ा नाम करेंगे’ का। पलाश वासवानी सीरीज के निर्देशक हैं। ‘गुल्लक’ के दो सीजन बना चुके हैं। वहां मिश्रा परिवार के मुखिया बने जमील खान यहां गुप्ता परिवार के मुखिया हैं। दो बेटे और एक बेटी के पिता हैं। गणित के प्रोफेसर हैं। कोरोना में तनख्वाह आधी हो चुकी है। लेकिन बिटिया की शादी की बात आती है तो मुस्कुराकर कहते हैं, ‘मम्मी को मत बताना, पर सेविंग्स है मेरे पास’। हालात बदलते हैं, दिल टूटता है तो अस्पताल भी पहुंच जाते हैं। वहां भी बिटिया जब अपने साथी ऋषभ के लिए कहती हैं, ‘पापा, ऋषभ बहुत अच्छा लड़का है’ तो जवाब में सवाल आता है, ‘मुझसे भी अच्छा लड़का है?’ बिटिया निरुत्तर हो जाती है और सजल नेत्रों से कहती है, ‘वो तो पॉसिबल ही नहीं है।’ देखने वाले का गला भर आता है। पिता अपनी बेटी को समझाता है, ‘सच बोलना कोई मुश्किल काम नहीं है, लेकिन झूठ की माफी मांगकर सच बोलना मुश्किल होता है।’ आयशा कडुस्कर का भोलापन सीरीज में कमाल है। सोनी के ही धारावाहिक ‘ये उन दिनों की बात है’ से लोग उन्हें पहचानते हैं। और, जमील खान ने ‘मैंने प्यार किया’ के आलोक नाथ को यहां पीछे छोड़ दिया है।

बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ये धनिया भी लाने वाला लड़का है..
और, बेटे के घर वाले? उनका अहंकार अलग ही लेवल का है। बेटा जब तक गलती माने, या झूठ की माफी मांगकर सच बोलने की हिम्मत करे, सारी बात सारा परिवार अपने अपने हिसाब से समझ चुका है। फूफाजी की तहकीकात पर भला सवाल ही कौन उठाएगा। वह घर के जमाई बाबू हैं। राठी परिवार के मुखिया बने कंवलजीत के हवाले परंपरा, प्रतिष्ठा और अनुशासन है। छोटे भाई बने राजेश जैस यहां लक्ष्मण सरीखी भूमिका में हैं। जेठानी अलका अमीन की जिद है कि दिवाली पर सबके यहां हाथ से बने लड्डू ही जाएंगे। उधर, बड़ी बहू ने घर के बड़े बेटे को ‘पटाकर’ जुम्बा क्लासेस जाना शुरू कर दिया है। और, छोटा बेटा? यानी अपना हीरो रितिक घनशानी? वह 2025 का प्रेम है। गिटार भी बजाता है। और, सेव डालकर मैगी भी परोसता है। मां कहती है, ‘गुलाब लाने वाले लड़के तो बहुत मिल जाएंगे लेकिन जो लड़के धनिया लाना जानते हैं, जिम्मेदारी वही उठाते हैं।’ ऋषभ धनिया, पुदीना सब लाने वाला लड़का है। बड़ों का लिहाज करता है और उनके लिहाज में कभी बोल नहीं पाता। लेकिन, घर की दबी औरतों की वह आवाज बनता है। उसकी साथी कहती है, ‘अपनी वाइफ की रेसपेक्ट वही लड़के करते हैं, जिन्होंने घर में अपनी मां की रेसपेक्ट होते देखी हो।’ कंवलजीत, अलका अमीन, राजेश जैस, चैत्राली, साधिका सयाल और ओम दुबे ने खूब मिलकर राठी परिवार खिलाया है। अंजना सुखानी प्रेम की मारी बुआजी हैं और बात बात पर अपनी विशेष टिप्पणी देने वाले फूफा जी बने राजेश तैलंग हैं। और, इस बगिया का गुलाब है, ऋषभ यानी रितिक घनशानी। बहुत ही प्रभावशाली अभिनय है इस युवा अभिनेता का। बस नाम प्रेम नहीं है, है ये पूरा का पूरा सूरज बड़जात्या का प्रेम ही।

बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अनुराग सैकिया का म्यूजिक नंबर वन
रतलाम के पोहे, सेव और वहां के कलाकंद और उज्जैन की खास बोली सब इस सीरीज में है। हीरो के साथ घरवालों की तरफ से भेजे गए सेवक के रूप में सचिन विद्रोही वाले सीन में पीछे टीवी पर जब फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ में सलमान खान और लक्ष्मीकांत बेर्डे वाला सीन चलता दिखता है तो समझ आता है कि कैसे राजश्री की विरासत मे सेवकों को भी सम्मान देने की परंपरा चली आ रही है। ऋषभ के दोस्त मोंटी बने प्रतीश मेहता ने दोस्ती की बात को आगे बढ़ाया है। पूरी सीरीज में फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के तकरीबन सारे गाने बैकग्राउंड में बजते सुनाई देते हैं, लेकिन दिल में हूक उठाते हैं राजश्री की सुपर डुपर हिट फिल्म ‘दोस्ती’ के गाने। मोहम्मद रफी की आवाज, मजरूह सुल्तानपुरी के बोल और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारे लाल का। नई सदी की सिचुएशन में भी ‘दुख तो अपना साथी है’ सुनना कितना कर्णप्रिय लगता है। और, उतनी ही कर्णप्रिय लगती हैं अमृता प्रीतम, कमल भार्गव और काका हाथरसी की वे कविताएं जो यहां कहानी की नायिका सुनाती है। हिंदी कविताओं से प्रेम करने वाली किसी हिंदी फिल्म सीरीज या कहानी की नायिका आखिरी बार कब देखी थी आपने?
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बड़ा नाम करेंगे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नए दौर की बिल्कुल अपनी सी कहानी
गालियों की बौछार वाली वेब सीरीज के दौर में बिल्कुल सहज, सरल और सुंदर प्रयास वाली वेब सीरीज ‘बड़ा नाम करेंगे’ को आप पूरे परिवार के साथ बैठकर इस सप्ताहांत शुक्रवार, शनिवार और रविवार को देख सकते हैं। करीब सवा सात घंटे की पूरी सीरीज है। दो-दो घंटे रोज देखेंगे तो तीन दिन में पारायण हो सकता है, वैसे बिंज वॉच के लिए साल की ये पहली परफेक्ट सीरीज है। हां, साफ तौलिया या रूमाल साथ जरूर रखें क्योंकि रुलाती ये सीरीज भर भर के है। मुस्कारने के लम्हे भी ये बार बार लाती है। राजश्री की फिल्में देखकर बड़ी हुई दो पीढ़ियों के साथ पल रही तीसरी पीढ़ी की ये कहानी है। और इन तीनों पीढ़ियों को एक साथ एक धागे में पिरोने का काम इसकी लेखन-निर्देशन टीम ने बहुत ही शानदार तरीके से किया है। सीरीज की तकनीकी टीम में इसके सिनेमैटोग्राफर शिव प्रकाश राठौर, संपादक गौरव गोपाल झा, कॉस्ट्यूम डिजाइनर करिश्मा शर्मा, प्रोडक्शन डिजाइनर तर्पण श्रीवास्तव और साउंड डिजाइनर्स अंकिता पुरकायस्थ व सुदीप्ता साधुखान का कार्य विशेष रूप से उल्लेखनीय बन पड़ा है।


सीरीज के निर्माता-शो रनर सूरज बड़जात्या, निर्देशक पलाश वासवानी और अभिनेता जमील खान का एक्सक्लूसिव वीडियो इंटरव्यू यहां देख सकते हैं..
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