निर्माताः अरुणा भाटिया-नितिन केनी
निर्देशकः टीनू सुरेश देसाई
सितारेः अक्षय कुमार, इलियाना डिक्रूज, अर्जुन बाजवा, ईशा गुप्ता
रेटिंग ***
थोड़-सी बेवफाई और थोड़ी-सी देशभक्ति। दोनों को मिला कर जो एंटरटेनमेंट बना है, उसी का नाम है रुस्तम। 1959 के चर्चित नानावटी कांड पर आधारित यह कहानी कहने को सच्ची है, मगर अंदाज-ए-बयां फिल्मी है। आप अक्षय कुमार को गंभीर, देशभक्त और वर्दी वाले रोल देखने के इच्छुक हैं तो फिल्म आपके लिए है।
हा, एक्शन का अभाव जरूर थोड़ा खटकेगा। लेकिन अदालत में रचे कुछ चुटीले दृश्य मनोरंजन की भरपाई कर देंगे। फिल्म इस इमोशनल सूत्र को पकड़ कर चलती है कि जब वर्दी वाला नायक देश की रक्षा के लिए जल-थल या आकाश की सीमा पर तैनात है तो उसकी पत्नी को बरगलाना, गलत राह धकेलना अपराध है। नायक कहता है कि इसके लिए मौत की सजा जायज है।
फिल्म नौसेना के एक पोत पर तैनात अफसर रुस्तम पावरी (अक्षय कुमार) की है, जो एक आदेश के बाद अचानक तय तारीख से पहले लौट आता है। वह पाता है कि पत्नी सिंथिया (इलियाना डिक्रूज) घर पर नहीं है। उसके दोस्त विक्रम मखीजा (अर्जुन बाजवा) के घर गई है। रुस्तम पहुंचता है और कार से बैठे हुए दोनों को बालकनी में अंतरंग देखता है।
रस्तम लौट आता है। पत्नी सुबह लौटती है और पति को अचानक पाकर घबरा जाती है। पति उसे बेवफाई के सुबूत खत दिखाते हुए निकल जाता है और कुछ ही मिनटों में आप पाते हैं कि विक्रम के घर जाकर रुस्तम ने उसके सीने में तीन गोलियां दाग दीं। वो तीन गोलियां, जिन्होंने देश को हिला दिया। विक्रम को सजा देकर रुस्तम पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करता है। इसके बाद जांच और अदालत की लंबी कार्रवाई। रुस्तम बरी होगा या उसे सजा मिलेगी?